Gold Price Crash : सोने की कीमतों में लगातार गिरावट से निवेशकों की चिंता बढ़ गई है. जनवरी 2026 के आखिर में MCX पर सोने का भाव 10 ग्राम के लिए करीब 1.76 लाख रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था. लेकिन अब इसकी कीमत गिरकर 1.38 लाख रुपये के आसपास आ गई है. यानी सोना अपने ऑल टाइम हाई से करीब 22 फीसदी नीचे कारोबार कर रहा है. ऐसे में निवेशकों के मन में सवाल है कि सोने की कीमतों में गिरावट की वजह क्या है और क्या यह फिर से अपना पुराना रिकॉर्ड तोड़ पाएगा?
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सोने को आमतौर पर मुश्किल समय में निवेश का सुरक्षित विकल्प माना जाता है. यही वजह है कि कीमतों में तेजी के दौरान बड़ी संख्या में निवेशक इसमें पैसा लगाते हैं. हालांकि, पिछले कुछ समय से सोने की कीमतों में आई गिरावट ने निवेशकों को इंतजार करने पर मजबूर कर दिया है.
सोने की कीमतों में गिरावट के बीच एक और बड़ा सवाल है कि निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो में कितना सोना रखना चाहिए. विशेषज्ञों के मुताबिक, मौजूदा बाजार की अनिश्चितता में गोल्ड की हिस्सेदारी को लेकर निवेशकों को अपनी जोखिम लेने की क्षमता और निवेश के लक्ष्यों को ध्यान में रखना चाहिए.
सोने की कीमतों में कितनी आई गिरावट?
इस साल जनवरी के आखिर में MCX पर सोने की कीमत 10 ग्राम के लिए करीब 1,76,000 रुपये तक पहुंच गई थी. यह सोने का अब तक का सबसे ऊंचा स्तर था. हालांकि, इसके बाद कीमतों में गिरावट का सिलसिला शुरू हो गया.
सोमवार को सुबह करीब 10:30 बजे MCX पर सोना मामूली तेजी के साथ 1,38,000 रुपये से थोड़ा ऊपर कारोबार कर रहा था. इस तरह जनवरी के रिकॉर्ड स्तर से सोने की कीमत करीब 22 फीसदी नीचे आ चुकी है.
सोने की कीमतों में गिरावट की 5 बड़ी वजहें
विशेषज्ञों के मुताबिक, सोने की कीमतों में गिरावट के पीछे कई वजहें हैं. इनमें अमेरिका में ब्याज दरों का बढ़ना, सरकारी बॉन्ड पर ज्यादा रिटर्न, केंद्रीय बैंकों की खरीदारी में सुस्ती, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और निवेशकों की मुनाफावसूली प्रमुख हैं.
1. अमेरिका में ब्याज दरों में बढ़ोतरी
सोने की कीमतों पर अमेरिका के केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की नीतियों का असर पड़ता है. जब फेडरल रिजर्व ब्याज दरें बढ़ाता है, तो निवेशकों के लिए दूसरे ब्याज देने वाले विकल्प आकर्षक हो जाते हैं. ऐसे में कुछ निवेशक सोने से पैसा निकालकर उन विकल्पों में निवेश करने लगते हैं. इससे सोने की मांग पर दबाव पड़ सकता है.
2. अमेरिकी सरकारी बॉन्ड पर ज्यादा रिटर्न
अमेरिकी सरकारी बॉन्ड को सुरक्षित निवेश के विकल्पों में गिना जाता है. जब इन बॉन्ड पर मिलने वाला रिटर्न बढ़ता है, तो निवेशकों को वहां से बेहतर कमाई की उम्मीद दिखाई देती है. दूसरी तरफ, सोने से ब्याज या डिविडेंड के रूप में कोई नियमित कमाई नहीं होती. ऐसे में ज्यादा रिटर्न देने वाले बॉन्ड सोने के मुकाबले आकर्षक बन जाते हैं.
