सोने की कीमतों में पिछले कुछ हफ्तों से उतार-चढ़ाव बढ़ा हुआ है. एक तरफ अमेरिका के मजबूत आर्थिक आंकड़ों ने फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख की आशंका बढ़ाई है, तो दूसरी तरफ मजबूत डॉलर और बॉन्ड यील्ड ने भी Gold पर दबाव बनाया है. ऐसे माहौल में जब बाजार में सोने की तेजी पर सवाल उठने लगे हैं, तब अमेरिकी बैंक Citi ने इसके भविष्य को लेकर अपना अनुमान और मजबूत कर दिया है.
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Citi ने अगले 3 महीनों के लिए Gold का लक्ष्य बढ़ाकर 4,800 डॉलर प्रति औंस कर दिया है. वहीं अगले 6 से 12 महीनों के लिए 5,000 डॉलर प्रति औंस का लक्ष्य दिया है. यानी मौजूदा करीब 4,500 डॉलर के स्तर से करीब 11 फीसदी की और तेजी की संभावना जताई गई है.
पहले समझिए पिछले हफ्ते Gold-Silver का हाल
पिछले हफ्ते की बात करें तो घरेलू बाजार में दोनों कीमती धातुओं पर दबाव देखने को मिला.
- MCX Gold October Futures करीब 1.5 फीसदी गिरकर 1,52,815 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आया.
- MCX Silver December Futures में करीब 1 फीसदी की गिरावट रही.
- चांदी करीब 2,37,500 रुपये प्रति किलो पर कारोबार करती दिखी.
- अंतरराष्ट्रीय बाजार में 4 सितंबर को Gold करीब 1.2 फीसदी फिसला.
इस कमजोरी की बड़ी वजह अमेरिका का मजबूत Jobs Data रहा. इससे बाजार में ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख की आशंका बढ़ी. इसके साथ डॉलर और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में मजबूती ने भी Gold की चमक कम की.
फिर Citi को Gold में इतनी तेजी क्यों दिख रही है?
Citi का पूरा अनुमान सिर्फ सोने की मांग पर आधारित नहीं है. बैंक की नजर Oil, Inflation और ब्याज दरों के बीच के रिश्ते पर है.
Citi का मानना है कि 2026 की चौथी तिमाही यानी अक्टूबर से दिसंबर के बीच Strait of Hormuz में तेल की आवाजाही सामान्य हो सकती है. इस स्थिति की संभावना बैंक ने 65 से 75 फीसदी के बीच बताई है.
अगर Hormuz में स्थिति सामान्य होती है, तो वैश्विक तेल आपूर्ति पर दबाव कम हो सकता है और Crude Oil की कीमतों में गिरावट आ सकती है.
Citi का Brent Crude को लेकर अनुमान भी इसी ओर इशारा करता है.
Citi का अनुमान.
- Q3 Brent Crude: 86 डॉलर प्रति बैरल.
- Q4 Brent Crude: 70 डॉलर प्रति बैरल.
सस्ता Oil Gold के लिए क्यों बन सकता है अच्छा संकेत?
यहां कहानी थोड़ी दिलचस्प है. आम तौर पर Hormuz खुलने को भू-राजनीतिक तनाव घटने के कारण Gold के लिए नकारात्मक माना जा सकता है. लेकिन Citi के हिसाब से कम Oil की वजह से घटने वाला महंगाई का दबाव ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकता है.
इसे आसान भाषा में ऐसे समझिए.
Crude Oil नीचे → Energy Cost कम → Inflation का दबाव घटे → ब्याज दरों में नरमी की गुंजाइश बढ़े → Dollar और Real Rates पर दबाव → Gold को फायदा.
यानी Hormuz का खुलना एक तरफ भू-राजनीतिक जोखिम घटा सकता है, लेकिन दूसरी तरफ सस्ता तेल और कम महंगाई Gold के लिए नया सहारा बन सकते हैं.
Emerging Markets और Central Banks भी अहम
सस्ता Oil सिर्फ Gold की कहानी नहीं बदल सकता, बल्कि Emerging Markets को भी राहत दे सकता है. जिन देशों को महंगे Energy Imports के लिए ज्यादा पैसा खर्च करना पड़ रहा है, उनके बाहरी और वित्तीय दबाव में कमी आ सकती है. इससे एशिया समेत कई उभरते बाजारों में Gold की भौतिक मांग को भी सहारा मिल सकता है.
इसके अलावा Central Banks की Gold खरीदारी लंबे समय से इस बाजार की बड़ी ताकत बनी हुई है. इसलिए Citi की नजर में Gold की लंबी अवधि की कहानी अभी खत्म नहीं हुई है.
लेकिन Citi ने एक जरूरी चेतावनी भी दी है
Citi के मुताबिक अगस्त में Gold की तेजी का एक बड़ा हिस्सा सट्टेबाजी और कागजी कारोबार से आया. यानी कीमतों में तेजी के मुकाबले वास्तविक भौतिक मांग उतनी मजबूत नहीं थी.
इसलिए अगर आने वाले समय में Gold में कुछ गिरावट आती है, तो इसे सीधे तेजी के खत्म होने का संकेत नहीं माना जा सकता. Citi के नजरिए से ऐसी गिरावट आगे की खरीदारी के लिए मौका भी बन सकती है.
सबसे बड़ा जोखिम क्या है?
Gold के लिए तस्वीर पूरी तरह एकतरफा नहीं है. अगर Strait of Hormuz लंबे समय तक बंद रहता है, तो Citi के मुताबिक Brent Crude 110 से 120 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकता है. महंगा तेल महंगाई बढ़ा सकता है और इससे फेड का रुख ज्यादा सख्त रह सकता है. ऐसी स्थिति में Gold पर दबाव बढ़ सकता है.
इसके अलावा अगर दुनियाभर के शेयर बाजारों में बड़ी गिरावट आती है, तो निवेशक दूसरे निवेशों में हुए नुकसान की भरपाई के लिए Gold बेच सकते हैं. इससे भी सोने में अस्थायी गिरावट आ सकती है.
अब Gold के लिए इन 4 संकेतों पर नजर
आने वाले दिनों में Gold की दिशा तय करने में चार फैक्टर सबसे अहम रहेंगे.
- अमेरिका का Inflation Data.
- Fed की ब्याज दर नीति.
- Crude Oil की कीमत.
- Strait of Hormuz से जुड़े घटनाक्रम.
कुल मिलाकर Citi का नजरिया अभी भी Gold के पक्ष में है. बैंक ने अगले 3 महीनों के लिए 4,800 डॉलर और 6 से 12 महीनों के लिए 5,000 डॉलर प्रति औंस का लक्ष्य दिया है. ऐसे में 1.5 लाख रुपये के आसपास दिख रही मौजूदा कमजोरी सिर्फ चिंता की वजह है या अगली बड़ी तेजी से पहले खरीदारी का मौका, इसका जवाब आने वाले महीनों में Oil, Inflation और Fed की चाल से मिलेगा.
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