Sona Chandi: सोने में बड़ी गिरावट का डर! क्या Gold 50% टूट सकता है? जानिए पूरी कहानी

चिराग ठाकुर

• 04:15 PM • 21 Jul 2026

सोने में 50 प्रतिशत तक गिरावट के दावों ने बाजार का ध्यान खींचा है. जानिए बड़े बैंकों की राय, पुराने रुझान और भारत में भाव पर रुपये व कर का असर.

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न्यूज़ हाइलाइट्स

मंगलवार को सोना करीब 1 लाख 42 हजार 700 रुपये पर रहा

चांदी में 5 हजार रुपये से ज्यादा तेजी आई और भाव चढ़े

तनाव बढ़ने पर निवेशक अक्सर सुरक्षित ठिकाने के तौर पर सोना चुनते

सोने की कीमतों को लेकर इन दिनों निवेशकों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या Gold में एक और बड़ी गिरावट आने वाली है? क्या जिस सोने की कीमत भारत में 1.40 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के ऊपर पहुंच चुकी है, उसमें आगे भारी गिरावट देखने को मिल सकती है?

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दरअसल, कुछ टेक्निकल इंडिकेटर्स और मार्केट मॉडल्स सोने में बड़ी गिरावट की संभावना जता रहे हैं. वहीं दूसरी तरफ Goldman Sachs और J.P. Morgan जैसे बड़े ग्लोबल इन्वेस्टमेंट बैंक मानते हैं कि सोने में कमजोरी जरूर आ सकती है, लेकिन 50 फीसदी की गिरावट जैसी स्थिति फिलहाल मुश्किल नजर आती है. ऐसे में सवाल है कि आखिर सोने की आगे की दिशा क्या होगी और निवेशकों को इस समय क्या करना चाहिए.

जनवरी के रिकॉर्ड हाई के बाद सोने में आई बड़ी गिरावट

इस साल की शुरुआत में सोने ने शानदार तेजी दिखाई थी. इंटरनेशनल मार्केट में Gold की कीमत करीब 5,595 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई थी, जो इसका नया रिकॉर्ड हाई था. वहीं भारत में भी 24 कैरेट सोने की कीमत करीब 1.91 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गई थी. लेकिन रिकॉर्ड स्तर छूने के बाद बाजार का रुख बदल गया. फिलहाल इंटरनेशनल मार्केट में सोना अपने हाई से करीब 30 फीसदी नीचे आ चुका है. भारत में भी सोने की कीमतों में दबाव देखने को मिला है. हालांकि घरेलू बाजार में गिरावट का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार के मुकाबले कम देखने को मिला है.

जियोपॉलिटिकल तनाव के बावजूद क्यों दबाव में है Gold?

आमतौर पर जब दुनिया में तनाव बढ़ता है, तो निवेशक सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने की ओर जाते हैं. सोने को Safe Haven Asset माना जाता है. यानी जब शेयर बाजार में अनिश्चितता बढ़ती है या आर्थिक संकट की आशंका होती है, तो लोग अपने पैसे का कुछ हिस्सा सोने में लगाना पसंद करते हैं. इस समय भी अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक बाजारों में चिंता बनी हुई है. लेकिन इस बार स्थिति थोड़ी अलग है. तनाव के बावजूद सोने में लगातार मजबूती नहीं दिख रही है. इसकी वजह अमेरिका की ब्याज दरों को लेकर उम्मीदें, डॉलर की चाल और निवेशकों का बदलता रुख माना जा रहा है.

क्या Gold 50% तक गिर सकता है?

सोने में बड़ी गिरावट की चर्चा तब तेज हुई जब कुछ टेक्निकल मॉडल्स ने इसकी संभावना जताई. CoinCodex जैसे फाइनेंशियल मार्केट डेटा प्लेटफॉर्म के मुताबिक, कुछ टेक्निकल इंडिकेटर्स संकेत दे रहे हैं कि अगर मौजूदा ट्रेंड जारी रहता है तो साल के अंत तक Gold करीब 2,780 डॉलर प्रति औंस तक गिर सकता है. अगर ऐसा होता है तो जनवरी के रिकॉर्ड हाई के मुकाबले सोने में करीब 50 फीसदी तक की गिरावट देखने को मिल सकती है. हालांकि, यह सिर्फ एक तकनीकी अनुमान है. बाजार में किसी भी एसेट की कीमत कई फैक्टर्स पर निर्भर करती है और सिर्फ एक मॉडल के आधार पर भविष्य की दिशा तय नहीं की जा सकती.

