Sona Chandi: अगले 2 साल में सोना बनाएगा नया रिकॉर्ड? बड़े ग्लोबल निवेशकों ने दिए संकेत !

चिराग ठाकुर

• 02:06 PM • 19 Oct 2026

रिकॉर्ड स्तर से गिरा सोना फिर नई ऊंचाई छू सकता है, जानें केंद्रीय बैंकों की खरीद, अमेरिकी कर्ज, ब्याज दरों और डॉलर की चाल से भारतीय निवेशकों पर क्या असर पड़ेगा.

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न्यूज़ हाइलाइट्स

दिसंबर वायदा सोना ₹1,48,280 रुपये रहा

चांदी ₹2,11,700 रुपये प्रति किलो रही

सितंबर में केंद्रीय बैंकों ने करीब 63 टन सोना खरीदा था

जनवरी 2026 के आखिर में सोने की कीमतों ने नया रिकॉर्ड बनाया था. अंतरराष्ट्रीय बाजार में भाव 5,500 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के पार पहुंच गए थे, जबकि भारतीय बाजार में कीमत 1.76 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम से ऊपर निकल गई थी. लेकिन इसके बाद सोने में तेज गिरावट आई और भाव 1.50 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के नीचे आ गए. इतनी बड़ी गिरावट के बावजूद दुनिया के कुछ बड़े निवेशकों को उम्मीद है कि अगले 12 से 24 महीनों में सोना फिर नई ऊंचाई छू सकता है. आखिर इस उम्मीद की वजह क्या है और भारतीय निवेशकों को किन बातों पर नजर रखनी चाहिए?

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अगले 2 साल में रिकॉर्ड बना सकता है सोना

Financial Times की एक रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ बड़े निवेशक सोने की कीमतों में आगे तेजी की संभावना देख रहे हैं.

  • Charlotte Yonge: Troy Asset Management की फंड मैनेजर को उम्मीद है कि अगले 12 से 18 महीनों में सोना नई ऊंचाई पर पहुंच सकता है.

  • Paul Carne: Aon Investments से जुड़े Carne का मानना है कि अगले दो साल में सोना नया रिकॉर्ड बना सकता है.

  • Peter Marrone: Allied Gold के प्रमुख के मुताबिक, कुछ फैमिली ऑफिस सरकारी बॉन्ड से पैसा निकालकर सोने में निवेश बढ़ाने पर विचार कर रहे हैं.

  • Ian Cockerill: Endeavour Mining के CEO ने 4,000 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के आसपास के स्तर को सोने के लिए संभावित निचले स्तर के तौर पर देखा है, हालांकि कीमतों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है.

ये अनुमान सोने में तेजी की संभावना दिखाते हैं, लेकिन इन्हें कीमतें बढ़ने की गारंटी नहीं माना जा सकता.

सोने में तेजी की उम्मीद के पीछे 4 बड़ी वजहें

1. अमेरिका पर बढ़ता कर्ज

अमेरिका पर सरकारी कर्ज का बोझ बढ़ने से उसकी आर्थिक स्थिति और डॉलर की लंबी अवधि की मजबूती को लेकर चिंताएं सामने आती हैं. अगर भविष्य में आर्थिक संकट से निपटने के लिए बड़े राहत उपायों की जरूरत पड़ती है, तो महंगाई और करेंसी की खरीदने की ताकत को लेकर आशंकाएं बढ़ सकती हैं. ऐसी स्थिति में कुछ निवेशक अपनी पूंजी की सुरक्षा के लिए सोने को विकल्प मान सकते हैं.

2. डॉलर पर निर्भरता घटाने की कोशिश

भू-राजनीतिक तनाव और डॉलर के इस्तेमाल से जुड़े प्रतिबंधों की आशंका के बीच कुछ देश अपने विदेशी मुद्रा भंडार में विविधता लाने की कोशिश कर रहे हैं. सोना किसी एक देश की करेंसी नहीं है, इसलिए इसे डॉलर के अलावा रिजर्व में शामिल किए जाने वाले विकल्प के रूप में देखा जाता है. अगर यह रुझान मजबूत होता है, तो सोने की मांग को सहारा मिल सकता है.

