भारतीयों के लिए सोना बना मुश्किल वक्त का सहारा, गोल्ड लोन में 69% की तेज बढ़ोतरी, जानिए क्यों बढ़ रही मांग

संदीप शर्मा

• 06:42 PM • 10 Aug 2026

आरबीआई की सख्ती के बाद भी गोल्ड लोन की मांग बनी हुई है. जून 2026 तक एनबीएफसी का बकाया पोर्टफोलियो 69.3 फीसदी बढ़कर 3.41 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया. पूरी तस्वीर जानें.

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न्यूज़ हाइलाइट्स

NBFC का गोल्ड लोन पोर्टफोलियो 69.3% बढ़कर ₹3.41 लाख करोड़

रिटेल लोन की तुलना में गोल्ड लोन की ग्रोथ 3 गुना बढ़ी

बैंकों का गोल्ड लोन के विस्तार पर जोर

घर में अचानक पैसों की जरूरत हो, मेडिकल इमरजेंसी हो या फिर कारोबार बढ़ाने के लिए रकम चाहिए—ऐसे समय में भारतीय परिवारों के लिए सोना अब भी सबसे बड़ा सहारा बना हुआ है. बैंक लॉकर या घर में रखे गहनों के बदले आसानी से कर्ज मिलने की वजह से गोल्ड लोन की मांग तेजी से बढ़ रही है. RBI के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, जून 2026 तक NBFC कंपनियों का गोल्ड लोन पोर्टफोलियो सालाना आधार पर 69.3% बढ़कर 3.41 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया. खास बात यह है कि इसी दौरान पूरे रिटेल क्रेडिट पोर्टफोलियो की ग्रोथ सिर्फ 20.3% रही. यानी रिटेल लोन के मुकाबले गोल्ड लोन की ग्रोथ तीन गुना से भी ज्यादा रही है.

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गोल्ड लोन की मांग तेज़

गोल्ड लोन कारोबार में तेजी ऐसे समय आई है, जब RBI ने इस सेक्टर के नियमों को सख्त किया है.केंद्रीय बैंक ने गोल्ड लोन कारोबार में कुछ कमियां सामने आने के बाद नियमों को मजबूत किया. इन नियमों का मकसद सोने की सही वैल्यूएशन, LTV यानी Loan-to-Value की निगरानी और सोना नहीं चुका पाने की स्थिति में होने वाली नीलामी की प्रक्रिया को ज्यादा पारदर्शी बनाना है.
इसके बावजूद गोल्ड लोन की मांग में कोई बड़ी कमी नहीं आई है. इसकी एक बड़ी वजह यह है कि सोने के बदले लोन लेना आमतौर पर दूसरे असुरक्षित कर्ज की तुलना में आसान और तेज माना जाता है. ग्राहक को अपने सोने के बदले रकम मिल जाती है और कर्ज चुकाने के बाद वह अपना सोना वापस ले सकता है.

गोल्ड लोन कारोबार बढ़ाने पर जोर

गोल्ड लोन की बढ़ती मांग को देखते हुए अब बैंक भी इस कारोबार पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं.NBFC कंपनियां जहां तेज प्रोसेसिंग और आसान लोन प्रक्रिया के जरिए ग्राहकों को आकर्षित कर रही हैं, वहीं बैंक भी डिजिटल प्रक्रिया और तेजी से लोन अप्रूवल पर जोर दे रहे हैं. मिसाल के तौर पर Indian Bank ने देशभर में 725 शाखाओं को विशेष गोल्ड लोन सेंटर के तौर पर विकसित किया है. बैंक इन केंद्रों पर करीब 15 मिनट में गोल्ड लोन अप्रूवल देने की सुविधा पर जोर दे रहा है. वहीं Union Bank और Federal Bank जैसे बैंक भी गोल्ड लोन कारोबार का विस्तार कर रहे हैं.

बढ़ी Gold Appraisers की संख्या

गोल्ड लोन की बढ़ती मांग का असर बैंकों में सोने की जांच और उसकी कीमत तय करने वाले Gold Appraisers यानी गोल्ड वैलुअर्स की संख्या पर भी दिख रहा है. आंकड़ों के मुताबिक, Indian Bank ने पिछले छह महीनों में 982 नए अप्रैजर्स जोड़े हैं. इसके साथ बैंक के कुल अप्रैजर्स की संख्या बढ़कर 3,538 हो गई है. वहीं Indian Overseas Bank ने भी अपने गोल्ड अप्रैजर नेटवर्क का विस्तार किया है.

आखिर क्यों बढ़ रही गोल्ड लोन की मांग?

गोल्ड लोन की बढ़ती मांग के पीछे कई वजहें हैं. सबसे बड़ी वजह है सोने का आसानी से कर्ज में इस्तेमाल हो जाना. किसी परिवार के पास अगर गहने हैं और अचानक पैसों की जरूरत पड़ती है, तो उसे बेचने के बजाय उन गहनों को गिरवी रखकर लोन लिया जा सकता है. इसके अलावा गोल्ड लोन की प्रक्रिया आमतौर पर दूसरे कई कर्जों की तुलना में तेज होती है. बैंक या NBFC सोने की जांच और वैल्यूएशन के आधार पर लोन की राशि तय करते हैं. यही वजह है कि मेडिकल खर्च, बच्चों की पढ़ाई, शादी, कारोबार की जरूरत या किसी दूसरी इमरजेंसी में लोग गोल्ड लोन का सहारा लेते हैं.

सोना बना परिवारों की Financial Safety Net

दिलचस्प बात यह है कि एक तरफ इंडस्ट्री और सर्विस सेक्टर से जुड़े कर्ज की ग्रोथ की रफ्तार कुछ धीमी हुई है, वहीं सोने के बदले कर्ज लेने की मांग तेजी से बढ़ रही है. इससे यह संकेत मिलता है कि भारतीय परिवारों के लिए सोना सिर्फ निवेश या गहनों तक सीमित नहीं है, बल्कि जरूरत पड़ने पर यह Financial Safety Net की तरह भी काम करता है. हालांकि, गोल्ड लोन लेते समय ब्याज दर, प्रोसेसिंग फीस, भुगतान की अवधि और समय पर EMI या बकाया चुकाने की क्षमता को समझना जरूरी है. कर्ज चुकाने में नाकाम रहने पर गिरवी रखा सोना नीलाम भी किया जा सकता है. यानी सोने की कीमत और गोल्ड लोन की बढ़ती मांग ने इसे भारतीय परिवारों के लिए एक अहम वित्तीय सहारे में बदल दिया है, लेकिन इस सुविधा का इस्तेमाल सोच-समझकर करना भी उतना ही जरूरी है.