सोने को लेकर इस वक्त बाजार में एक दिलचस्प तस्वीर बन रही है। एक तरफ गोल्ड की कीमत पहले ही काफी ऊपर पहुंच चुकी है, दूसरी तरफ दुनिया के बड़े फंड मैनेजरों का एक हिस्सा अब भी मानता है कि सोना अपनी सही कीमत से नीचे है। और ये बात किसी छोटे-मोटे निवेशक ने नहीं कही है। Bank of America यानी BofA के Global Fund Manager Survey में सामने आई है।
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साथ ही, अमेरिकी बाजार में बड़े speculative investors यानी सट्टा लगाने वाले बड़े निवेशक लगातार तीसरे हफ्ते सोने पर अपनी bullish यानी तेजी वाली पोजिशन बढ़ा रहे हैं।
तो सवाल है—क्या सोने में अभी और तेजी बाकी है? क्या Gold 5,000 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकता है? और अगर पहुंच सकता है तो उसके रास्ते में सबसे बड़ा खतरा क्या है? आइए पूरी कहानी आसान भाषा में समझते हैं।
अब पहले समझिए निवेशकों का मूड क्या कह रहा है। पिछले तीन हफ्तों में gold की net long positioning करीब 18 फीसदी बढ़ चुकी है। यानी बड़े speculative investors का भरोसा धीरे-धीरे वापस सोने पर आ रहा है। लेकिन BofA की बात इससे भी ज्यादा दिलचस्प है।
जारी हुआ सर्वे
Bank of America ने अगस्त का Global Fund Manager Survey जारी किया है। इस सर्वे में दुनिया के बड़े फंड मैनेजर्स से पूछा गया कि अलग-अलग assets की valuation उन्हें कैसी लग रही है।
और यहां सोने को लेकर एक बेहद दिलचस्प बात सामने आई। 16 फीसदी fund managers का मानना है कि सोना undervalued यानी अपनी सही कीमत से सस्ता है। जुलाई में ऐसा मानने वाले फंड मैनेजर्स की संख्या सिर्फ 6 फीसदी थी। मतलब एक महीने में ही सोने को undervalued मानने वाले निवेशकों का हिस्सा काफी बढ़ गया।
BofA के मुताबिक, gold फिलहाल मार्च 2023 के बाद सबसे ज्यादा undervalued नजर आ रहा है। अब जरा इस बात को समझिए। जब कोई asset undervalued माना जाता है, तो उसका मतलब ये नहीं होता कि उसकी कीमत तुरंत बढ़ जाएगी। बल्कि इसका मतलब है कि निवेशकों के एक हिस्से को लगता है कि मौजूदा कीमत के मुकाबले उसमें आगे बढ़ने की गुंजाइश मौजूद है।
4,000 और 5,000 डॉलर की कहानी
BofA के मुताबिक, उनकी Commodity Strategy टीम का मॉडल ये संकेत देता है कि मौजूदा investor buying करीब 4,000 डॉलर प्रति औंस के gold price के अनुरूप है। यानी मौजूदा खरीदारी को देखते हुए बाजार में जितनी ताकत दिखाई दे रही है, उसके हिसाब से गोल्ड करीब 4,000 डॉलर के आसपास justify होता है। लेकिन अगर सोने को 5,000 डॉलर प्रति औंस तक जाना है, तो सिर्फ मौजूदा खरीदारी काफी नहीं होगी। इसके लिए निवेशकों की खरीदारी को और तेज होना पड़ेगा।
यानी BofA सीधे ये नहीं कह रहा कि सोना निश्चित तौर पर 5,000 डॉलर जाएगा। बल्कि उसका कहना है कि 5,000 डॉलर के लिए investor demand को और मजबूत होना पड़ेगा। अब यहां एक और बड़ा फैक्टर है—Central Bank Buying। BofA के मुताबिक, केंद्रीय बैंकों की खरीदारी पहले से ही गोल्ड को सपोर्ट कर रही है। जून में central bank gold buying पिछले 12 महीनों के औसत से काफी ऊपर रही। और यही वजह है कि सोने के बाजार में लंबे समय के लिए एक मजबूत support दिखाई देता है।
दुनिया के कई केंद्रीय बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार में diversification के लिए सोने का हिस्सा बढ़ा रहे हैं। ऐसे में अगर central banks की खरीदारी जारी रहती है और इसके साथ private investors भी तेजी से सोना खरीदने लगते हैं, तो गोल्ड के लिए तेजी का माहौल और मजबूत हो सकता है।
कुल मिलाकर एक तरफ speculative investors लगातार तीसरे हफ्ते gold पर bullish bets बढ़ा रहे हैं। Gold की net long position में पिछले तीन हफ्तों में इसमें करीब 18 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। BofA के सर्वे में gold को undervalued मानने वाले fund managers 6 फीसदी से बढ़कर 16 फीसदी हो गए हैं।
Central bank buying मजबूत है। दूसरी तरफ crude oil की बढ़ती कीमतें inflation को ऊपर धकेल सकती हैं और Fed को rates ज्यादा समय तक ऊंचे रखने या बढ़ाने के लिए मजबूर कर सकती हैं।
इसलिए 5,000 डॉलर का रास्ता खुला जरूर है, लेकिन सीधा नहीं है। सोने की अगली बड़ी चाल इस बात पर निर्भर करेगी कि निवेशकों की खरीदारी कितनी तेज होती है, central banks कितना सोना खरीदते हैं और अमेरिकी Federal Reserve महंगाई और ब्याज दरों पर क्या रुख अपनाता है। यानी फिलहाल Gold की कहानी में तेजी के संकेत मजबूत हैं, लेकिन खतरे भी खत्म नहीं हुए हैं। और शायद यही वजह है कि सोने के बाजार में आने वाले कुछ हफ्ते बेहद दिलचस्प रहने वाले हैं।
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