Goldman Sachs और J.P. Morgan की क्या राय है?

दूसरी तरफ दुनिया के बड़े निवेश बैंक सोने में इतनी बड़ी गिरावट की संभावना से सहमत नहीं दिखते. Goldman Sachs और J.P. Morgan का मानना है कि सोने में उतार-चढ़ाव जरूर जारी रह सकता है, लेकिन 3,800 से 4,000 डॉलर प्रति औंस का स्तर एक मजबूत सपोर्ट जोन बन सकता है. यानी इन बैंकों के मुताबिक सोने में गिरावट आ सकती है, लेकिन कीमतों का आधा हो जाना फिलहाल एक बेहद नकारात्मक स्थिति होगी.

इतिहास में कब-कब टूटा है सोना?

अगर इतिहास देखें तो सोने में बड़ी गिरावट पहले भी देखने को मिली है, लेकिन ऐसे मौके बहुत कम आए हैं.

1980 में आई थी सबसे बड़ी गिरावट

1980 में ईरान संकट और सोवियत संघ के अफगानिस्तान हमले के बाद दुनिया में महंगाई और अनिश्चितता काफी बढ़ गई थी. इस दौरान सोना रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया था. लेकिन इसके बाद अमेरिका के फेडरल रिजर्व ने महंगाई को नियंत्रित करने के लिए ब्याज दरों में तेज बढ़ोतरी की. ब्याज दरें करीब 20 फीसदी तक पहुंच गईं. इसका असर सोने पर पड़ा और आने वाले वर्षों में Gold की कीमतों में करीब 60 फीसदी तक की गिरावट आई.

2011 से 2015 के बीच भी आई बड़ी गिरावट

2008 की ग्लोबल आर्थिक मंदी के बाद निवेशकों ने सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने में भारी पैसा लगाया था. सितंबर 2011 में सोना करीब 1,920 डॉलर प्रति औंस के स्तर तक पहुंच गया था. लेकिन जैसे-जैसे वैश्विक अर्थव्यवस्था सुधरी और निवेशकों का भरोसा शेयर बाजार में लौटा, उन्होंने सोने से पैसा निकालना शुरू किया. इसके बाद 2015 तक सोने की कीमतों में करीब 45 फीसदी तक की गिरावट आई. इतिहास बताता है कि Gold में बड़ी गिरावट संभव है, लेकिन यह हर बार होने वाली घटना नहीं है.

भारत में सोने की कीमतों पर कितना असर पड़ेगा?

अब बड़ा सवाल है कि अगर इंटरनेशनल मार्केट में Gold 40 या 50 फीसदी गिरता है, तो क्या भारत में भी कीमतें उतनी ही गिरेंगी? इसका जवाब है जरूरी नहीं. भारत में सोने की कीमत सिर्फ अंतरराष्ट्रीय कीमतों से तय नहीं होती. इसमें डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत, Import Duty, GST और अन्य टैक्स भी शामिल होते हैं. अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना सस्ता होता है लेकिन उसी समय रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर होता है, तो भारत में गिरावट का असर कम हो सकता है. यही वजह है कि कई बार ग्लोबल मार्केट में सोना 30 से 40 फीसदी तक गिरता है, लेकिन भारत में कीमतों में गिरावट इससे काफी कम रहती है.

निवेशकों को अभी क्या करना चाहिए?

सोने में निवेश करने वाले लोगों के लिए सबसे जरूरी बात है कि वे सिर्फ गिरावट या तेजी देखकर फैसला न लें. अगर किसी निवेशक का नजरिया लंबी अवधि का है, तो छोटी अवधि के उतार-चढ़ाव से घबराने की जरूरत नहीं है. वहीं अगर कोई निवेशक शॉर्ट टर्म में खरीदारी करना चाहता है, तो जल्दबाजी से बचना बेहतर हो सकता है. आने वाले समय में सोने की चाल मुख्य रूप से अमेरिका की ब्याज दरों, डॉलर की मजबूती, वैश्विक तनाव और आर्थिक हालात पर निर्भर करेगी. फिलहाल सोने को लेकर बाजार में दो राय हैं. कुछ लोग बड़ी गिरावट की आशंका जता रहे हैं, जबकि बड़े ग्लोबल बैंक मानते हैं कि गिरावट सीमित रह सकती है. ऐसे में निवेशकों के लिए जरूरी है कि वे बिना किसी डर या लालच के अपने निवेश लक्ष्य और जोखिम क्षमता के हिसाब से फैसला