सोने की कीमत को लेकर नई चिंता सामने आई है. बैंक ऑफ अमेरिका की रिपोर्ट में कहा गया है कि सोने के चार्ट पर डेथ क्रॉस का संकेत बना है. बैंक का कहना है कि 1980 और 2011 में भी ऐसे ही संकेत दिखे थे, और उसके बाद सोने में लंबी गिरावट आई थी.
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हालांकि, यह सिर्फ एक तकनीकी आकलन है. इसका मतलब यह नहीं है कि सोना तय तौर पर गिरेगा. बाजार की चाल पर ब्याज दरें, डॉलर, महंगाई, युद्ध, केंद्रीय बैंकों की खरीदारी और दुनिया की आर्थिक हालत का भी असर पड़ता है.
भारत में सोने-चांदी का भाव
17 जुलाई को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी एमसीएक्स पर 5 अगस्त 2026 डिलीवरी वाला सोना 658 रुपये की तेजी के साथ 1,41,006 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ.4 सितंबर 2026 डिलीवरी वाली चांदी हल्की तेजी के साथ 2,16,449 रुपये प्रति किलो पर बंद हुई.
डेथ क्रॉस क्या होता है
जब किसी संपत्ति का 50 दिन का औसत भाव, 200 दिन के औसत भाव से नीचे चला जाता है, तो उसे डेथ क्रॉस कहा जाता है. बाजार को चार्ट के आधार पर देखने वाले निवेशक इसे कमजोरी का संकेत मानते हैं. आसान शब्दों में कहें तो इससे यह डर बढ़ता है कि तेजी थम सकती है और आगे गिरावट का दौर लंबा चल सकता है.
बैंक ऑफ अमेरिका ने क्या कहा
बैंक ऑफ अमेरिका के रणनीतिकारों ने अपनी नई रिपोर्ट में कहा है कि सोने में चल रही गिरावट अभी खत्म नहीं हुई हो सकती. रिपोर्ट के मुताबिक, अभी तक गिरावट को सिर्फ 24 हफ्ते हुए हैं, जबकि इससे पहले सोना लगातार 121 हफ्ते तक चढ़ा था. बैंक का तर्क है कि इतनी लंबी तेजी के बाद कुछ महीनों की कमजोरी को अंतिम मोड़ नहीं माना जा सकता.
रिपोर्ट में किन संकेतों का जिक्र है
सोने के चार्ट पर डेथ क्रॉस का बनना.आरएसआई का 90 तक पहुंचना.बैंक के मुताबिक, आरएसआई का 70 के ऊपर जाना ही आम तौर पर बहुत ज्यादा तेजी का संकेत माना जाता है.रिपोर्ट का कहना है कि 90 जैसा स्तर बहुत कम बार दिखता है.बैंक ने कहा कि ऐसा आखिरी बार 1980 और 2011 में देखा गया था.
बैंक ऑफ अमेरिका का कहना है कि 1980 और 2011 में सोने ने पहले रिकॉर्ड ऊंचाई बनाई थी. इसके बाद कई साल तक गिरावट चली थी. इसी आधार पर बैंक ने कहा है कि इतिहास फिर दोहराया जा सकता है.
सोना कितना गिर सकता है
बैंक ऑफ अमेरिका का अनुमान है कि अगर 2026 में बना ऊंचा स्तर 1980 और 2011 की तरह बड़ा शिखर साबित होता है, तो सोने में पिछले उछाल का करीब 50 प्रतिशत तक सुधार आ सकता है. बैंक के मुताबिक, सोना 3,702 डॉलर, फिर 3,605 डॉलर और उसके बाद 3,315 डॉलर प्रति औंस तक फिसल सकता है.
निवेशकों के लिए क्या मतलब है
रिपोर्ट में 2011 का उदाहरण देते हुए कहा गया है कि उस समय पहले थोड़ी रिकवरी आई थी. इससे कई लोगों को लगा कि गिरावट खत्म हो गई है. लेकिन उसके बाद सोना कई साल तक नीचे जाता रहा. इसी वजह से बैंक ने घबराकर फैसला लेने से बचने की सलाह दी है.
दूसरी तरफ क्या बात ध्यान में रखनी चाहिए.
यह भी उतना ही जरूरी है कि इस रिपोर्ट को अंतिम सच न माना जाए. यह बैंक ऑफ अमेरिका का तकनीकी आकलन है. सोने की कीमत सिर्फ चार्ट से तय नहीं होती. ब्याज दरों में बदलाव, डॉलर की चाल, महंगाई, युद्ध, केंद्रीय बैंकों की खरीदारी और वैश्विक हालात भी दिशा बदल सकते हैं.
फिलहाल, बैंक ऑफ अमेरिका की इस चेतावनी ने सोने के बाजार पर ध्यान बढ़ा दिया है. डेथ क्रॉस, आरएसआई का ऊंचा स्तर और पुराने वर्षों से तुलना जैसे संकेत निवेशकों के लिए अहम हैं. ऐसे में सोने में खरीद या बिक्री का फैसला जल्दबाजी में नहीं, बल्कि पूरी समझ के साथ लेना ज्यादा जरूरी दिख रहा है.
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