जिस Gold को निवेशक महंगाई, Geopolitical Tension और Economic Uncertainty के बीच सुरक्षित ठिकाना मान रहे थे, वही Gold शुक्रवार को अचानक करीब 2% तक फिसल गया. वजह बनी Federal Reserve Chairman Kevin Warsh की Inflation को लेकर सख्त टिप्पणी. Warsh ने साफ किया कि 2% Inflation Target को हासिल करना Fed की प्राथमिकता है. बाजार ने इसे Higher Interest Rates के संकेत के तौर पर लिया और Gold में बिकवाली बढ़ गई.
ADVERTISEMENT
अब सवाल बड़ा है- क्या Gold की शानदार Rally में सिर्फ एक छोटा Pause आया है या फिर इसकी पूरी कहानी बदलने लगी है?
MCX पर भी Gold-Silver में कमजोरी
अंतरराष्ट्रीय बाजार की कमजोरी का असर भारतीय Bullion Market पर भी दिखाई दिया. शुक्रवार को MCX पर Gold और Silver दोनों दबाव में रहे.
Gold 5 October Futures
- करीब ₹1,56,250 प्रति 10 ग्राम.
- गिरावट करीब ₹2,746 यानी 1.73%.
Silver 4 September Futures
- करीब ₹2,36,700 प्रति किलो.
- गिरावट करीब ₹3,951 यानी 1.64%.
यानी अमेरिकी बाजार से शुरू हुआ दबाव भारत के वायदा बाजार तक भी पहुंच गया.
आखिर Gold क्यों गिरा?
इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ा trigger Kevin Warsh का Jackson Hole भाषण रहा. Warsh ने कहा कि अगर Inflation 2% की तरफ साफ और पर्याप्त तेजी से नहीं बढ़ती, तो Fed को आगे भी कार्रवाई करनी पड़ सकती है. उन्होंने Short-Term Interest Rates को Fed के Dual Mandate का प्रमुख Tool बताया.
इसका सीधा मतलब बाजार ने यह निकाला कि Fed Rates को लंबे समय तक ऊंचा रख सकता है और जरूरत पड़ी तो Rate Hike का विकल्प भी खुला है.
यही Gold के लिए सबसे बड़ी चिंता है.
Gold खुद कोई Interest नहीं देता. ऐसे में जब US Treasury जैसे Interest-bearing Assets पर Return बढ़ता है, तो निवेशकों के लिए Gold की तुलना में ये Assets ज्यादा आकर्षक हो सकते हैं. साथ ही Warsh के बयान के बाद Dollar भी मजबूत हुआ, जिसने Gold पर दोहरा दबाव बनाया.
Higher Rates की उम्मीद + मजबूत Dollar = Gold पर Pressure.
लेकिन क्या Gold की Bull Story खत्म हो गई?
यहीं कहानी का दूसरा पहलू सामने आता है. सिर्फ Fed के सख्त रुख को देखकर यह मान लेना कि Gold की पूरी Rally खत्म हो गई है, शायद जल्दबाजी होगी.
क्योंकि Gold में हाल की तेजी को सिर्फ छोटे निवेशकों का सपोर्ट नहीं मिला है. Gold-backed ETFs में भी मजबूत Buying देखने को मिली है. Bloomberg के मुताबिक पिछले हफ्ते ऐसे ETFs में 28 टन से ज्यादा Gold जुड़ा, जो जनवरी के बाद सबसे बड़ा Weekly Inflow था. इसके बाद इस हफ्ते भी करीब 20 टन की खरीदारी हुई. Central Banks की Gold Buying भी बाजार के लिए एक अहम Support बनी हुई है.
यानी एक तरफ Fed Gold पर दबाव बना रहा है, तो दूसरी तरफ बड़े Investors और Central Banks की Demand अभी भी Bullish Story को Support कर रही है.
अब Gold की अगली चाल किस पर निर्भर करेगी?
Short Term में Gold पर दबाव बना रह सकता है, खासकर अगर Dollar मजबूत रहता है और US Interest Rates को लेकर Fed का रुख सख्त बना रहता है. लेकिन आगे की दिशा सिर्फ Warsh के बयान से तय नहीं होगी.
अब बाजार की नजर रहेगी:
- US Inflation Data पर.
- Dollar Index की चाल पर.
- US Bond Yields पर.
- Fed के अगले Interest Rate संकेतों पर.
- Gold ETFs और Central Banks की Buying पर.
फिलहाल International Market में Gold करीब $4,485 प्रति Ounce के आसपास है. शुक्रवार की गिरावट ने Gold की Rally को जरूर झटका दिया है, लेकिन ETF Buying और Central Bank Demand को देखते हुए इसे Bull Story का अंत कहना अभी जल्दबाजी होगी. असली सवाल अब यही है कि Fed का Rate Pressure ज्यादा ताकतवर साबित होता है या Gold की मजबूत Demand फिर से कीमतों को ऊपर ले जाती है.
ADVERTISEMENT

