स्मार्टफोन, UPI और Credit Card ने Gen-Z की spending habits को पूरी तरह बदल दिया है. अब विदेश यात्रा हो, Music Concert, नया Smartphone या रोजमर्रा की Shopping, हर खर्च के लिए जेब में पूरी रकम होना जरूरी नहीं रह गया है. Credit Card, Personal Loan और Buy Now, Pay Later जैसी सुविधाओं ने आज की जरूरत या इच्छा को भविष्य की कमाई से पूरा करना आसान बना दिया है.
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लेकिन यही बदलता Trend अब चिंता का कारण भी बन रहा है. सवाल यह नहीं है कि युवा कितना खर्च कर रहे हैं, बल्कि यह है कि इस खर्च को Finance कैसे किया जा रहा है?
22 की उम्र में Credit System में Entry
2000 के बाद पैदा हुई Gen-Z करीब 22 साल की उम्र में ही Formal Credit System का हिस्सा बन रही है. शुरुआत अक्सर छोटे Credit Products से होती है.
- Credit Card.
- छोटे Personal Loan.
- Buy Now, Pay Later यानी BNPL.
- EMI आधारित Shopping.
यानी Financial Planning का सवाल धीरे-धीरे बदल रहा है. पहले पूछा जाता था, "मेरे पास इसे खरीदने के पैसे हैं या नहीं?" अब सवाल बन गया है, "इसकी EMI मैं कितनी आसानी से चुका सकता हूं?"
यहीं से RBI की चिंता समझ आती है.
Household Debt की तस्वीर क्यों बदल रही है?
RBI के आंकड़ों के मुताबिक, मार्च 2026 तक Household Borrowings में Non-Housing Retail Loans की हिस्सेदारी बढ़कर 58.4% हो गई, जो मार्च 2025 में 54.9% थी.
Personal Borrowing में भी बड़ा उछाल आया है.
- Other Personal Loans का बकाया मार्च 2022 के ₹9.02 लाख करोड़ से बढ़कर मार्च 2026 में ₹17.32 लाख करोड़ हो गया.
- Gold Jewellery के बदले लिए गए Loans का बकाया इसी अवधि में ₹74,738 करोड़ से बढ़कर ₹4.61 लाख करोड़ पहुंच गया.
यानी कहानी सिर्फ कर्ज बढ़ने की नहीं है. कर्ज किस चीज के लिए लिया जा रहा है, उसकी तस्वीर भी बदल रही है.
अब Loan सिर्फ घर खरीदने के लिए नहीं
भारत की Credit-Eligible Population करीब 89 करोड़ है. इनमें लगभग एक-तिहाई लोग पिछले एक साल में किसी न किसी Credit Obligation से जुड़े रहे, जैसे Loan, EMI या Credit Card Bill.
वहीं Credit-Active Consumers में करीब आधे लोगों के पास Consumption Loan है.
इसका सीधा मतलब है कि Credit अब सिर्फ घर, शिक्षा या कारोबार जैसे बड़े फैसलों तक सीमित नहीं है. इसका इस्तेमाल Lifestyle और रोजमर्रा की Consumption के लिए भी बढ़ रहा है.
Travel और Concert भी Credit से Finance?
Travel और Entertainment Spending इस बदलाव की एक झलक दिखाती है.
Bank of Baroda के अर्थशास्त्रियों के अनुमान के मुताबिक, पिछले 24 महीनों में Music Concerts से जुड़ा खर्च करीब ₹1,600-2,000 करोड़ रहा हो सकता है. वहीं 2025 की पहली छमाही में लिए गए Personal Loans में 25% से ज्यादा रकम Travel के लिए इस्तेमाल हुई.
इसका मतलब यह नहीं है कि Gen-Z का ज्यादातर खर्च Travel या Concerts पर हो रहा है. असली मुद्दा यह है कि Lifestyle खर्चों के लिए भी Credit का इस्तेमाल बढ़ रहा है.
छोटे Personal Loans में Risk ज्यादा क्यों?
RBI के आंकड़े Unsecured Retail Loans में बढ़ते Stress की ओर भी इशारा करते हैं.
- Unsecured Retail Loans का Gross NPA Ratio मार्च 2025 के 1.2% से बढ़कर मार्च 2026 में 1.8% हो गया.
- ₹50,000 से कम के छोटे Personal Loans में Fintech कंपनियों की हिस्सेदारी 56.8% है.
- इसी Segment में मार्च 2026 की Delinquency Rate 6.4% रही.
यानी छोटे-छोटे कर्ज आसानी से मिल रहे हैं, लेकिन Income में थोड़ा सा झटका आने पर इन्हीं Loans की Repayment चुनौती बन सकती है.
असली सवाल खर्च नहीं, Repayment Capacity है
Credit लेना अपने आप में गलत नहीं है. सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए तो Credit Card और Loan उपयोगी Financial Tools हैं.
समस्या तब शुरू होती है जब Income बढ़ने से पहले Debt बढ़ने लगे. एक Credit Card Bill के ऊपर Personal Loan, फिर BNPL और उसके बाद दूसरी EMI. हर खर्च अलग-अलग छोटा लग सकता है, लेकिन महीने के अंत में Income का बड़ा हिस्सा Debt Repayment में जा सकता है.
यही Gen-Z के लिए सबसे बड़ा Financial सवाल है.
क्या आज की कमाई खर्च हो रही है, या आने वाली कमाई भी आज ही खर्च की जा रही है?
और शायद RBI की चिंता भी आखिरकार इसी सवाल के इर्द-गिर्द है.
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