3. केंद्रीय बैंकों की सोने की खरीदारी धीमी पड़ना
दुनिया के कई केंद्रीय बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार में सोना रखते हैं. पिछले कुछ समय में केंद्रीय बैंकों की खरीदारी ने सोने की कीमतों को सहारा दिया था. लेकिन अब खरीदारी की रफ्तार धीमी पड़ने से बाजार में मांग प्रभावित हो सकती है. इसका असर सोने की कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है.
4. कच्चे तेल की कीमतों में तेजी
कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से महंगाई का दबाव बढ़ सकता है. महंगाई बढ़ने की आशंका के बीच ब्याज दरों को लेकर बाजार की उम्मीदें बदल जाती हैं. अगर महंगाई के कारण ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो सोने की कीमतों पर दबाव पड़ सकता है.
5. निवेशकों की मुनाफावसूली
सोने की कीमतें जब तेजी से बढ़कर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचती हैं, तो कई निवेशक अपना मुनाफा सुरक्षित करने के लिए सोना बेचने लगते हैं. इसे मुनाफावसूली कहा जाता है. जनवरी में रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने के बाद सोने में हुई बिकवाली भी कीमतों में गिरावट की एक अहम वजह मानी जा रही है.
क्या सोना फिर अपना पुराना रिकॉर्ड तोड़ पाएगा?
विशेषज्ञों का मानना है कि सोने की कीमतों का जल्द ही अपने पुराने रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचना मुश्किल हो सकता है. कीमतों में दोबारा तेजी आने के लिए अमेरिका के फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों में बढ़ोतरी का दौर खत्म होना और मौद्रिक नीतियों का सोने के लिए ज्यादा अनुकूल होना जरूरी होगा.
अंतरराष्ट्रीय बाजार में 3,900 से 4,000 डॉलर प्रति औंस का स्तर फिलहाल अहम माना जा रहा है. जानकारों के मुताबिक, सोने को पुराने रिकॉर्ड स्तर की ओर लौटने में एक साल से ज्यादा समय लग सकता है. इसके लिए 2027-28 तक का इंतजार करना पड़ सकता है.
निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो में कितना सोना रखना चाहिए?
पहले विशेषज्ञ आमतौर पर निवेश पोर्टफोलियो का 5 से 10 फीसदी हिस्सा सोने में रखने की सलाह देते थे. हालांकि, मौजूदा अनिश्चितता को देखते हुए कुछ विशेषज्ञ इसे बढ़ाकर 15 फीसदी तक रखने की बात कह रहे हैं.
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ज्यादा इक्विटी निवेश करने वाले निवेशक: अगर आपके पोर्टफोलियो में शेयर बाजार का हिस्सा ज्यादा है और आप जोखिम लेने की क्षमता रखते हैं, तो 5 से 10 फीसदी हिस्सा सोने में रखने पर विचार कर सकते हैं.
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कम जोखिम लेने वाले निवेशक: जो निवेशक कम जोखिम लेना चाहते हैं, उनके लिए 10 से 15 फीसदी तक हिस्सा सोने में रखने का सुझाव दिया जा रहा है.
हालांकि, यह कोई तय फॉर्मूला नहीं है. हर निवेशक की वित्तीय स्थिति, निवेश का लक्ष्य और जोखिम लेने की क्षमता अलग होती है. इसलिए सोने में निवेश का फैसला इन्हीं बातों को ध्यान में रखकर करना चाहिए.
सोने में निवेश करते समय इन बातों का रखें ध्यान
सोने को सुरक्षित निवेश माना जाता है, लेकिन इसकी कीमतें भी बाजार की परिस्थितियों के हिसाब से घटती-बढ़ती रहती हैं. जनवरी में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बाद आई करीब 22 फीसदी की गिरावट इसका उदाहरण है.
ऐसे में सिर्फ इस उम्मीद में कि सोने की कीमतें फिर बढ़ेंगी, अपना पूरा पैसा गोल्ड में लगाना समझदारी नहीं होगी. निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो में इक्विटी, डेट और गोल्ड के बीच संतुलन बनाए रखना चाहिए. साथ ही निवेश का फैसला करने से पहले अपने वित्तीय लक्ष्य और जोखिम क्षमता का आकलन करना जरूरी है.
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