Gold Outlook: धनतेरस से पहले सोना 30% टूटा, क्या अभी और सस्ता होगा गोल्ड?

चिराग ठाकुर

• 01:26 PM • 01 Nov 2026

धनतेरस से पहले सोना करीब 30 फीसदी गिर चुका है. जानें कीमतों पर दबाव क्यों है, आगे कितनी गिरावट संभव है और खरीदारी पर बाजार के जानकार क्या सलाह दे रहे हैं.

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न्यूज़ हाइलाइट्स

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 3,880 डॉलर प्रति औंस तक फिसला

चांदी छह फीसदी गिरकर 49 डॉलर प्रति औंस के करीब पहुंची

MCX पर चांदी एक दिन में 10,553 रुपये से ज्यादा गिरी

धनतेरस और दिवाली से पहले सोने-चांदी की कीमतों में आई तेज गिरावट ने बाजार का रुख बदल दिया है. जिस सोने की कीमत कुछ महीने पहले रिकॉर्ड ऊंचाई पर थी, वह अब अपने शिखर से करीब 30 फीसदी नीचे आ चुका है. शुक्रवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना करीब 3.5 फीसदी गिरकर 3,880 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया. अक्टूबर 2025 के बाद यह इसका सबसे निचला स्तर है. चांदी भी करीब 6 फीसदी टूटकर 49 डॉलर प्रति औंस के आसपास आ गई.

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घरेलू बाजार में भी गिरावट का असर दिखा. कारोबारी हफ्ते के आखिरी दिन मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX पर सोने की कीमत 4,000 रुपये से ज्यादा फिसल गई, जबकि चांदी में 10,553 रुपये से अधिक की गिरावट दर्ज की गई. ऐसे में धनतेरस पर खरीदारी की तैयारी कर रहे लोगों के सामने सवाल है कि क्या यह सोना खरीदने का मौका है या कीमतों में और गिरावट का इंतजार करना चाहिए.

कच्चे तेल की महंगाई ने बढ़ाई सोने की मुश्किल

सोने की कीमतों पर दबाव की एक बड़ी वजह कच्चे तेल का महंगा होना है. ईरान के साथ जारी युद्ध के कारण ऊर्जा आपूर्ति और कीमतों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है. तेल महंगा होने से परिवहन और उत्पादन की लागत बढ़ सकती है. इसका असर महंगाई पर पड़ता है और अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के लिए ब्याज दरों में कटौती करना मुश्किल हो सकता है.

Blue Line Futures के चीफ मार्केट स्ट्रैटेजिस्ट Philip Streible के मुताबिक, अगर अमेरिकी अर्थव्यवस्था मजबूत बनी रहती है, तो फेड के पास ब्याज दरें बढ़ाने की गुंजाइश हो सकती है. ऊंची ब्याज दरों के माहौल में सोने की चमक कम पड़ सकती है, क्योंकि सोना अपने निवेशकों को नियमित ब्याज नहीं देता.

AI शेयरों की बिकवाली का असर सोने पर भी

सोने की गिरावट की दूसरी वजह अमेरिकी टेक कंपनियों के शेयरों में कमजोरी है. निवेशकों के मन में सवाल है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI पर कंपनियां जितना बड़ा निवेश कर रही हैं, क्या उससे भविष्य में उतनी कमाई हो पाएगी. इसी चिंता के चलते टेक शेयरों में बिकवाली बढ़ी है.

Commerzbank के विश्लेषकों के मुताबिक, शेयर बाजार में नुकसान उठाने वाले कुछ निवेशक मार्जिन कॉल पूरी करने या कर्ज चुकाने के लिए सोने जैसे दूसरे निवेश भी बेच सकते हैं. यानी जिस सोने को आमतौर पर सुरक्षित निवेश माना जाता है, वह भी बाजार में नकदी जुटाने के लिए बिकवाली की चपेट में आ सकता है.

क्या सोना 3,800 डॉलर तक फिसल सकता है?

आगे सोने की चाल को लेकर जानकारों की राय अलग-अलग है. GivTrade के टेक्निकल एनालिस्ट Waleed Said के मुताबिक, फिलहाल सोने पर गिरावट का दबाव बना हुआ है और कीमत 3,800 डॉलर प्रति औंस के स्तर को टेस्ट कर सकती है. यह एक अहम तकनीकी स्तर है, हालांकि इसे किसी तय तारीख तक पहुंचने का अनुमान नहीं समझना चाहिए.

दूसरी तरफ, कुछ जानकार इस गिरावट को लंबी अवधि के निवेशकों के लिए अवसर के तौर पर देख रहे हैं. Zaye Capital Markets के CIO Naeem Aslam का मानना है कि सोने में बड़ी गिरावट लंबी अवधि में खरीदारी का मौका बन सकती है. वहीं, Morton Wealth के CEO Jeff Sarti भी मौजूदा स्तरों को संभावित खरीदारी के अवसर के रूप में देखते हैं.

इसका मतलब है कि निकट अवधि में सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव और कमजोरी का जोखिम बना हुआ है, लेकिन लंबी अवधि को लेकर कुछ जानकार अब भी सकारात्मक हैं.

धनतेरस पर सोना खरीदें या अभी इंतजार करें?

भारतीय खरीदारों के लिए सोने की अंतरराष्ट्रीय कीमतों के साथ रुपये और डॉलर की विनिमय दर भी अहम है. इसलिए विदेशी बाजार में आई गिरावट का पूरा फायदा घरेलू खरीदारों को तुरंत या उसी अनुपात में मिले, यह जरूरी नहीं है. भारत में सोने की कीमत पर आयात शुल्क और स्थानीय बाजार की लागत का भी असर पड़ता है.

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अगर धनतेरस पर गहने खरीदने की योजना है, तो सिर्फ इस उम्मीद में खरीदारी टालना कि कीमतें और गिरेंगी, जरूरी नहीं कि सही फैसला हो. वहीं, निवेश के नजरिए से सोना खरीदने वालों के लिए एक साथ पूरी रकम लगाने के बजाय अलग-अलग समय पर खरीदारी करना एक विकल्प हो सकता है.

फिलहाल सोने की अगली दिशा अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों, फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों पर रुख और कच्चे तेल की कीमतों से तय हो सकती है. ऐसे में निवेशकों और खरीदारों को जल्दबाजी के बजाय इन संकेतों पर नजर रखनी चाहिए.