Gold Price Today: दिवाली से पहले सोना खरीदने वालों के लिए अमेरिकी फेडरल रिजर्व का ब्याज दरों को स्थिर रखने का फैसला राहत की उम्मीद जगा रहा है. आने वाले हफ्तों में सोने की कीमतें एक सीमित दायरे में रह सकती हैं. हालांकि, कीमतों में बड़ी तेजी या लगातार गिरावट का रास्ता अमेरिकी ब्याज दरों, डॉलर, बॉन्ड यील्ड और भू-राजनीतिक तनाव से तय होगा. भारत में त्योहारों के कारण सोने की मांग बढ़ रही है, लेकिन इससे कीमतों में तेजी की गारंटी नहीं मिलती.
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त्योहारों का मौसम हो और सोने की कीमतों पर नजर न हो, ऐसा कैसे हो सकता है? दिवाली और शादी-ब्याह के लिए सोना खरीदने की तैयारी कर रहे लोगों के मन में इस समय सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या आने वाले दिनों में गोल्ड सस्ता होगा या फिर कीमतें दोबारा ऊपर चढ़ जाएंगी.
इस बीच अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ने अपनी प्रमुख ब्याज दरों को 3.75% से 4% की रेंज में स्थिर रखा है. बाजार को पहले से इस फैसले की उम्मीद थी. अब निवेशकों की नजर अमेरिका के महंगाई आंकड़ों और फेड की दिसंबर में होने वाली अगली बैठक पर है. इन घटनाओं से तय हो सकता है कि सोने की कीमतों को आगे सहारा मिलेगा या उन पर दबाव बना रहेगा.
सोने की कीमतों को लेकर क्या है अनुमान?
एक्सपर्ट के मुताबिक, फेड के ब्याज दरों को स्थिर रखने से सोने की कीमतों को एक दायरे में टिकने में मदद मिल सकती है. इससे ग्राहकों को खरीदारी के लिए कुछ राहत मिल सकती है. हालांकि, कीमतों का स्थिर होना और उनमें नई तेजी आना दो अलग-अलग बातें हैं.
एक्सपर्ट के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत 4,120 डॉलर प्रति औंस के स्तर से नीचे है, जबकि मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर 10 ग्राम सोने के लिए 1,46,000 रुपये का स्तर अहम माना जा रहा है. अगर घरेलू बाजार में कीमत घटकर 1,40,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के करीब आती है, तो कुछ खरीदार इसे खरीदारी का अवसर मान सकते हैं.
हालांकि, भारतीय ग्राहकों को मिलने वाली राहत सिर्फ अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर निर्भर नहीं करेगी. डॉलर के मुकाबले रुपये की चाल भी अहम होगी. अगर रुपया कमजोर होता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना सस्ता होने के बावजूद भारत में कीमतों में उतनी गिरावट नहीं आ सकती.
दिसंबर में ब्याज दरें बढ़ने की आशंका से दबाव
एक्सपर्ट के मुताबिक, फेड के फैसले से सोने की कीमतों की निकट अवधि की दिशा में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया है, क्योंकि बाजार पहले से ही ब्याज दरों में ठहराव की उम्मीद कर रहा था.
एक्सपर्ट के अनुसार, दिसंबर में ब्याज दरें बढ़ने की संभावना करीब 78% आंकी जा रही थी. यह उम्मीद सोने की कीमतों पर दबाव डाल सकती है. हालांकि, ब्याज दरों को लेकर बाजार की उम्मीदें बदलने पर सोने की दिशा भी बदल सकती है.
इसका कारण समझना जरूरी है. सोना नियमित ब्याज नहीं देता, जबकि अमेरिकी बॉन्ड जैसे निवेश से ब्याज मिल सकता है. जब ब्याज दरें ऊंची रहने की संभावना बढ़ती है, तो निवेशकों के लिए ब्याज देने वाले विकल्प ज्यादा आकर्षक हो सकते हैं. इससे सोने की मांग पर दबाव पड़ सकता है. इसके उलट, अगर दिसंबर में दरें बढ़ने की आशंका कम होती है, तो सोने को सहारा मिल सकता है.
भारत में त्योहारों के कारण बढ़ रही सोने की मांग
वैश्विक बाजार में अनिश्चितता के बावजूद भारत में सोने की खरीदारी में सुधार के संकेत मिल रहे हैं. इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, पिछले पांच दिनों में देशभर में अलग-अलग बाजारों और कारोबारियों के बीच अच्छी खरीदारी देखने को मिली है.
