Gold Price: सोने की कीमतों में हाल के दिनों में कमजोरी देखने को मिल रही है. इस गिरावट के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या निवेशकों को अभी सोना खरीद लेना चाहिए या फिर कीमतों में और गिरावट का इंतजार करना बेहतर होगा. खास बात यह है कि बाजार में सोने को लेकर लंबी अवधि का नजरिया अभी भी मजबूत बना हुआ है. Goldman Sachs समेत कई एक्सपर्ट्स ने सोने की कीमतों को लेकर बड़ी तेजी का अनुमान जताया है. कुछ जानकारों का मानना है कि मौजूदा कमजोरी सोने की तेजी के लंबे दौर का अंत नहीं है, बल्कि यह सिर्फ एक अस्थायी ठहराव हो सकता है.
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दिवाली तक 1.62 लाख रुपये तक पहुंच सकता है सोना
सोने की कीमतों को लेकर IndusInd Securities के सीनियर रिसर्च एनालिस्ट Jigar Trivedi का अनुमान काफी अहम है. उनके मुताबिक दिवाली तक सोने की कीमत 1.60 लाख रुपये से 1.62 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच सकती है. यानी अगर यह अनुमान सही साबित होता है, तो मौजूदा स्तरों से सोने में एक बार फिर अच्छी तेजी देखने को मिल सकती है. इसी वजह से निवेशकों की नजर अब त्योहारी सीजन और खासकर दिवाली के आसपास सोने की कीमतों पर बनी हुई है. Trivedi के मुताबिक इंटरनेशनल मार्केट में COMEX Gold भी 4,400 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकता है. ऐसे में घरेलू बाजार में भी सोने की कीमतों को मजबूती मिलने की संभावना बनती है.
Goldman Sachs को क्यों दिख रही है आगे तेजी
Goldman Sachs के ग्लोबल हेड ऑफ मेटल्स ट्रेडिंग Tony Kim के मुताबिक जनवरी में सोने ने बड़ी तेजी दिखाई थी और ऑल टाइम हाई के करीब पहुंचा था. इसके बाद आई कमजोरी को वह सोने की लंबी तेजी के खत्म होने के तौर पर नहीं देखते. उनका मानना है कि Gold के लॉन्ग टर्म फंडामेंटल्स अब भी मजबूत हैं. यानी मौजूदा गिरावट के बावजूद सोने के लिए लंबे समय में सपोर्ट बना हुआ है. सोने के लिए सबसे बड़े सपोर्ट में दुनिया के केंद्रीय बैंकों की खरीदारी को माना जा रहा है. केंद्रीय बैंक लगातार अपने गोल्ड रिजर्व को बढ़ाने की दिशा में काम कर रहे हैं. इससे सोने की मांग को लंबी अवधि में मजबूती मिल रही है.
केंद्रीय बैंक लगातार बढ़ा रहे हैं Gold की खरीदारी
रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद केंद्रीय बैंकों की गोल्ड खरीदारी में बड़ा बदलाव देखने को मिला है. पहले जहां केंद्रीय बैंक सालाना करीब 400 से 500 टन सोना खरीदते थे, वहीं अब यह आंकड़ा करीब 1,000 से 1,100 टन के स्तर तक पहुंच गया है. दिए गए आंकड़ों के मुताबिक 2025 में केंद्रीय बैंकों ने करीब 863 टन सोना खरीदा था. वहीं 2026 की पहली छमाही में केंद्रीय बैंकों की खरीदारी करीब 345 टन रही. केंद्रीय बैंकों की यह खरीदारी Gold के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे बाजार में सोने की लगातार मांग बनी रहती है. इसी वजह से Goldman Sachs समेत कई जानकार मौजूदा गिरावट को लंबे समय की तेजी के रास्ते में एक अस्थायी रुकावट के तौर पर देख रहे हैं.
अभी क्यों गिर रहा है सोना
सोने की कीमतों पर फिलहाल कई फैक्टर्स का दबाव है. सबसे अहम वजह Federal Reserve की आगे की नीति को लेकर बनी अनिश्चितता है. इसके अलावा अमेरिका और ईरान के बीच तनाव तथा अन्य भू-राजनीतिक परिस्थितियां भी Gold की कीमतों को प्रभावित कर रही हैं. अमेरिकी Treasury yields में बढ़ोतरी का असर भी सोने पर पड़ा है. 1 सितंबर को Spot Gold में करीब 2.4 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई थी और कीमत 4,342.20 डॉलर प्रति औंस तक आ गई थी. इसके बाद अमेरिका के रोजगार से जुड़े आंकड़ों ने भी Gold पर दबाव बढ़ाया. यानी मौजूदा गिरावट के पीछे एक नहीं बल्कि कई कारण काम कर रहे हैं. यही वजह है कि शॉर्ट टर्म में सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है.