3. केंद्रीय बैंकों की खरीदारी

World Gold Council के शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर में केंद्रीय बैंकों ने करीब 63 टन सोना खरीदा. नवंबर 2024 के बाद यह किसी एक महीने में खरीदारी का सबसे ऊंचा स्तर बताया गया है. चीन के केंद्रीय बैंक के पास करीब 2,410 टन सोना है, जो उसके कुल रिजर्व का लगभग 9 फीसदी है. अगर केंद्रीय बैंकों की खरीदारी जारी रहती है, तो यह सोने की कीमतों के लिए सकारात्मक संकेत हो सकता है.

4. आर्थिक और भू-राजनीतिक अनिश्चितता

युद्ध, व्यापारिक तनाव और वित्तीय संकट की आशंका के बीच निवेशक अपने पोर्टफोलियो में सोने जैसे सुरक्षित माने जाने वाले विकल्पों को जगह दे सकते हैं. सरकारी बॉन्ड से सोने की ओर निवेश बढ़ाने पर कुछ बड़े निवेशकों का विचार इसी चिंता को दिखाता है. हालांकि, अनिश्चितता बढ़ने का मतलब यह नहीं कि सोने की कीमतें हर बार ऊपर ही जाएंगी.

फिर सोने की कीमतों में गिरावट क्यों आई?

सोने की तेजी के पक्ष में कई वजहें हैं, लेकिन कुछ कारक इसकी कीमतों पर दबाव भी डाल सकते हैं.

  • ऊंची ब्याज दरें: सोना ब्याज नहीं देता. अगर बॉन्ड जैसे विकल्पों पर बेहतर रिटर्न मिलने की उम्मीद बढ़ती है, तो सोना रखने की अवसर लागत बढ़ जाती है.

  • मजबूत डॉलर: डॉलर मजबूत होने पर दूसरी करेंसी इस्तेमाल करने वाले निवेशकों के लिए सोना महंगा पड़ सकता है, जिससे मांग प्रभावित हो सकती है.

  • ब्याज दरों को लेकर चिंता: अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से दरें बढ़ाने की संभावना के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना एक कारोबारी सत्र में करीब 2 फीसदी गिरकर 4,075 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस तक पहुंच गया था.

इसलिए सोने की अगली चाल समझने के लिए केंद्रीय बैंकों की खरीदारी, अमेरिकी ब्याज दरों और डॉलर की मजबूती पर नजर रखना जरूरी होगा.

भारतीय निवेशकों के लिए क्या है संकेत?

भारत में सोने की कीमत सिर्फ अंतरराष्ट्रीय बाजार के भाव से तय नहीं होती. रुपये और डॉलर की विनिमय दर, आयात लागत और अन्य शुल्क भी घरेलू कीमतों को प्रभावित करते हैं. इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत स्थिर रहने पर भी रुपये में कमजोरी घरेलू भाव को ऊपर रख सकती है.

निवेशकों के लिए तीन संकेत अहम हैं:

  1. केंद्रीय बैंकों की खरीदारी जारी रहती है या नहीं.

  2. अमेरिकी ब्याज दरें और बॉन्ड यील्ड किस दिशा में जाती हैं.

  3. डॉलर के मुकाबले रुपये की चाल कैसी रहती है.

अगर सोने को सहारा देने वाले कारक मजबूत बने रहते हैं और ब्याज दरों का दबाव घटता है, तो नई ऊंचाई की उम्मीद को बल मिल सकता है. लेकिन ब्याज दरें ऊंची रहने और डॉलर मजबूत होने पर सोने की रिकवरी में समय लग सकता है. इसलिए केवल रिकॉर्ड कीमतों के अनुमान के आधार पर निवेश का फैसला लेने के बजाय जोखिम और अपने निवेश की अवधि को ध्यान में रखना जरूरी है.