सोने की कीमत इस वक्त 4,300 डॉलर प्रति औंस के नीचे आ गई है और यह करीब एक महीने के निचले स्तर पर है. इसी हफ्ते अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों पर बैठक भी होनी है. ऐसे में बाजार की नजर इस बात पर है कि क्या सोने में अभी और गिरावट आ सकती है.
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कनाडा की निवेश प्रबंधन कंपनी स्प्रॉट इंक के प्रेसिडेंट रायन मैकइनटायर का कहना है कि निवेशक अगर सिर्फ फेड के अगले 25 बेसिस पॉइंट पर ध्यान दे रहे हैं, तो वे बड़ी तस्वीर को नजरअंदाज कर रहे हैं. उनके मुताबिक असली मुद्दा दुनिया भर में बढ़ता कर्ज और बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की कमजोर होती सरकारी वित्तीय हालत है. उनका मानना है कि ऐसे माहौल में सोना लंबे समय में ज्यादा अहम हो सकता है.
बढ़ते कर्ज पर क्यों है चिंता
रायन मैकइनटायर के मुताबिक अमेरिका समेत दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं पर कर्ज लगातार बढ़ रहा है. सरकारों को पुराने कर्ज पर ब्याज चुकाने के लिए ज्यादा पैसा खर्च करना पड़ रहा है. उनका कहना है कि अगर अमेरिका में सरकारी कर्ज पर ब्याज का खर्च अर्थव्यवस्था की नाममात्र बढ़त के ऊपर चला गया, तो परेशानी और बढ़ सकती है.
मैकइनटायर के मुताबिक अमेरिका की नाममात्र आर्थिक बढ़त अभी करीब 4 फीसदी के आसपास है और सरकार का सामान्य ब्याज खर्च भी इसी दायरे तक पहुंच रहा है. उनके अनुसार यही वह स्तर है जहां चिंता बढ़ती है. दूसरी तरफ बॉन्ड बाजार भी यह संकेत दे रहा है कि लंबी अवधि की ब्याज दरों पर सरकार और नीति बनाने वालों की पकड़ पहले जैसी मजबूत नहीं रही है.
मैकइनटायर की मुख्य बातें
- सोना 4,300 डॉलर प्रति औंस के नीचे आ चुका है.
- कीमत करीब एक महीने के निचले स्तर पर है.
- फेड की बैठक से पहले बाजार में ब्याज दरों को लेकर सतर्कता है.
- मैकइनटायर का फोकस 25 बेसिस पॉइंट से ज्यादा बढ़ते वैश्विक कर्ज पर है.
ब्याज दर और सोने का रिश्ता
आम तौर पर माना जाता है कि ब्याज दरें बढ़ने पर सोना कम आकर्षक हो जाता है, क्योंकि सोने से ब्याज नहीं मिलता. लेकिन मैकइनटायर का कहना है कि जब निवेशकों की चिंता सरकारों की वित्तीय हालत को लेकर बढ़ेगी, तब यह सवाल पीछे छूट सकता है कि सोना ब्याज देता है या नहीं.
उनके मुताबिक अगर अमेरिका घाटा और कर्ज कम करने के लिए सरकारी खर्च घटाता है, तो वित्तीय हालत कुछ बेहतर हो सकती है, लेकिन आर्थिक बढ़त कमजोर पड़ सकती है. यानी सरकार के सामने दोहरी मुश्किल है. इसी वजह से उनका कहना है कि जैसे जैसे सरकारी जोखिम बढ़ेगा, वैसे वैसे सोने पर ऊंची ब्याज दरों का दबाव कम अहम होता जाएगा.
सोना क्यों दिख रहा है सहारा
मैकइनटायर का कहना है कि अमेरिका जैसे बड़े देश में अगर निवेशक बढ़ते सरकारी जोखिम से बचना चाहेंगे, तो उनके पास विकल्प सीमित होंगे. उनके मुताबिक सोना इस दबाव से निकलने का एक रास्ता बन सकता है. उनका दावा है कि आने वाले समय में गोल्ड ईटीएफ में निवेश रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच सकता है.
जानकारों के अनुसार सोने की एक बड़ी खासियत यह है कि यह किसी एक सरकार की देनदारी नहीं है. इसके उलट डॉलर, बॉन्ड और दूसरी करेंसी आधारित संपत्तियों के पीछे किसी न किसी सरकार या संस्था की देनदारी जुड़ी होती है. बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में सरकारी जोखिम बढ़ने के साथ सोने की यही खासियत और ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकती है.
भारत में सोने का ताजा भाव
भारत में 15 सितंबर को दोपहर करीब 1 बजे मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी एमसीएक्स पर 5 अक्टूबर 2026 डिलीवरी वाला सोना 520 रुपये की गिरावट के साथ 1,50,798 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था.
इस पूरे मामले में नजर सिर्फ अगली फेड बैठक पर नहीं, बल्कि अमेरिका और दुनिया के कर्ज की दिशा पर भी रहेगी. मैकइनटायर के मुताबिक छोटे समय में ब्याज दरें सोने की कीमत को ऊपर नीचे कर सकती हैं, लेकिन अगर सरकारों की वित्तीय हालत लगातार बिगड़ती रही, तो लंबे समय में सोने की कहानी कहीं बड़ी हो सकती है.
कुल मिलाकर रायन मैकइनटायर का संदेश साफ है कि अगली 25 बेसिस पॉइंट की चाल से बड़ी खबर दुनिया का बढ़ता कर्ज है. उनके मुताबिक अगर यह दबाव बना रहता है, तो सोना निवेशकों के लिए भरोसेमंद सहारे के तौर पर और मजबूत हो सकता है.
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