4,000 डॉलर का स्तर क्यों है अहम
इंटरनेशनल मार्केट में 4,000 डॉलर प्रति औंस का स्तर Gold के लिए एक मजबूत सपोर्ट जोन माना जा रहा है. अगर सोने की कीमत इस स्तर के आसपास पहुंचती है, तो लंबी अवधि के निवेशकों के लिए धीरे-धीरे खरीदारी शुरू करने का मौका बन सकता है. हालांकि, एक साथ पूरी रकम लगाने के बजाय चरणबद्ध तरीके से खरीदारी करना ज्यादा बेहतर रणनीति मानी जा सकती है. इसका फायदा यह होगा कि अगर कीमत में आगे भी थोड़ी गिरावट आती है, तो निवेशक निचले स्तरों पर अपनी खरीदारी बढ़ा सकते हैं.
जरूरत के लिए खरीदना है तो ज्यादा इंतजार जरूरी नहीं
सोने की खरीदारी को लेकर एक्सपर्ट्स का नजरिया इस बात पर भी निर्भर करता है कि खरीदारी किस उद्देश्य से की जा रही है. अगर किसी को शादी या किसी खास जरूरत के लिए सोना खरीदना है, तो सिर्फ कीमत और नीचे आने के इंतजार में बहुत ज्यादा समय निकालना सही नहीं हो सकता. जरूरत की खरीदारी में कीमतों की छोटी अवधि की चाल से ज्यादा जरूरी है कि खरीदारी समय पर पूरी हो. वहीं अगर मकसद निवेश है, तो मौजूदा कमजोरी का इस्तेमाल चरणबद्ध खरीदारी के लिए किया जा सकता है. यानी निवेशक पूरी रकम एक साथ लगाने के बजाय अलग-अलग स्तरों पर Gold खरीद सकते हैं.
Silver को लेकर Goldman Sachs की राय थोड़ी अलग
सोने के मुकाबले Silver को लेकर Tony Kim का नजरिया थोड़ा ज्यादा सतर्क है. इसकी बड़ी वजह Silver का छोटा बाजार और इसकी मांग का बड़ा हिस्सा इंडस्ट्रियल इस्तेमाल से जुड़ा होना है. ऐसे में Silver में कीमतों का उतार-चढ़ाव Gold की तुलना में ज्यादा हो सकता है. Gold को जहां केंद्रीय बैंकों की लगातार खरीदारी से एक मजबूत सपोर्ट मिलता है, वहीं Silver की मांग में इंडस्ट्रियल फैक्टर की बड़ी भूमिका रहती है.
क्या सोने की गिरावट खरीदारी का मौका है
फिलहाल Gold की कीमतों में कमजोरी जरूर है, लेकिन एक्सपर्ट्स की लंबी अवधि की राय पूरी तरह बदलती नजर नहीं आ रही है. एक तरफ Federal Reserve की नीति, Treasury yields और भू-राजनीतिक तनाव जैसे फैक्टर्स सोने पर दबाव डाल रहे हैं. दूसरी तरफ केंद्रीय बैंकों की लगातार खरीदारी और Gold के मजबूत लॉन्ग टर्म फंडामेंटल्स कीमतों को सपोर्ट दे रहे हैं. यही वजह है कि मौजूदा गिरावट को कुछ एक्सपर्ट्स तेजी के अगले दौर से पहले का ठहराव मान रहे हैं.
2026 में Gold पर क्यों बनी हुई है नजर
सोने को लेकर 2026 में कई बड़े अनुमान सामने आ रहे हैं. Robert Kiyosaki ने भी साल के अंत तक Gold और Silver में बड़ी तेजी की भविष्यवाणी की है. वहीं Jigar Trivedi का दिवाली तक 1.60 लाख से 1.62 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम का अनुमान घरेलू निवेशकों के लिए खासा अहम है. हालांकि, सोने की कीमतों में आगे की चाल कई चीजों पर निर्भर करेगी. Federal Reserve की नीतियां, भू-राजनीतिक तनाव, केंद्रीय बैंकों की खरीदारी और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां Gold की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं. फिलहाल सोने में आई गिरावट ने निवेशकों को सोचने पर मजबूर जरूर किया है, लेकिन बाजार के कई बड़े अनुमानों में अभी भी तेजी की उम्मीद बनी हुई है. ऐसे में सवाल सिर्फ यह नहीं है कि Gold अभी कितना सस्ता हुआ है, बल्कि यह भी है कि आने वाले महीनों में इसकी कीमत किस स्तर तक पहुंच सकती है.
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