सोना लगातार हो रहा महंगा, लेकिन फिर भी गिरवी रखने की क्यों मची होड़? बैंक ने बताए 3 बड़े कारण

Gold Loan: साल 2025 में सोना रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुका है, इसके बावजूद लोग बड़ी संख्या में सोना गिरवी रखकर गोल्ड लोन ले रहे हैं. हैरानी की बात यह है कि एक साल में गोल्ड लोन में 125% तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. बैंक लोन की तुलना में गोल्ड लोन क्यों तेजी से बढ़ रहा है, बैंक इसे सबसे सुरक्षित कर्ज क्यों मान रहे हैं और RBI के नियमों का इसमें क्या रोल है? जानिए सोने की बढ़ती कीमतों और गोल्ड लोन की रिकॉर्ड रफ्तार के पीछे के 3 बड़े कारण.

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सौरभ दीक्षित

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साल 2025 में सोने ने अपनी चमक पर चार चांद लगा लिए. जो सोने पहले ही महंगा था 2025 में उसने कई साल पुराने रिकॉर्ड तोड़े और अपने ऑल टाइम पर भी पहुंच गया. पिछले एक साल से लगातार बढ़ रहे सोने के दाम से लोगों को परेशानी भी हुई तो कई लोगों ने इसका गजब का इस्तेमाल भी किया है. सोने की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर होने के बावजूद भी लोग बड़ी संख्या में सोना गिरवी रखकर गोल्ड लोन ले रहें है और एक ही साल में गोल्ड लोन 125% तक बढ़ गया है. आइए विस्तार से जानते है आखिर इसके पीछे की क्या है वजह?

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बैंक लोन से ज्यादा बढ़ा गोल्ड लोन

पिछले एक साल में सोने की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया है. सोना जितना महंगा होता गया, उतना ही लोगों के लिए वह एक मजबूत सहारा बन गया. अब सीधी सी बात है जब आपके पास सोना है और उसकी कीमत बढ़ गई है तो बैंक आपको उसी सोने के बदले ज्यादा लोन देने को तैयार हो जाते हैं. यही वजह है कि नवंबर 2025 तक गोल्ड लोन में पिछले साल की तुलना में 125% की बढ़ोतरी देखी गई, जबकि कुल बैंक लोन सिर्फ करीब 11.5% ही बढ़ा.

क्यों तेजी से बढ़ रहा गोल्ड लोन?

गोल्ड लोन के तेजी बढ़ने के पीछे बैंक ने 3 बड़े कारण बताएं है:

पहला कारण- सुरक्षित लोन

बैंक अब ऐसे कर्ज देना ज्यादा पसंद कर रहे हैं, जिनमें जोखिम कम हो. सोना गिरवी होता है, इसलिए गोल्ड लोन बैंक के लिए सबसे सुरक्षित कर्ज माना जाता है.

दूसरा कारण- सोने की बढ़ती कीमत

सोना महंगा हुआ, तो उसी सोने पर मिलने वाला लोन भी बढ़ गया. लोगों को बिना ज्यादा कागजी झंझट के तुरंत पैसा मिलने लगा.

तीसरा कारण- नियमों में बदलाव

भारतीय रिजर्व बैंक के निर्देशों के बाद कुछ रिटेल लोन को अब गोल्ड लोन की कैटेगरी में गिना जाने लगा है. इससे आंकड़ों में गोल्ड लोन और ज्यादा बढ़ता दिखा.

सोना गिरवी रखने की मच होड़

अभी भी पूरे बैंकिंग सिस्टम में गोल्ड लोन का हिस्सा 2% से कम है. लेकिन रकम छोटी नहीं है बल्कि करीब 3.6 लाख करोड़ रुपये है. सबसे अहम बात यह है कि नवंबर 2025 तक दिए गए नए कर्जों में गोल्ड लोन का हिस्सा 12% रहा. मतलब नए लोन में हर आठवां रुपया सोने के बदले दिया गया. गोल्ड लोन के साथ-साथ छोटे और मध्यम कारोबारियों यानी MSME को दिए जाने वाले लोन भी बढ़े हैं. MSME का कुल बकाया लोन करीब 9.5 लाख करोड़ रुपये है. यह कुल बैंक लोन का सिर्फ 5% है, लेकिन नए कर्जों में इनका हिस्सा भी 12% रहा. इसका मतलब साफ है बैंक अब छोटे कारोबारियों और आम लोगों पर ज्यादा भरोसा दिखा रहे हैं.

बड़ी कंपनियों और गोल्ड लोन

अगर बात बड़ी कंपनियों की हो तो उनका का कुल बकाया लोन करीब 28.7 लाख करोड़ रुपये है. लेकिन नए कर्जों में उनका हिस्सा सिर्फ 3.6% ही रहा. क्योंकि बड़ी कंपनियां अब या तो अपने पुराने कर्ज चुका रही हैं या फिर बॉन्ड मार्केट या अपनी कमाई से काम चला रही हैं. होम लोन कुल बैंक लोन का करीब 16% हिस्सा है. लेकिन नए कर्जों में यह सिर्फ 14% रहा. मतलब साफ है कि लोग घर खरीद रहे हैं, लेकिन उतनी तेजी से नहीं जितनी पहले थी. यानी, पूरी तस्वीर को देखें तो आज बैंक बड़े उद्योगों से ज्यादा आम लोगों और छोटे कारोबारियों को लोन दे रहे हैं.

गोल्ड लोन तोड़ रहा रिकॉर्ड

सोना महंगा होने का मतलब सिर्फ निवेश नहीं, बल्कि तुरंत पैसा पाने का जरिया भी है. लोग सुरक्षित तरीके से कर्ज लेना चाहते हैं, और बैंक सुरक्षित तरीके से कर्ज देना चाहते हैं. यही वजह है कि रिकॉर्ड सोने की कीमतों के बीच गोल्ड लोन रिकॉर्ड तोड़ रहा है. आने वाले समय में इससे बैंकों की कमाई बढ़ेगी, लेकिन उनके जोखिम का तरीका भी बदल जाएगा.

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