उनके मुताबिक, त्योहारों के दौरान सोने की मांग में सुधार सकारात्मक संकेत है. मांग बढ़ने से घरेलू बाजार में कीमतों को सहारा मिल सकता है. मेटल्स फोकस के आदर्श दिवे ने भी बताया कि खरीदारी बढ़ने के कारण घरेलू बाजार में सोने पर मिलने वाली छूट घटकर करीब 2 डॉलर प्रति औंस रह गई थी. इससे भारतीय बाजार की कीमतें अंतरराष्ट्रीय स्तर के करीब आईं.
हालांकि, त्योहारों की मांग बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि सोने की कीमतें जरूर बढ़ेंगी. अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में गिरावट आती है, तो घरेलू कीमतों पर भी दबाव पड़ सकता है.
मिडिल ईस्ट का तनाव भी तय करेगा सोने की चाल
सोने की कीमतों पर सिर्फ अमेरिकी ब्याज दरों का असर नहीं पड़ता. मिडिल ईस्ट में तनाव और दूसरे भू-राजनीतिक घटनाक्रम भी निवेशकों के फैसलों को प्रभावित करते हैं.
एक्सपर्ट के मुताबिक, निकट अवधि में भू-राजनीतिक अनिश्चितता के कारण कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है. उन्होंने 2027 में कुछ राहत की संभावना भी जताई.
एक्सपर्ट ने ईरान के साथ सीधे बातचीत के प्रस्ताव की खबरों का भी जिक्र किया. अगर बातचीत आगे बढ़ती है, तो तनाव में कुछ समय के लिए कमी आ सकती है. हालांकि, मिडिल ईस्ट की स्थिति दोबारा बिगड़ने की आशंका भी बनी हुई है.
डॉलर और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड क्यों हैं अहम?
एक्सपर्ट के मुताबिक, महंगाई को लेकर फेड का सतर्क रुख और आगे ब्याज दरें बढ़ने की आशंका सोने की कीमतों पर निकट अवधि में दबाव बनाए रख सकती है.
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़ने और डॉलर मजबूत होने पर सोने को रखने की अवसर लागत बढ़ जाती है. आसान भाषा में कहें तो निवेशक सोने में पैसा लगाने के बजाय ब्याज देने वाले विकल्प चुन सकते हैं.
भारतीय खरीदारों के लिए रुपये और डॉलर की विनिमय दर भी बेहद महत्वपूर्ण है. अगर रुपया कमजोर होता है, तो सोने का आयात महंगा हो जाता है. ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत गिरने का पूरा फायदा भारतीय ग्राहकों तक नहीं पहुंचता.
भगत के मुताबिक, निकट अवधि में अमेरिकी महंगाई के आंकड़े, बॉन्ड यील्ड और डॉलर की चाल सोने की कीमतों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे. लंबी अवधि में भू-राजनीतिक अनिश्चितता, केंद्रीय बैंकों की खरीदारी और सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग इसे सहारा दे सकती है.
दिवाली से पहले सोना खरीदें या इंतजार करें?
मौजूदा संकेत बताते हैं कि सोने की कीमतों में निकट अवधि में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है. अगर कीमतें अहम स्तरों तक नीचे आती हैं, तो खरीदारों को कुछ राहत मिल सकती है. लेकिन अभी यह कहना मुश्किल है कि सोना लगातार सस्ता होता रहेगा.
जो लोग दिवाली या शादी के लिए सोना खरीदने की योजना बना रहे हैं, वे एक ही दिन में पूरी खरीदारी करने के बजाय अपनी जरूरत और बजट के हिसाब से अलग-अलग समय पर खरीदारी करने पर विचार कर सकते हैं. इससे किसी एक दिन की तेज गिरावट या उछाल का असर कुछ हद तक कम हो सकता है.
फिलहाल बाजार की नजर दिसंबर में फेड की अगली बैठक पर रहेगी. ब्याज दरों को लेकर संकेत, अमेरिकी महंगाई के आंकड़े, डॉलर, बॉन्ड यील्ड और मिडिल ईस्ट की स्थिति तय करेगी कि सोने की कीमतों को आगे राहत मिलती है या दबाव का सामना करना पड़ता है. इसलिए दिवाली से पहले सस्ता सोना मिलने की उम्मीद तो है, लेकिन इसकी कोई गारंटी नहीं है.
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