सोना... जिसने पिछले कुछ सालों में निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया है, अब एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है. कुछ समय पहले तक रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचा सोना अब दबाव में नजर आ रहा है. निवेशकों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या गोल्ड की तेजी का दौर खत्म हो चुका है या फिर यह सिर्फ एक सामान्य गिरावट है.
ADVERTISEMENT
अगर पिछले 30 साल के सोने के प्रदर्शन को देखें तो एक दिलचस्प तस्वीर सामने आती है. इतिहास बताता है कि सोने ने लंबी अवधि में निवेशकों को फायदा दिया है, लेकिन इस सफर में कई बार बड़ी गिरावट और लंबे इंतजार के दौर भी आए हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि मौजूदा गिरावट सोने में निवेश का मौका है या फिर अभी और कमजोरी बाकी है.
रिकॉर्ड हाई के बाद दबाव में सोना
हाल के कारोबारी हफ्ते में सोने की कीमतों में करीब 1 फीसदी की तेजी देखने को मिली. घरेलू बाजार में सोना करीब 1 लाख 43 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास कारोबार कर रहा है. लेकिन अगर कुछ महीनों के प्रदर्शन पर नजर डालें तो तस्वीर काफी बदल चुकी है. साल 2020 के बाद सोने में जबरदस्त तेजी देखने को मिली थी. महंगाई का डर, वैश्विक तनाव, युद्ध जैसी परिस्थितियां और दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों की सोने की खरीदारी ने इसकी कीमतों को मजबूती दी.
साल 2026 की शुरुआत में सोना अपने रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था. जनवरी 2026 में गोल्ड करीब 5,602 डॉलर प्रति औंस के हाई पर पहुंचा. लेकिन इसके बाद बाजार में दबाव बढ़ा और सोने की कीमतें गिरकर 4,000 डॉलर प्रति औंस के नीचे तक चली गईं. यानी कुछ ही महीनों में रिकॉर्ड ऊंचाई से बड़ी गिरावट देखने को मिली.
आखिर क्यों कमजोर हुआ सोना?
सोने की कीमतों पर दुनिया के हालात और अमेरिकी ब्याज दरों का बड़ा असर पड़ता है. वैश्विक तनाव के दौरान निवेशक अक्सर सोने को सुरक्षित निवेश विकल्प मानते हैं. लेकिन जैसे ही अनिश्चितता कम होती है और दूसरे निवेश विकल्प आकर्षक दिखने लगते हैं, सोने की मांग पर असर पड़ सकता है.
इसके अलावा अमेरिका की ब्याज दरें भी सोने के लिए बेहद अहम होती हैं. जब ब्याज दरें ऊंची रहती हैं तो निवेशकों को बॉन्ड जैसे विकल्पों में बेहतर रिटर्न मिलने लगता है. ऐसे माहौल में सोना थोड़ा कमजोर पड़ सकता है क्योंकि सोना खुद कोई ब्याज या नियमित आय नहीं देता. यही वजह है कि अमेरिका की मौद्रिक नीति और ब्याज दरों का रुख सोने की अगली चाल तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है.
30 साल का गोल्ड चार्ट क्या बताता है?
अगर 30 साल पीछे जाकर देखें तो सोने ने लंबी अवधि में शानदार प्रदर्शन किया है. साल 1996 में सोने की कीमत करीब 380 डॉलर प्रति औंस थी. आज यह करीब 4,040 डॉलर प्रति औंस के आसपास है. यानी करीब तीन दशक में सोने ने लगभग 950 फीसदी का रिटर्न दिया है. सालाना औसत रिटर्न की बात करें तो यह करीब 8 फीसदी के आसपास बैठता है. लेकिन इस सफर का सबसे बड़ा सबक यह है कि सोना कभी भी सीधी लाइन में ऊपर नहीं गया. बीच-बीच में बड़ी गिरावट आई, लंबा इंतजार करना पड़ा और कई बार निवेशकों का धैर्य भी परखा गया.
