Gold Outlook: सोने की कीमतों में सितंबर के दौरान आई गिरावट ने निवेशकों की चिंता जरूर बढ़ाई है, लेकिन लंबी अवधि के नजरिए से इसकी तस्वीर अभी भी मजबूत बनी हुई है. ICICI बैंक की रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक, 2027 की पहली छमाही में अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत 4,600 से 5,000 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती है. वहीं, 2026 के बाकी हिस्से में अंतरराष्ट्रीय सोने के 4,200 से 4,600 डॉलर प्रति औंस के दायरे में रहने का अनुमान है.
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घरेलू बाजार की बात करें तो बैंक ने 2026 के बाकी समय के लिए सोने की कीमत 1.40 लाख से 1.60 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के दायरे में रहने का अनुमान बरकरार रखा है. हालांकि, सोने की घरेलू कीमत केवल अंतरराष्ट्रीय बाजार की चाल से तय नहीं होगी. रुपये की मजबूती या कमजोरी भी इसमें अहम भूमिका निभाएगी.
सितंबर में सोने की कीमतों में क्यों आई गिरावट?
अगस्त में करीब 9 फीसदी की तेजी देखने के बाद सितंबर में सोने की कीमतों में लगभग 8 फीसदी का करेक्शन आया है. इस गिरावट के पीछे कई ऐसे कारण रहे, जिन्होंने शॉर्ट टर्म में गोल्ड पर दबाव बढ़ाया. अमेरिकी मौद्रिक नीति को लेकर सख्त रुख की आशंका, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में मजबूती, ऊंची कच्चे तेल की कीमतें और उम्मीद से बेहतर अमेरिकी रोजगार आंकड़ों ने सोने की तेजी पर ब्रेक लगाने का काम किया. सोना आमतौर पर ऐसे माहौल में दबाव में आ सकता है, जहां ब्याज दरों और बॉन्ड यील्ड को लेकर अनिश्चितता बढ़ती है. हालांकि, ICICI बैंक की रिपोर्ट का संकेत है कि मौजूदा दबाव को सोने की लंबी अवधि की कहानी में बदलाव के तौर पर नहीं देखा जा रहा है. यानी नियर टर्म में उतार-चढ़ाव और कंसोलिडेशन देखने को मिल सकता है, लेकिन इसके पीछे मौजूद बुनियादी सपोर्ट अभी भी कायम हैं.
2027 में 5,000 डॉलर तक पहुंचने का अनुमान
ICICI बैंक के मुताबिक, 2027 की पहली छमाही में अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत 4,600 से 5,000 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती है. इसके मुकाबले 2026 के बाकी समय के लिए 4,200 से 4,600 डॉलर प्रति औंस का अनुमान दिया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, मध्यम अवधि में निवेश मांग, केंद्रीय बैंकों की खरीद और वैश्विक स्तर पर बनी आर्थिक, वित्तीय और भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं सोने को सपोर्ट दे सकती हैं. इसके अलावा अमेरिकी वास्तविक ब्याज दरों और डॉलर में नरमी आती है, तो सोने की कीमतों को आगे बढ़ने के लिए अतिरिक्त सहारा मिल सकता है.
केंद्रीय बैंकों की खरीदारी बनी बड़ा सपोर्ट
सोने की कीमतों को सपोर्ट देने वाले अहम फैक्टर्स में केंद्रीय बैंकों की खरीदारी भी शामिल है. रिपोर्ट के अनुसार, चीन के केंद्रीय बैंक ने अगस्त में करीब 20 टन सोना खरीदा. यह अक्टूबर 2023 के बाद उसकी सबसे बड़ी मासिक खरीदारी बताई गई है. केंद्रीय बैंकों की लगातार खरीदारी सोने की वैश्विक मांग को मजबूत रखने वाला एक महत्वपूर्ण फैक्टर है. डॉलर आधारित संपत्तियों से अपने रिजर्व को कुछ हद तक विविध बनाने की कोशिश भी सोने की मांग के लिए अहम मानी जा रही है.
गोल्ड ETF में भी बढ़ी निवेश मांग
सोने को सपोर्ट देने वाला दूसरा बड़ा फैक्टर ETF के जरिए बढ़ती निवेश मांग है. अगस्त में ग्लोबल गोल्ड ETF में करीब 17.8 अरब डॉलर का इनफ्लो दर्ज हुआ. इसके साथ तीसरी तिमाही में गोल्ड ETF की मांग 144.7 टन तक पहुंच गई. भारत में भी गोल्ड ETF में निवेश बढ़ा. अगस्त में भारतीय गोल्ड ETF में करीब 2,600 करोड़ रुपये का इनफ्लो दर्ज किया गया. इससे संकेत मिलता है कि ऊंची कीमतों के बावजूद निवेशकों की एक हिस्से की दिलचस्पी सोने में बनी हुई है.
