सोने और चांदी की कीमतों में एक बार फिर तेज उछाल देखने को मिल रहा है. MCX पर 5 अक्टूबर वाला Gold Futures एक हफ्ते में करीब 5.86% चढ़ चुका है, जबकि 4 सितंबर वाला Silver Futures करीब 6.33% ऊपर है. लेकिन निवेशकों के लिए असली सवाल सिर्फ यह नहीं है कि कीमतें कितनी बढ़ी हैं. बड़ा सवाल यह है कि क्या Gold उस दबाव से बाहर निकल रहा है, जिसने 2026 में इसकी तेजी पर ब्रेक लगाया था? अगर ऐसा होता है, तो मौजूदा तेजी आगे चलकर बड़े recovery phase में बदल सकती है.
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2026 में Gold पर क्यों आया दबाव?
Gold की कीमतों पर इस साल सबसे बड़ा असर अमेरिका की ब्याज दरों से पड़ा है. आसान भाषा में समझें तो जब अमेरिका में ब्याज दरें और बॉन्ड से मिलने वाला रिटर्न बढ़ता है, तो निवेशकों को Gold की तुलना में ब्याज देने वाले विकल्प ज्यादा आकर्षक लग सकते हैं. इसका असर Gold की कीमत पर दबाव के रूप में दिखाई देता है.
- अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर बाजार की उम्मीद बदली.
- बॉन्ड से मिलने वाला रिटर्न बढ़ा.
- Gold की कीमत अपने peak से करीब 25% तक नीचे आई.
- इसके बावजूद Gold ने करीब 4,000 डॉलर प्रति औंस का अहम स्तर संभाले रखा.
यही आखिरी पॉइंट अब Gold की अगली चाल के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
क्या Gold पर सबसे बुरा दबाव पीछे छूट गया?
Investment Research फर्म BCA Research के मुताबिक, Gold पर बढ़ती ब्याज दरों का सबसे खराब असर शायद पीछे रह गया है. इसका मतलब यह नहीं है कि अमेरिकी Federal Reserve तुरंत ब्याज दरें घटाने वाला है. बल्कि मुद्दा यह है कि अगर ब्याज दरों में आगे बहुत बड़ी तेजी नहीं आती, तो Gold पर बना दबाव धीरे-धीरे कम हो सकता है.
यानी Gold के लिए सिर्फ Rate Cut ही अच्छी खबर नहीं है. अगर दरें और ज्यादा नहीं बढ़तीं, तो भी Gold को राहत मिल सकती है.
Jefferies के एनालिसिस ने भी दिया संकेत
Gold की अगली चाल को लेकर Jefferies का analysis भी इसी दिशा में इशारा करता है. उसके मुताबिक Gold के लिए यह देखना जरूरी नहीं है कि ब्याज दरें सिर्फ कितनी ऊंची हैं. ज्यादा अहम बात यह है कि अब ब्याज दरों की दिशा क्या है.
- दरें लगातार ऊपर जाती हैं → Gold पर दबाव.
- दरों में तेजी रुकती है → Gold को राहत.
- दरों में गिरावट शुरू होती है → Gold के लिए और मजबूत माहौल.
यानी ब्याज दरों की दिशा बदलना Gold की recovery के लिए एक अहम trigger बन सकता है.
Central Banks भी दे रहे हैं Gold को सहारा
Gold की कहानी सिर्फ अमेरिका की ब्याज दरों तक सीमित नहीं है. दुनिया भर के central banks भी अपने reserves में Gold की हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं. इसके अलावा geopolitical tensions और डॉलर को लेकर अनिश्चितता भी Gold की safe-haven demand को support कर रही है.
Gold को मिल रहा दूसरा बड़ा सपोर्ट:
- Central banks की लगातार Gold खरीदारी.
- दुनिया में बढ़ती geopolitical uncertainty.
- डॉलर को लेकर बदलती सोच.
- आर्थिक और महंगाई से जुड़ी चिंताएं.
इसका मतलब है कि जहां एक तरफ ब्याज दरें Gold के लिए चुनौती हैं, वहीं दूसरी तरफ कई दूसरे factors इसकी कीमत को सहारा दे रहे हैं.
अब Gold की अगली चाल किन चीजों पर निर्भर करेगी?
आने वाले समय में निवेशकों को खास तौर पर तीन संकेतों पर नजर रखनी होगी.
1. अमेरिकी ब्याज दरें: अगर इनमें तेजी रुकती है, तो Gold को राहत मिल सकती है.
2. डॉलर की चाल: डॉलर में बड़ी मजबूती नहीं आती है, तो Gold के लिए माहौल बेहतर रह सकता है.
3. Central Bank Buying: अगर केंद्रीय बैंक लगातार Gold खरीदते रहते हैं, तो इससे demand को सपोर्ट मिलता रहेगा.
हालांकि इसका दूसरा पहलू भी है. अगर अमेरिका में ब्याज दरें फिर तेजी से बढ़ती हैं और डॉलर मजबूत होता है, तो Gold में correction का जोखिम बना रहेगा.
इसलिए अभी Gold के लिए सबसे बड़ा सवाल यह नहीं है कि वह महंगा है या सस्ता. असली सवाल यह है कि अगला बड़ा trigger किस दिशा में जाता है. अगर ब्याज दरों का दबाव कम हुआ और बाकी factors ने साथ दिया, तो मौजूदा तेजी बड़े recovery phase में बदल सकती है. लेकिन अगर अमेरिकी दरें और डॉलर फिर मजबूत हुए, तो निवेशकों को एक और correction के लिए तैयार रहना पड़ सकता है.
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