Gold Import Duty: भारत में सोने पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाने का असर अब बाजार में साफ दिखाई देने लगा है. वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल यानी WGC का कहना है कि ऊंची ड्यूटी के कारण वैध कारोबार दबाव में आ गया है, जबकि अवैध तरीके से सोना लाने वाले नेटवर्क फिर से सक्रिय होने लगे हैं. इसका असर सिर्फ गोल्ड ट्रेड पर ही नहीं, बल्कि सरकारी राजस्व और संगठित ज्वेलरी कारोबार पर भी पड़ सकता है.
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इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ने के बाद बदला बाजार का माहौल
सरकार ने 13 मई को सोने पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दी थी. इसके अलावा सोने पर 3 प्रतिशत जीएसटी भी लागू है. यानी कानूनी तरीके से आयात किए गए सोने पर कुल टैक्स का बोझ करीब 18 प्रतिशत तक पहुंच जाता है. यही टैक्स अंतर अब ग्रे मार्केट के लिए सबसे बड़ा अवसर बन गया है. वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल का मानना है कि कानूनी और अवैध कारोबार के बीच बढ़ा यह अंतर तस्करी को फिर से बढ़ावा दे रहा है. इसका सबसे ज्यादा नुकसान संगठित कारोबारियों को उठाना पड़ रहा है, जिन्हें नियमों के तहत कारोबार करना पड़ता है.
जब्ती के आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता
ड्यूटी बढ़ने के बाद जांच एजेंसियों की कार्रवाई में भी तेजी देखने को मिली है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 13 मई से 30 जून के बीच 160.91 किलोग्राम सोना जब्त किया गया. इससे पहले 1 अप्रैल से 12 मई के बीच 86.16 किलोग्राम सोना पकड़ा गया था. यानी ड्यूटी बढ़ने के बाद जब्त किए गए सोने की मात्रा लगभग दोगुनी हो गई. यह संकेत देता है कि अवैध सप्लाई चैन दोबारा सक्रिय होती दिखाई दे रही है.
पहले घटी थी तस्करी, अब फिर बढ़ने का अनुमान
बीते दो वर्षों में गोल्ड स्मगलिंग में लगातार कमी दर्ज की गई थी. वर्ष 2024 में अवैध तरीके से आने वाले सोने की मात्रा घटकर 69.2 टन रह गई थी, जबकि एक साल पहले यह 156.1 टन थी. इसके बाद 2025 में यह आंकड़ा और गिरकर 20.4 टन तक पहुंच गया. लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए इंडस्ट्री से जुड़े जानकारों का अनुमान है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो 2026 में अवैध गोल्ड इंपोर्ट 100 टन से अधिक पहुंच सकता है.
गोल्ड इंपोर्ट और मांग दोनों में गिरावट
ऊंची कीमतों और बढ़ी हुई ड्यूटी का असर देश के गोल्ड इंपोर्ट पर भी दिखाई दिया है. जून तिमाही में भारत का नेट गोल्ड इंपोर्ट सालाना आधार पर 23 प्रतिशत घटकर 98.1 टन रह गया. यह सितंबर 2020 के बाद सबसे कम तिमाही आयात है. सिर्फ आयात ही नहीं, कुल गोल्ड डिमांड भी कमजोर रही. जून तिमाही में देश की कुल मांग 6 प्रतिशत घटकर 131.4 टन पर आ गई. इसकी मुख्य वजह ज्वेलरी की खरीद में आई कमी रही. हालांकि निवेश के लिए सोने की खरीद ने बाजार को कुछ हद तक सहारा दिया.
क्या दूसरी छमाही में लौट सकती है मांग?
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल का मानना है कि अगर सोने की कीमतों में ज्यादा उतार-चढ़ाव नहीं होता और बाजार स्थिर रहता है, तो साल की दूसरी छमाही में खरीदारी दोबारा बढ़ सकती है. ऐसे कई ग्राहक हैं जिन्होंने ऊंचे दामों की वजह से पहले खरीदारी टाल दी थी. कीमतें स्थिर होने पर उनके बाजार में लौटने की संभावना बढ़ सकती है.
फिलहाल कहां है सोने का भाव?
खबर लिखे जाने तक MCX पर 5 अगस्त 2026 एक्सपायरी वाला सोना करीब 0.06 प्रतिशत की बढ़त के साथ लगभग 1.42 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया. इसी साल 29 जनवरी 2026 को सोने ने अपना ऑल टाइम हाई बनाया था. इसके बाद कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिला है.
सरकार के सामने दोहरी चुनौती
सरकार ने इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाकर गोल्ड इंपोर्ट कम करने, व्यापार घाटा नियंत्रित करने और रुपये पर दबाव घटाने की कोशिश की है. लेकिन दूसरी तरफ इसका एक दूसरा असर भी सामने आ रहा है. ऊंची ड्यूटी की वजह से ग्रे मार्केट को बढ़ावा मिलने की आशंका बढ़ गई है. अगर अवैध कारोबार बढ़ता है तो सरकार को राजस्व का नुकसान हो सकता है. साथ ही नियमों का पालन करने वाले संगठित कारोबारी भी प्रतिस्पर्धा में पिछड़ सकते हैं.
आगे किन बातों पर रहेगी नजर?
अब बाजार की नजर दो अहम पहलुओं पर रहेगी. पहला, क्या सरकार गोल्ड इंपोर्ट ड्यूटी को लेकर आगे कोई नई नीति अपनाती है. दूसरा, क्या कीमतों में स्थिरता आने के बाद ज्वेलरी की मांग दोबारा बढ़ती है. फिलहाल इतना साफ है कि सोने की ऊंची कीमतों और बढ़े हुए टैक्स ने भारतीय गोल्ड मार्केट की तस्वीर बदल दी है. आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि बाजार दोबारा संतुलन बनाता है या फिर ग्रे मार्केट की गतिविधियां और तेज होती हैं.
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