अगर आपके घर में सोना रखा है, तो यह खबर आपके काम की है. सरकार घरों में पड़े सोने के एक हिस्से को बैंकिंग व्यवस्था और बाजार तक लाने की तैयारी में है. इसके लिए गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम का नया रूप लाने पर काम चल रहा है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारतीय घरों में करीब 30,000 टन सोना है. सरकार का मकसद इस सोने के इस्तेमाल को बढ़ाना और सोने के आयात पर निर्भरता कम करना है. हालांकि, सरकार ने अभी नई योजना की पूरी जानकारी जारी नहीं की है.
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3 जुलाई को सोना और चांदी का भाव
एमसीएक्स पर 3 जुलाई को दोपहर करीब साढ़े 12 बजे 5 अगस्त 2026 डिलीवरी वाला सोना 1,741 रुपये की तेजी के साथ 1,47,375 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था.4 सितंबर 2026 डिलीवरी वाली चांदी 3,796 रुपये की तेजी के साथ 2,37,100 रुपये प्रति किलो पर कारोबार कर रही थी.
क्या है सरकार की तैयारी
रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार अगस्त में गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम का नया मॉडल ला सकती है. इस पर पिछले दो हफ्तों में वरिष्ठ मंत्रियों, आरबीआई, बैंकों और गोल्ड कारोबार से जुड़े प्रतिनिधियों के बीच कई दौर की बैठकें हुई हैं. इन बैठकों में योजना को अंतिम रूप देने पर चर्चा हुई है.
इस बार सबसे बड़ा बदलाव जूलर्स यानी सर्राफा कारोबारियों की भूमिका हो सकती है. अब तक इस स्कीम में उनकी सीधी भूमिका नहीं थी. नई व्यवस्था में लोग चाहें तो अपना सोना सीधे बैंक की जगह भरोसेमंद जूलर के जरिए जमा कर सकेंगे.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, जूलर्स सोने की जांच करेंगे, उसकी शुद्धता की पुष्टि करेंगे, और फिर उसे अधिकृत रिफाइनर और बैंकों तक पहुंचाएंगे. इस पूरी प्रक्रिया का रिकॉर्ड रखा जा सकता है. बदले में जूलर्स को सेवा शुल्क या हैंडलिंग चार्ज मिल सकता है.
सरकार यह कदम क्यों उठाना चाहती है
भारत दुनिया के बड़े सोना खरीदने वाले देशों में शामिल है. देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से मंगाता है. ऐसे में ज्यादा आयात होने पर विदेशी मुद्रा बाहर जाती है. यही वजह है कि सरकार लंबे समय से सोने के आयात को कम करना चाहती है.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मई में भारत का सोना आयात घटकर करीब 12 अरब डॉलर रह गया. सरकार चाहती है कि विदेश से नया सोना मंगाने की जगह देश में पहले से मौजूद सोने का बेहतर इस्तेमाल हो.
पहले वाली स्कीम क्यों नहीं चली
सरकार ने 2015 में पहली बार गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम शुरू की थी. उम्मीद थी कि लोग बड़ी संख्या में अपना सोना बैंक में जमा करेंगे. लेकिन पिछले करीब 11 वर्षों में यह योजना केवल 39 टन सोना ही जुटा सकी.
बहुत से लोगों के लिए सोना सिर्फ निवेश नहीं, बल्कि भावनाओं और परिवार की विरासत से जुड़ी चीज है.शादी के गहने और धार्मिक महत्व की वजह से लोग अपना सोना आसानी से देना नहीं चाहते.योजना में मिलने वाला ब्याज लोगों को कम लगा.प्रक्रिया को जटिल माना गया, इसलिए कम लोगों ने इसमें हिस्सा लिया.
अब भी क्या साफ नहीं है
सरकार ने अभी नई स्कीम की पूरी जानकारी जारी नहीं की है. अगस्त में इसकी अंतिम शर्तें और नियम सामने आ सकते हैं. ऐसे में लोगों को क्या फायदा मिलेगा, जमा करने की प्रक्रिया कितनी आसान होगी, और भरोसा बढ़ाने के लिए क्या कदम होंगे, यह देखना बाकी है.
कुल मिलाकर सरकार की कोशिश घरों में पड़े सोने के एक हिस्से को देश की अर्थव्यवस्था का हिस्सा बनाने की है, ताकि आयात पर निर्भरता घटे और विदेशी मुद्रा की बचत हो. दूसरी तरफ, भारत में सोना भावनाओं, परंपरा और भरोसे से भी जुड़ा है. ऐसे में नई गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम कितनी सफल होगी, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि सरकार इस बार प्रक्रिया कितनी आसान बनाती है और लोगों का भरोसा कितना जीत पाती है.
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