2012 के बाद सोने ने ली थी लंबी सांस
साल 2000 से 2012 के बीच सोने में जोरदार तेजी देखने को मिली. इस दौरान कीमतों में कई गुना बढ़ोतरी हुई और निवेशकों को शानदार रिटर्न मिला. लेकिन 2012 के बाद तस्वीर बदल गई. जो निवेशक 2012 के आसपास ऊंची कीमतों पर सोना खरीदकर बैठे थे, उन्हें अपने निवेश पर रिटर्न देखने के लिए करीब 8 साल तक इंतजार करना पड़ा. इस दौरान सोने की कीमतें लंबे समय तक एक दायरे में रहीं और बड़ी तेजी नहीं दिखा पाईं. यानी इतिहास यही बताता है कि सिर्फ तेजी देखकर सोने में निवेश करना जोखिम भरा हो सकता है.
पिछले 5 साल में सोने ने दिया जबरदस्त रिटर्न
अगर सिर्फ पिछले 5 साल की कहानी देखें तो तस्वीर काफी अलग है. साल 2021 में सोने की कीमत करीब 1,700 डॉलर प्रति औंस के आसपास थी. आज यह 4,000 डॉलर प्रति औंस से ऊपर है. इस हिसाब से पिछले 5 साल में सोने ने करीब 19 फीसदी सालाना की दर से रिटर्न दिया है. यही वजह है कि सोना एक बार फिर निवेशकों की नजर में आया. लेकिन सवाल यह है कि क्या इतनी तेज तेजी के बाद गिरावट आना असामान्य है? इतिहास कहता है कि ऐसा पहले भी हुआ है.
क्या सोना और गिर सकता है?
सोने ने अपने इतिहास में कई बार रिकॉर्ड हाई बनाने के बाद बड़ी गिरावट देखी है. कम से कम तीन मौकों पर सोना अपने ऊंचे स्तर से 40 फीसदी से ज्यादा गिर चुका है. अगर इस बार भी इतिहास खुद को दोहराता है तो मौजूदा रिकॉर्ड हाई 5,602 डॉलर प्रति औंस से सोने की कीमत करीब 3,500 डॉलर प्रति औंस तक जा सकती है. हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि सोना निश्चित रूप से इतना नीचे जाएगा. यह सिर्फ पुराने पैटर्न के आधार पर एक संभावित स्थिति है.
सोने के पक्ष में अभी भी मौजूद हैं कई बड़े कारण
जहां एक तरफ ब्याज दरों का दबाव सोने पर बना हुआ है, वहीं दूसरी तरफ कई ऐसे कारण भी हैं जो सोने को सपोर्ट कर सकते हैं. कई निवेशकों का मानना है कि दुनिया धीरे-धीरे डॉलर पर निर्भरता कम करने की कोशिश कर रही है. इसके अलावा केंद्रीय बैंक लगातार सोने की खरीदारी कर रहे हैं. मई में दुनिया के केंद्रीय बैंकों के आधिकारिक सोने के भंडार में 41 टन की बढ़ोतरी हुई. इससे संकेत मिलता है कि लंबी अवधि में केंद्रीय बैंकों का भरोसा अभी भी सोने पर बना हुआ है.
निवेशकों को क्या करना चाहिए? 30 साल के इतिहास से सबसे बड़ी सीख यही मिलती है कि सोने में सही समय पकड़ना बेहद मुश्किल है. इसलिए एक साथ बड़ी रकम लगाने के बजाय धीरे-धीरे निवेश करना बेहतर रणनीति हो सकती है. अगर किसी निवेशक के पोर्टफोलियो में 10 से 15 फीसदी हिस्सा सोने का है तो यह बाजार में अनिश्चितता के समय सुरक्षा देने में मदद कर सकता है. हालांकि सिर्फ पिछली तेजी देखकर निवेश करना भी सही रणनीति नहीं हो सकती.
सोने की अगली कहानी क्या होगी?
आज सोना दबाव में जरूर है, लेकिन 30 साल का इतिहास बताता है कि गिरावट सोने की कहानी का हिस्सा रही है.कभी सोने ने निवेशकों को कई साल इंतजार करवाया, तो कभी कुछ ही सालों में शानदार रिटर्न दिया.इसलिए असली सवाल यह नहीं है कि सोना अगले कुछ दिनों में ऊपर जाएगा या नीचे.बड़ा सवाल यह है कि निवेशक का नजरिया कितना लंबा है और उसका निवेश लक्ष्य क्या है. क्योंकि सोने की असली ताकत हमेशा लंबी अवधि के धैर्य में रही है.
ADVERTISEMENT

