सोना होगा दोगुने से ज्यादा महंगा? Jefferies के Chris Wood ने दिया Gold पर बड़ा Target!

चिराग ठाकुर

• 11:34 AM • 18 Sep 2026

क्रिस वुड के मुताबिक अमेरिका का कर्ज, ट्रेजरी यील्ड और डॉलर की दिशा आगे सोने की चाल तय कर सकती है. भारत के निवेशकों के लिए यह अहम संकेत है.

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न्यूज़ हाइलाइट्स

अमेरिका के बढ़ते कर्ज से ब्याज बोझ और दबाव बढ़ सकता है

ऊंची ट्रेजरी यील्ड लंबे समय तक रही तो बाजार की चिंता बढ़ेगी

दर बढ़ने के बाद मजबूत डॉलर से सोना और चांदी फिसले

सोने को लेकर एक ऐसा अनुमान सामने आया है, जिसने निवेशकों का ध्यान खींच लिया है. Jefferies के Global Head of Equity Strategy Chris Wood का मानना है कि आने वाले समय में Gold की कीमत $10,000 प्रति ounce तक पहुंच सकती है. मौजूदा स्तर करीब $4,300-4,400 प्रति ounce के आसपास होने पर यह अनुमान मौजूदा कीमत से दोगुने से भी ज्यादा की तेजी की ओर इशारा करता है.

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लेकिन इस अनुमान को सिर्फ Gold की तेजी का सामान्य दावा समझना सही नहीं होगा. Chris Wood की पूरी दलील अमेरिका के बढ़ते कर्ज, Treasury yields, Dollar और Federal Reserve की नीतियों के संभावित असर पर आधारित है.

Gold को लेकर इतना बड़ा अनुमान क्यों?

Wood के मुताबिक Gold के लिए असली ट्रिगर सिर्फ मांग बढ़ना नहीं है. उनकी नजर अमेरिका के बढ़ते debt burden और उसके साथ बढ़ती ब्याज लागत पर है.

अगर अमेरिकी Treasury yields लंबे समय तक ऊंची रहती हैं, तो सरकार के लिए अपने विशाल कर्ज पर ब्याज चुकाना और महंगा हो सकता है. खासकर अगर 10-year Treasury yield 5-6 फीसदी की तरफ जाती है, तो Wood के अनुसार अमेरिकी authorities पर इसे नियंत्रित करने का दबाव बढ़ सकता है.

यहीं से उनकी Gold की पूरी कहानी शुरू होती है.

Wood का संभावित macro equation कुछ इस तरह है:

  • अमेरिकी कर्ज और ब्याज का बोझ बढ़े.
  • Treasury yields बहुत ज्यादा ऊपर जाएं.
  • Authorities long-term yields को नियंत्रित करने की कोशिश करें.
  • Dollar पर दबाव आए.
  • Real yields में कमजोरी आए.
  • निवेशकों का रुझान Gold की तरफ बढ़े.

इसी तरह के बेहद अनुकूल macroeconomic scenario में Gold के $10,000 तक पहुंचने की संभावना Wood देखते हैं.

Fed की Rate Hike के बाद Gold क्यों गिरा?

दिलचस्प बात यह है कि जिस समय $10,000 Gold की चर्चा हो रही है, उसी दौरान Fed की rate hike के बाद Gold और Silver में तेज गिरावट भी देखने को मिली.

16 सितंबर को Federal Reserve ने ब्याज दर में 25 basis points की बढ़ोतरी की और इसे 3.75-4 फीसदी की range में पहुंचा दिया. इसके बाद Dollar मजबूत हुआ और Gold पर दबाव आया.

  • Spot Gold करीब 1 फीसदी से ज्यादा गिरकर लगभग $4,240 तक आया.
  • Silver भी करीब 1.7 फीसदी नीचे गया.
  • अगले दिन Dollar में कमजोरी आने के बाद Gold में करीब 1.2 फीसदी की रिकवरी दिखी और यह लगभग $4,312 के आसपास पहुंच गया.

इससे एक बात साफ होती है. Short term में ऊंची ब्याज दरें और मजबूत Dollar Gold के लिए चुनौती हैं.

लेकिन Chris Wood की नजर इससे कहीं आगे के scenario पर है.

Dollar कमजोर हुआ तो Gold को मिल सकता है बड़ा सहारा

Gold पर ब्याज नहीं मिलता. इसलिए जब Bond yields और real interest rates ऊंचे होते हैं, तो निवेशकों के लिए Gold की तुलना में ब्याज देने वाले assets ज्यादा आकर्षक हो सकते हैं.

लेकिन अगर अमेरिकी debt का दबाव इतना बढ़ता है कि Treasury yields को नीचे रखने के लिए policy intervention की जरूरत पड़े, तो तस्वीर बदल सकती है.

अगर इसके साथ Dollar भी कमजोर होता है, तो Dollar में कीमत तय होने वाले Gold को अतिरिक्त support मिल सकता है.

हालांकि सिर्फ Dollar की कमजोरी से Gold का $10,000 तक पहुंचना तय नहीं है. Central bank buying, geopolitical tensions, global liquidity, investor demand और real interest rates जैसे कई दूसरे factors भी Gold की कीमत को प्रभावित करते हैं.

भारत के लिए क्या मायने रखता है?

इस कहानी का India angle भी काफी अहम है. Gold की कीमत बढ़ने का असर सिर्फ निवेशकों के portfolio तक सीमित नहीं रहता. भारतीय households के पास बड़ी मात्रा में Gold मौजूद है और इसका इस्तेमाल collateral के तौर पर Gold loan लेने में भी किया जाता है.

अगर Gold की market value बढ़ती है, तो परिवारों के पास रखे इस asset की collateral value भी बढ़ सकती है.

लेकिन यहां एक जरूरी अंतर समझना होगा.

Gold महंगा होने का मतलब यह नहीं है कि परिवार की नियमित आय बढ़ गई.

जब तक Gold बेचा नहीं जाता, कीमत में हुई बढ़ोतरी मुख्य रूप से unrealised wealth है. Gold को pledge करके loan लेने पर liquidity जरूर मिल सकती है, लेकिन उसके साथ repayment की जिम्मेदारी भी आती है.

$10,000 का अनुमान कितना सीधा है?

Chris Wood का $10,000 का अनुमान किसी तय तारीख का guaranteed price target नहीं है. यह एक खास macroeconomic scenario पर आधारित संभावना है. आगे अगर Fed inflation को लेकर ज्यादा सख्त रहता है, ब्याज दरें ऊंची बनी रहती हैं और Dollar मजबूत रहता है, तो Gold पर दबाव कायम रह सकता है.

वहीं अगर अमेरिका के बढ़ते debt burden के कारण Treasury yields को नियंत्रित करने की जरूरत पड़ती है और Dollar कमजोर होता है, तो यही परिस्थितियां Wood की Gold thesis को मजबूत कर सकती हैं. इसलिए Gold की अगली बड़ी कहानी सिर्फ Gold की demand में नहीं, बल्कि अमेरिकी debt, Treasury yields और Dollar की दिशा में छिपी हुई है.