सोने की कीमत में पिछले कुछ दिनों में जबरदस्त उतार-चढ़ाव देखने को मिला है. पहले अमेरिकी Federal Reserve के फैसले के बाद Gold करीब 1% फिसला, फिर इसमें तेज Recovery आई और कीमत करीब $4,425 प्रति औंस तक पहुंच गई. हालांकि सोमवार को एक बार फिर US Treasury Yields में तेजी और मजबूत Dollar के बीच Gold दबाव में नजर आया.
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लेकिन इस Short Term उतार-चढ़ाव के बीच Long Term को लेकर एक बड़ा अनुमान सामने आया है. Global Brokerage House JPMorgan का मानना है कि Gold की कीमत आने वाले महीनों में एक और बड़ी छलांग लगा सकती है. Brokerage के मुताबिक 2027 के मध्य तक Gold करीब $5,000 प्रति औंस तक पहुंच सकता है.
पहले समझिए अभी Gold में क्या चल रहा है
16 सितंबर को Fed के Rate Hike के बाद Gold करीब 1% गिरा था. इसके बाद कीमत में Recovery आई और Gold करीब $4,425 तक पहुंच गया. लेकिन सोमवार को ऊंची US Yields और मजबूत Dollar के कारण फिर दबाव देखने को मिला और कीमत करीब $4,386 प्रति औंस पर आ गई.
भारत में भी इसका असर नजर आया और MCX पर Gold करीब ₹900 सस्ता होकर लगभग ₹1,53,450 प्रति 10 ग्राम के आसपास कारोबार करता दिखा.
यानी फिलहाल तस्वीर कुछ ऐसी है.
- Short Term में Gold में Volatility बनी हुई है.
- US Yields और Dollar कीमत पर दबाव डाल रहे हैं.
- Long Term में कई बड़े Brokerage Houses Gold को लेकर सकारात्मक हैं.
JPMorgan का $5,000 वाला अनुमान
JPMorgan का अनुमान है कि Gold 2026 के अंत तक करीब $4,500 प्रति औंस और 2027 के मध्य तक $5,000 प्रति औंस तक पहुंच सकता है.
मौजूदा करीब $4,386 के स्तर से $5,000 तक पहुंचने के लिए Gold को लगभग 14% चढ़ना होगा.
भारत में कहां जाएगा भाव ?
अगर इसी तेजी को भारत के मौजूदा भाव पर एक साधारण गणना के तौर पर लागू करें, तो ₹1,53,450 प्रति 10 ग्राम का भाव करीब ₹1.75 लाख तक पहुंच सकता है. यानी मौजूदा स्तर से लगभग ₹21,500 की बढ़त.
हालांकि यह सिर्फ एक Rough Calculation है. भारत में Gold की वास्तविक कीमत पर Dollar-Rupee Exchange Rate, Import Duty, Local Premium और दूसरे बाजार कारकों का भी असर पड़ता है.
आखिर Gold में तेजी की वजह क्या है?
JPMorgan की उम्मीद के पीछे कई बड़े Factors हैं. इनमें सबसे अहम है Central Bank Buying. दुनिया के कई Central Banks लगातार अपने Gold Reserves बढ़ा रहे हैं. इससे Gold की मांग को लंबी अवधि में सहारा मिल सकता है.
इसके अलावा US Dollar भी Gold की दिशा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. Gold की अंतरराष्ट्रीय कीमत Dollar में तय होती है. ऐसे में Dollar कमजोर होने पर दूसरी Currencies वाले खरीदारों के लिए Gold अपेक्षाकृत सस्ता हो सकता है, जिससे मांग बढ़ने की संभावना रहती है.
Interest Rates और Geopolitical Tensions भी अहम
Gold पर Interest Rates का भी सीधा असर पड़ता है. Gold से नियमित ब्याज आय नहीं मिलती. इसलिए जब US Treasury Yields ऊंची होती हैं, तो निवेशकों के लिए दूसरी ब्याज देने वाली Assets आकर्षक हो सकती हैं और Gold पर दबाव बढ़ सकता है.
इसके उलट अगर आने वाले समय में Interest Rates और Yields में नरमी आती है, तो Gold को सपोर्ट मिल सकता है.
इसके साथ ही Geopolitical Tensions और आर्थिक अनिश्चितता भी Gold की मांग को प्रभावित करती है. युद्ध, Trade Tensions या वैश्विक आर्थिक जोखिम बढ़ने पर निवेशक अक्सर Gold को Safe Haven के तौर पर देखते हैं.
Jefferies का अनुमान तो इससे भी बड़ा है
Gold को लेकर सिर्फ JPMorgan ही बड़ा अनुमान नहीं दे रहा है. Jefferies के Global Investment Strategist Chris Wood ने Long Term में Gold के $10,000 प्रति औंस तक पहुंचने का अनुमान जताया है.
हालांकि ऐसे सभी अनुमान Forecast हैं, कोई गारंटी नहीं. Short Term में ऊंची US Yields, मजबूत Dollar और लंबे समय तक ऊंची Interest Rates Gold के लिए चुनौती बने रह सकते हैं.
इसलिए Gold में आगे की दिशा समझने के लिए सिर्फ कीमत पर नजर रखना काफी नहीं होगा. Central Bank Buying, Dollar, Interest Rates और Geopolitical Tensions जैसे Factors भी उतने ही महत्वपूर्ण रहेंगे. इन्हीं के बीच Gold की अगली बड़ी चाल तय हो सकती है.
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