अब CNG-PNG में मिलाई जाएगी कचरे और गोबर से बनी बायोगैस, कैबिनेट ने दी मंजूरी !

चिराग ठाकुर

07 Aug 2026 (अपडेटेड: Aug 7 2026 2:07 PM)

सरकार ने 23,731 करोड़ रुपये की गोबरधन योजना को मंजूरी दी है. इससे सीएनजी और पीएनजी में बायोगैस मिलाई जाएगी. कचरे से ईंधन बनेगा और किसानों को कमाई का नया रास्ता मिलेगा.

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न्यूज़ हाइलाइट्स

योजना पर अगले 10 वर्षों में 23,731 करोड़ रुपये खर्च होंगे

वित्त वर्ष 2026-27 से बायोगैस ब्लेंडिंग 3 फीसदी से शुरू होगी

2028-29 से सीएनजी और पीएनजी नेटवर्क में हिस्सा 5 फीसदी होगा

देश में पेट्रोल-डीजल और गैस के आयात को कम करने के लिए सरकार अब एक नए ईंधन पर बड़ा दांव लगाने जा रही है. आने वाले समय में घरों में पहुंचने वाली PNG और गाड़ियों में इस्तेमाल होने वाली CNG में बायोगैस मिलाई जाएगी. केंद्र सरकार ने गोबरधन योजना के तहत 23,731 करोड़ रुपये के निवेश को मंजूरी दी है. इस योजना का मकसद अगले 10 साल में देश में कंप्रेस्ड बायोगैस यानी CBG का उत्पादन तेजी से बढ़ाना है. सरकार का कहना है कि इससे एक तरफ देश को साफ ऊर्जा मिलेगी, वहीं दूसरी तरफ किसानों और गांवों में कमाई के नए मौके भी बनेंगे.

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सरकार ने बायोगैस मिलाने का लक्ष्य धीरे-धीरे बढ़ाने की योजना बनाई है. इसके तहत साल 2026-27 में CNG और PNG में 3 फीसदी बायोगैस मिलाने का लक्ष्य है. साल 2027-28 में यह बढ़कर 4 फीसदी हो जाएगा. 2028-29 से आगे 5 फीसदी तक बायोगैस मिलाई जाएगी. यानी आने वाले वर्षों में गैस इस्तेमाल करने वाले लोगों को मिलने वाली CNG और PNG में बायोगैस की मात्रा बढ़ती जाएगी.

कैसे बनेगी बायोगैस?

इस योजना के तहत बेकार चीजों को इस्तेमाल करके ऊर्जा बनाई जाएगी.

  • पशुओं का गोबर.
  • खेतों से निकलने वाला कचरा.
  • चीनी मिलों से निकलने वाला कचरा.
  • शहरों का गीला कचरा.

किसानों को कैसे होगा फायदा?

सरकार का फोकस सिर्फ गैस उत्पादन बढ़ाने पर नहीं है. इस योजना से किसानों की आय बढ़ाने की भी कोशिश की जा रही है. यानी जो चीजें अभी बेकार समझी जाती हैं, उनका इस्तेमाल कमाई के साधन के तौर पर किया जाएगा.अगर गांवों में बायोगैस प्लांट लगते हैं तो- 

  • किसानों को गोबर और कृषि कचरे से कमाई का मौका मिलेगा.
  • गांवों में नए रोजगार पैदा होंगे.
  • जैविक खाद का उत्पादन बढ़ेगा.

कंपनियों को मिलेगा निवेश का भरोसा

सरकार ने बायोगैस बनाने वाली कंपनियों को बढ़ावा देने के लिए कई सुविधाओं का ऐलान किया है. सरकार का मानना है कि इससे ज्यादा से ज्यादा कंपनियां CBG प्लांट लगाने के लिए आगे आएंगी.

  • बायोगैस खरीदने की व्यवस्था.
  • कीमत तय करने की सुविधा.
  • आर्थिक मदद.
  • पाइपलाइन से जोड़ने में सहायता.
  • नई तकनीक के लिए सपोर्ट.

10 साल तक तय रहेगी बायोगैस की कीमत 

बायोगैस बनाने वाली कंपनियों को लंबे समय तक कमाई का भरोसा देने के लिए सरकार ने कीमत तय करने की व्यवस्था भी बनाई है. इसके तहत कम से कम 10 साल के लिए बायोगैस की कीमत तय रहेगी. सरकार ने इसकी कीमत 2,110 रुपये प्रति MMBTU निर्धारित की है.

इससे कंपनियां अपने निवेश और उत्पादन की बेहतर योजना बना पाएंगी.पहले से चल रही योजनाओं को भी मिलेगा फायदा नई योजना को सरकार की पहले से चल रही बायोएनर्जी योजनाओं के साथ जोड़ा जाएगा. इनमें SATAT योजना और दूसरी बायोएनर्जी योजनाएं शामिल हैं. सरकार के मुताबिक, देश में अब तक 200 से ज्यादा CBG प्लांट लगाए जा चुके हैं.

भारत की ऊर्जा जरूरतों में आएगी मदद 

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़ी मात्रा में कच्चे तेल और गैस का आयात करता है. ऐसे में घरेलू स्तर पर बायोगैस जैसे विकल्प बढ़ाना सरकार की बड़ी रणनीति का हिस्सा है. अगर यह योजना सही तरीके से लागू होती है तो इससे:

  • गैस आयात पर निर्भरता कम हो सकती है.
  • साफ ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा.
  • कचरे का बेहतर इस्तेमाल होगा.

कुल मिलाकर, सरकार अब गोबर और कचरे को सिर्फ वेस्ट नहीं, बल्कि ऊर्जा और कमाई के नए स्रोत के तौर पर इस्तेमाल करने की तैयारी कर रही है.

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