सोना क्या आने वाले एक साल में ₹1.80 लाख प्रति 10 ग्राम के स्तर तक पहुंच सकता है? चांदी की कीमत भी ₹3.45 लाख प्रति किलो के करीब जा सकती है? लंदन बुलियन मार्केट एसोसिएशन (LBMA) की 2026 ग्लोबल प्रेशियस मेटल्स कॉन्फ्रेंस के सर्वे में सामने आए अनुमानों ने कीमती धातुओं के निवेशकों के बीच नई चर्चा छेड़ दी है. हालांकि, इन बड़े अनुमानों के बीच फिलहाल बाजार में उतार-चढ़ाव भी जारी है.
ADVERTISEMENT
सोमवार को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर दिसंबर वायदा सोना करीब ₹1,500 गिरकर ₹1.50 लाख प्रति 10 ग्राम के स्तर से नीचे आ गया. वहीं, चांदी का दिसंबर वायदा करीब ₹1,700 टूटकर ₹2.24 लाख प्रति किलो के आसपास कारोबार करता दिखा. अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोना करीब 4,185 डॉलर प्रति औंस पर आ गया.
ऐसे में सवाल है कि मौजूदा गिरावट के बावजूद सोने-चांदी को लेकर इतनी तेजी के अनुमान क्यों लगाए जा रहे हैं और निवेशकों को आगे किन बातों पर नजर रखनी चाहिए.
LBMA सर्वे में सोने और चांदी को लेकर क्या अनुमान है?
LBMA के सर्वे में शामिल विशेषज्ञों ने अगले एक साल के लिए सोने की औसत कीमत 5,013.30 डॉलर प्रति औंस रहने का अनुमान जताया है. सर्वे में इस्तेमाल किए गए 4,163.30 डॉलर के संदर्भ भाव के मुकाबले यह करीब 20 फीसदी की संभावित बढ़त है.
चांदी के लिए भी अनुमान काफी ऊंचा है. सर्वे में इसकी कीमत 94.70 डॉलर प्रति औंस रहने की संभावना जताई गई है. 61.23 डॉलर के संदर्भ भाव से तुलना करें, तो यह 54 फीसदी से ज्यादा की बढ़त है.
हालांकि, ध्यान देने वाली बात यह है कि ये विशेषज्ञों के अनुमान हैं, किसी निश्चित तारीख पर मिलने वाली कीमत या निवेश पर रिटर्न की गारंटी नहीं.
भारतीय बाजार में कितना हो सकता है सोने का भाव?
अंतरराष्ट्रीय कीमतों में अनुमानित तेजी को भारतीय बाजार के मौजूदा भाव से जोड़कर देखें, तो सोने के लिए ₹1.80 लाख प्रति 10 ग्राम का स्तर चर्चा में आ सकता है.
इसकी गणना समझिए. अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना करीब 4,180 डॉलर से बढ़कर 5,000 डॉलर प्रति औंस पहुंचता है, तो इसमें लगभग 20 फीसदी की बढ़त होगी. इसी अनुपात से MCX पर करीब ₹1.50 लाख प्रति 10 ग्राम के भाव में बढ़ोतरी जोड़ें, तो कीमत लगभग ₹1.80 लाख तक बैठती है.
चांदी के मामले में भी इसी तरह की गणना के आधार पर ₹2.24 लाख प्रति किलो के भाव से करीब ₹3.45 लाख प्रति किलो का स्तर निकलता है.
लेकिन ये दोनों आंकड़े केवल सांकेतिक गणनाएं हैं, आधिकारिक भारतीय मूल्य लक्ष्य नहीं. असल घरेलू कीमतों पर डॉलर के मुकाबले रुपये की चाल, आयात शुल्क, स्थानीय प्रीमियम और वायदा बाजार की स्थितियों का भी असर पड़ता है.
सोने की कीमतों को किन वजहों से मिल सकता है सहारा?
सोने के लिए तेजी की उम्मीद के पीछे कुछ बड़े वैश्विक कारण हैं.
-
दुनिया भर में बढ़ता सरकारी कर्ज: सरकारों के बढ़ते कर्ज और बजट घाटे को लेकर चिंता बढ़ने पर निवेशक सोने जैसे विकल्पों की ओर रुख कर सकते हैं.
-
केंद्रीय बैंकों की खरीदारी: कई केंद्रीय बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार में विविधता लाने के लिए सोने को अहमियत देते हैं.
-
आर्थिक अनिश्चितता: बाजार में अस्थिरता बढ़ने पर सोने की सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में मांग बढ़ सकती है.
हालांकि, इन कारणों का असर हर समय एक जैसा नहीं होता. ब्याज दरें, डॉलर की मजबूती और निवेशकों की बदलती धारणा सोने की कीमतों पर दबाव भी बना सकती है.
चांदी के लिए क्यों अहम है औद्योगिक मांग?
सोने के मुकाबले चांदी की कीमत पर औद्योगिक मांग का भी बड़ा असर पड़ता है. सौर ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहन, बिजली से जुड़े बुनियादी ढांचे और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़ी तकनीकों में चांदी का इस्तेमाल होता है.
इन क्षेत्रों का विस्तार लंबे समय में चांदी की मांग को सहारा दे सकता है. हालांकि, कीमतें बहुत ज्यादा बढ़ने पर कंपनियां चांदी का इस्तेमाल कम करने या दूसरे विकल्प अपनाने की कोशिश कर सकती हैं. इसलिए औद्योगिक मांग बढ़ना अपने आप में लगातार तेजी की गारंटी नहीं है.
अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों पर क्यों रहेगी नजर?
अल्पावधि में सोने-चांदी की दिशा तय करने में अमेरिका के आर्थिक आंकड़ों की अहम भूमिका हो सकती है. अमेरिकी महंगाई उम्मीद से ज्यादा रहती है, तो फेडरल रिजर्व के ब्याज दरें ऊंची बनाए रखने की संभावना बढ़ सकती है. इससे बॉन्ड यील्ड और डॉलर को मजबूती मिल सकती है, जो सोने पर दबाव डाल सकती है.
इसके उलट, महंगाई के आंकड़े उम्मीद से नरम रहने पर ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद बढ़ सकती है और सोने को सहारा मिल सकता है.
निवेशक क्या करें?
LBMA के सर्वे में सोने और चांदी को लेकर बड़े अनुमान सामने आए हैं, लेकिन निवेशकों को केवल इन अनुमानों के आधार पर खरीदारी का फैसला नहीं करना चाहिए. बाजार की मौजूदा कीमत, अपनी जोखिम उठाने की क्षमता, निवेश की अवधि और पोर्टफोलियो में कीमती धातुओं की हिस्सेदारी को ध्यान में रखना जरूरी है.
आने वाले समय में अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों, डॉलर-रुपये की चाल और वैश्विक मांग पर नजर रखना अहम होगा. सोने के ₹1.80 लाख और चांदी के ₹3.45 लाख तक पहुंचने की गणना संभावित तेजी को समझने का एक तरीका है, लेकिन वास्तविक कीमतें इससे अलग भी रह सकती हैं.
ADVERTISEMENT