अमेरिका का कर्ज और राजकोषीय घाटा भी अहम फैक्टर
ICICI बैंक की रिपोर्ट में अमेरिकी राजकोषीय घाटे और बढ़ते सरकारी कर्ज को भी सोने के लिए लंबे समय तक बने रहने वाले सपोर्टिंग फैक्टर के तौर पर देखा गया है. जब वैश्विक निवेशकों और केंद्रीय बैंकों के सामने आर्थिक और वित्तीय अनिश्चितताएं बढ़ती हैं, तो सोने की भूमिका एक हेजिंग एसेट के तौर पर महत्वपूर्ण हो सकती है. यही वजह है कि अमेरिकी कर्ज, राजकोषीय स्थिति और वैश्विक नीतिगत अनिश्चितता जैसे मुद्दे सोने की लंबी अवधि की मांग को प्रभावित कर सकते हैं.
भारत में ₹1.40 लाख से ₹1.60 लाख का अनुमान
भारतीय निवेशकों के लिए घरेलू कीमत सबसे अहम है. ICICI बैंक ने 2026 के बाकी समय के लिए सोने की घरेलू कीमत 1.40 लाख से 1.60 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के दायरे में रहने का अनुमान बरकरार रखा है. घरेलू बाजार में सोने की कीमत पर अंतरराष्ट्रीय गोल्ड प्राइस के अलावा रुपये की चाल का भी असर पड़ेगा. अगर रुपया कमजोर होता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत स्थिर रहने की स्थिति में भी घरेलू सोने की कीमत पर असर पड़ सकता है.
25 सितंबर को MCX गोल्ड का क्या हाल रहा?
हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन यानी 25 सितंबर 2026 को 5 अक्टूबर 2026 एक्सपायरी वाला 10 ग्राम सोना 0.01 फीसदी की मामूली गिरावट के साथ 1,50,700 रुपये पर कारोबार कर रहा था. रिटर्न की बात करें तो पिछले एक हफ्ते में सोने की कीमत में 1.54 फीसदी की गिरावट आई है. एक महीने के दौरान कीमत 4.96 फीसदी नीचे रही है. हालांकि, तीन महीने की अवधि में सोने ने 2.04 फीसदी की बढ़त दर्ज की है. इससे साफ है कि हालिया अवधि में सोने पर दबाव जरूर आया है, लेकिन तीन महीने के नजरिए से इसकी कीमत अभी भी सकारात्मक दायरे में बनी हुई है.
महंगा सोना ज्वेलरी डिमांड पर डाल रहा दबाव
सोने की ऊंची कीमतों का असर इसकी ज्वेलरी मांग पर भी दिखाई दे रहा है. महंगे सोने की वजह से सामान्य आभूषण खरीदारी सीमित रह सकती है. हालांकि, शादी से जुड़ी खरीदारी अपेक्षाकृत मजबूत बनी हुई है. त्योहारी और शादी के मौसम में मांग बढ़ने की संभावना घरेलू बाजार के लिए एक सपोर्टिंग फैक्टर हो सकती है. यानी निवेश मांग और पारंपरिक आभूषण मांग के बीच फिलहाल अलग-अलग ट्रेंड देखने को मिल रहे हैं.
अगस्त में भारत का गोल्ड इंपोर्ट घटा
भारत के सोने के आयात में भी अगस्त के दौरान कमी दर्ज की गई. अगस्त में देश का गोल्ड इंपोर्ट घटकर करीब 2.3 अरब डॉलर रह गया, जबकि जुलाई में यह आंकड़ा 4.2 अरब डॉलर था. यह गिरावट ऐसे समय में आई है जब घरेलू बाजार में सोने की कीमतें ऊंचे स्तरों पर बनी हुई हैं. ऊंची कीमतें उपभोक्ताओं की खरीद क्षमता और ज्वेलरी डिमांड को प्रभावित कर सकती हैं.
आगे सोने की चाल किन चीजों पर निर्भर करेगी?
आने वाले समय में सोने की कीमतों की दिशा तय करने में कई फैक्टर्स की भूमिका रहेगी. अमेरिकी ब्याज दरों और वास्तविक ब्याज दरों की दिशा, डॉलर की चाल, बॉन्ड यील्ड, कच्चे तेल की कीमतें, केंद्रीय बैंकों की खरीद और गोल्ड ETF में निवेश का प्रवाह महत्वपूर्ण रहेगा. इसके अलावा भू-राजनीतिक और वित्तीय अनिश्चितता भी सोने की मांग को प्रभावित कर सकती है. अगर डॉलर और अमेरिकी वास्तविक ब्याज दरों में नरमी आती है और केंद्रीय बैंकों की खरीदारी बनी रहती है, तो सोने के लिए सपोर्ट मजबूत रह सकता है.
फिलहाल ICICI बैंक का अनुमान सोने के लिए मध्यम अवधि में सकारात्मक संभावनाओं की ओर इशारा करता है. हालांकि, 4,600 से 5,000 डॉलर प्रति औंस का अनुमान एक संभावित कीमत दायरा है, इसे निश्चित लक्ष्य या गारंटीड रिटर्न के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए. सोने में आगे भी उतार-चढ़ाव बना रह सकता है और घरेलू कीमतों पर अंतरराष्ट्रीय बाजार के साथ रुपये की चाल का भी सीधा असर पड़ेगा.
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