Gold-Silver Price New Rates Today: कमोडिटी बाजार में इस समय सोने और चांदी की चाल में एक बहुत ही अनोखा और विपरीत बदलाव देखने को मिल रहा है. जहां एक तरफ सोने की कीमतों में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है, वहीं दूसरी तरफ चांदी की चमक लगातार बढ़ती जा रही है. इस बड़े उलटफेर से बाजार में जबरदस्त हलचल मची हुई है. कई बड़े एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले समय में चांदी में एक बहुत बड़ी तेजी आ सकती है. बाजार के इस बदलाव को 'ग्रेट रोटेशन' का नाम दिया जा रहा है, जिसका सीधा मतलब है कि अब निवेशकों का पैसा टेक शेयरों से निकलकर कीमती धातुओं की तरफ बढ़ सकता है.
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MCX पर आज सोने और चांदी का ताजा भाव
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX पर दोपहर करीब 3 बजे सोने और चांदी की कीमतों में बड़ा अंतर देखा गया. बाजार में 5 जून 2026 की डिलीवरी वाला सोना 300 रुपये की मंदी के साथ 1,57,974 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था. इसके विपरीत, 3 जुलाई 2026 की डिलीवरी वाली चांदी में जबरदस्त उछाल देखा गया और यह 1981 रुपये की भारी तेजी के साथ 2,72,100 रुपये प्रति किलोग्राम पर ट्रेड कर रही थी. सोने और चांदी की इस उल्टी चाल ने कमोडिटी ट्रेडर्स को पूरी तरह हैरान कर दिया है.
अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्यों लगातार टूट रहा है सोना?
वैश्विक स्तर पर देखा जाए तो पिछले महज एक हफ्ते के भीतर अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना लगभग 4 प्रतिशत तक टूट चुका है. यह मार्च के आखिरी हफ्ते के बाद से गोल्ड का सबसे निचला स्तर है. गौरतलब है कि इसी साल 29 जनवरी को सोने ने 5,595 डॉलर का अपना ऑल टाइम हाई रिकॉर्ड बनाया था, लेकिन अब वहां से कीमतें काफी नीचे आ चुकी हैं. सोने में आ रही इस गिरावट की सबसे मुख्य वजह अमेरिका में बढ़ती महंगाई यानी इन्फ्लेशन है. अमेरिका का महंगाई डेटा उम्मीद से ज्यादा खराब आने के कारण बॉन्ड यील्ड्स तेजी से ऊपर चली गईं, जिससे निवेशकों को डर है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व अब जल्द ब्याज दरें कम नहीं करेगा.
जेन बॉडेन की भविष्यवाणी और 'ग्रेट रोटेशन' का असर
सोने और चांदी के इस उतार-चढ़ाव के बीच बॉडेन कैपिटल की संस्थापक और सीईओ जेन बॉडेन की एक बड़ी भविष्यवाणी सामने आई है. जेन बॉडेन के मुताबिक बाजार में अब एक 'ग्रेट रोटेशन' की शुरुआत हो सकती है. इसका मतलब यह है कि बड़े निवेशक अब टेक सेक्टर की कमजोरी और आर्थिक अनिश्चितता से बचने के लिए अपना पैसा टेक शेयरों से निकालकर कीमती धातुओं की तरफ ले जा सकते हैं. उनका कहना है कि सोने में आई यह गिरावट परमानेंट नहीं है. आने वाले समय में चांदी सबसे मजबूत प्रदर्शन कर सकती है क्योंकि चांदी को सेफ हेवन और औद्योगिक मांग दोनों का दोहरा फायदा मिलता है.
मजबूत डॉलर और ऊंची ब्याज दरों ने बढ़ाई सोने की मुश्किल
बाजार के आंकड़ों के अनुसार करीब 97.4 प्रतिशत निवेशक यह मानकर चल रहे हैं कि जून में होने वाली फेड मीटिंग में ब्याज दरें 3.50 प्रतिशत से 3.75 प्रतिशत के बीच ही स्थिर रहेंगी. यहां तक कि साल के अंत तक अमेरिका में ब्याज दरें और बढ़ने की चर्चा भी तेज है. सरल भाषा में समझें तो जब ब्याज दरें ऊंची होती हैं, तो निवेशक सोने जैसे बिना ब्याज वाले एसेट से पैसा निकालकर बॉन्ड जैसे फिक्स्ड इनकम एसेट्स में लगाने लगते हैं. इसके साथ ही अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने से दूसरे देशों के लिए सोना खरीदना महंगा हो गया है, जिसका असर एशिया और यूरोप की मांग पर साफ दिख रहा है.
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की रिपोर्ट और सोने के अगले तकनीकी स्तर
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के अनुसार साल 2026 की पहली तिमाही में वैश्विक स्तर पर सोने की मांग 2 प्रतिशत बढ़कर 1,230.9 टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है, जिसमें गोल्ड बार और कॉइन्स की डिमांड 42 प्रतिशत बढ़ी है. जेपी मॉर्गन का अनुमान है कि केंद्रीय बैंक इस साल 755 टन सोना खरीद सकते हैं और साल के अंत तक सोना फिर से 5,000 डॉलर तथा लंबी अवधि में 6,000 डॉलर तक जा सकता है. हालांकि, फिलहाल तकनीकी संकेत कमजोर हैं क्योंकि सोने ने 4,600 से 4,650 डॉलर का मजबूत सपोर्ट तोड़ दिया है. अब अगला सपोर्ट 4,466 से 4,423 डॉलर है, जिसके टूटने पर कीमतें 4,368 डॉलर तक नीचे गिर सकती हैं.
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