सोने की कीमतों में इस समय लगातार उतार चढ़ाव बना हुआ है. इस साल जनवरी में रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने के बाद सोना अब नीचे आ चुका है. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आने वाले महीनों में सोने का रुख कैसा रह सकता है. दुनियाभर के केंद्रीय बैंकों पर हुए एक बड़े सर्वे में संकेत मिला है कि अगले 12 महीनों में सोने की कीमत 5,000 डॉलर से 6,000 डॉलर प्रति औंस तक जा सकती है. साथ ही, कई केंद्रीय बैंक रिकॉर्ड भाव के बाद भी सोना खरीदते रहे हैं. इससे यह चर्चा फिर तेज हो गई है कि क्या दुनिया धीरे धीरे बड़े आर्थिक बदलाव की तरफ बढ़ रही है.
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आज सोना और चांदी का भाव
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी एमसीएक्स पर 1 जुलाई को दोपहर करीब डेढ़ बजे 5 अगस्त 2026 डिलीवरी वाला सोना 1,360 रुपये की गिरावट के साथ 1,41,171 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था. वहीं 4 सितंबर 2026 डिलीवरी वाली चांदी 4,494 रुपये टूटकर 2,24,070 रुपये प्रति किलो पर कारोबार कर रही थी.
ओएमएफआईएफ की रिपोर्ट में क्या सामने आया
दुनिया की वित्तीय संस्थाओं पर रिसर्च करने वाली संस्था ओएमएफआईएफ ने अपनी नई रिपोर्ट जारी की है. इस रिपोर्ट के लिए दुनिया के 74 केंद्रीय बैंकों से बातचीत की गई. ये बैंक मिलकर 10 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा की संपत्ति संभालते हैं.
61 प्रतिशत केंद्रीय बैंकों का मानना है कि जून 2027 तक सोने की कीमत 5,000 डॉलर से 6,000 डॉलर प्रति औंस के बीच पहुंच सकती है.पिछले साल सर्वे में शामिल 71 प्रतिशत केंद्रीय बैंकों के पास भौतिक सोना था.इस साल यह आंकड़ा बढ़कर 82 प्रतिशत हो गया.करीब 30 प्रतिशत केंद्रीय बैंक अगले एक से दो साल में और ज्यादा सोना खरीदने की योजना बना रहे हैं.
रिपोर्ट के मुताबिक, यह सिर्फ कीमत का मामला नहीं है. केंद्रीय बैंक सोने को अब भी सुरक्षित संपत्ति मानते हैं. ओएमएफआईएफ की रिसर्च हेड एंड्रिया कोरिया ने कहा कि सोना दुनिया के केंद्रीय बैंकों के लिए आज भी सबसे सुरक्षित संपत्तियों में बना हुआ है. यही वजह है कि ऊंचे भाव के बाद भी उनकी खरीदारी रुकी नहीं है.
केंद्रीय बैंक सोना क्यों खरीद रहे हैं
रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया में बढ़ती अनिश्चितता इसकी बड़ी वजह है. मध्य पूर्व में तनाव, अमेरिका की बदलती विदेश नीति, ऊर्जा सुरक्षा की चिंता और वैश्विक राजनीति में बढ़ते टकराव के बीच केंद्रीय बैंक ऐसी संपत्ति चाहते हैं जो किसी एक देश पर निर्भर न हो. इस माहौल में सोना फिर से भरोसेमंद विकल्प बनकर उभरा है.
51 प्रतिशत केंद्रीय बैंकों ने कहा कि वे दुनियाभर के तनाव से जुड़े जोखिम से बचने के लिए सोना खरीद रहे हैं.करीब 80 प्रतिशत केंद्रीय बैंकों का मानना है कि दुनिया धीरे धीरे नई आर्थिक व्यवस्था की तरफ बढ़ रही है.कई केंद्रीय बैंक आने वाले वर्षों में डॉलर पर निर्भरता कम करना चाहते हैं.उनकी कोशिश सोना और दूसरी संपत्तियों में हिस्सेदारी बढ़ाने की है.
क्या दुनिया का वित्तीय ढांचा बदल रहा है?
रिपोर्ट के मुताबिक, यह रुझान अब सिर्फ कुछ देशों तक सीमित नहीं है. पहले माना जाता था कि सोना खरीदने में ज्यादा दिलचस्पी सिर्फ विकासशील देशों की है, लेकिन अब तस्वीर ज्यादा व्यापक दिख रही है. यूरोप के कई देशों के पास पहले से काफी सोना है, इसलिए वहां खरीद की गुंजाइश कम है. दूसरी तरफ अफ्रीका और कुछ अन्य क्षेत्र अपने सोने के भंडार बढ़ा रहे हैं.
इन संकेतों से यह बात सामने आती है कि दुनिया के बड़े केंद्रीय बैंक सोने से दूरी नहीं बना रहे हैं. उलटा, वे उस पर पहले से ज्यादा भरोसा दिखा रहे हैं. हालांकि हाल के दिनों में सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट आई है, लेकिन सर्वे बताता है कि लंबी अवधि में कई केंद्रीय बैंक अब भी सोने को मजबूत सुरक्षा कवच मान रहे हैं.
कुल मिलाकर, बाजार में अभी उतार चढ़ाव है, लेकिन केंद्रीय बैंकों का रुख सोने के पक्ष में बना हुआ है. अब नजर इस बात पर रहेगी कि क्या उनका यह भरोसा सही साबित होता है और क्या अगले एक साल में सोना सचमुच 5,000 डॉलर से 6,000 डॉलर प्रति औंस के दायरे तक पहुंचता है.
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