पिछले २० साल के आंकड़े बताते हैं कि जून आमतौर पर सोने के लिए कमजोर महीना रहा है, जबकि जुलाई और अगस्त में अक्सर तेजी देखने को मिली है. ऐसे में सोने की कीमतों पर नजर रखने वाले निवेशकों के लिए आने वाले दो महीने अहम माने जा रहे हैं. जानकारों का कहना है कि हाल की गिरावट के बाद आगे की चाल पर इतिहास के साथ-साथ बाजार के मौजूदा हालात भी असर डालेंगे. कच्चे तेल के दाम, डॉलर की चाल और दुनिया में बढ़ता तनाव, सोने और चांदी दोनों की कीमतों को प्रभावित कर सकते हैं.
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जून का रिकॉर्ड
२० साल के रिकॉर्ड के मुताबिक जून सोने के लिए सबसे कमजोर महीना रहा है. इस महीने औसतन करीब ०.४ फीसदी गिरावट दर्ज की गई है. पिछले २० साल में सिर्फ ४० फीसदी बार ही जून में सोने ने सकारात्मक रिटर्न दिया है. आसान शब्दों में कहें तो १० में से सिर्फ ४ बार जून सोने के लिए अच्छा रहा है.
इस बार भी जून के दौरान सोने की कीमतों में गिरावट देखने को मिली. हालांकि इसी के बाद अब बाजार की नजर जुलाई और अगस्त पर टिक गई है, क्योंकि इन दोनों महीनों का पुराना रिकॉर्ड अलग तस्वीर दिखाता है.
जुलाई में क्या कहता है इतिहास
आंकड़ों के मुताबिक जुलाई सोने के लिए साल का दूसरा सबसे मजबूत महीना माना जाता है. पिछले २० साल में जुलाई में सोने ने औसतन १.५ फीसदी रिटर्न दिया है. यही नहीं, ६५ फीसदी बार इस महीने निवेशकों को सकारात्मक रिटर्न मिला है.
जुलाई में औसत रिटर्न १.५ फीसदी रहा है.२० साल में ६५ फीसदी बार जुलाई में बढ़त दर्ज हुई है.सबसे मजबूत जुलाई साल २०२० में रही, जब एक ही महीने में सोना करीब १०.७ फीसदी चढ़ा था.
अगस्त सबसे मजबूत महीना
पूरे २० साल के रिकॉर्ड में अगस्त सोने का सबसे मजबूत महीना रहा है. इस महीने औसतन १.६ फीसदी तेजी देखने को मिली है. अगस्त का जीत का अनुपात ५५ फीसदी रहा है, लेकिन औसत रिटर्न के मामले में यह सबसे आगे है.
अगस्त में औसत तेजी १.६ फीसदी रही है.जीत का अनुपात ५५ फीसदी रहा है.साल २०११ में अगस्त का सबसे मजबूत प्रदर्शन दिखा, जब सोना एक महीने में १२.१ फीसदी चढ़ा था.
इन आंकड़ों से यह संकेत मिलता है कि जून की कमजोरी के बाद कई बार जुलाई और अगस्त में सोना संभलता नजर आया है.
कीमतों पर असर डालने वाले कारण
बाजार के जानकारों के मुताबिक अभी सोने और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है. इसकी बड़ी वजहों में कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव, अमेरिकी डॉलर सूचकांक की चाल और दुनिया में जारी तनाव शामिल हैं. अगर किसी बड़े इलाके में युद्ध या तनाव बढ़ता है, या डॉलर में तेज हलचल आती है, तो उसका सीधा असर सोने और चांदी पर पड़ सकता है.
सोने और चांदी के अहम स्तर
विशेषज्ञों के मुताबिक सोने के लिए १ लाख ४३ हजार १०० रुपये से १ लाख ४२ हजार २०० रुपये का दायरा मजबूत सहारा स्तर माना जा रहा है. वहीं १ लाख ४४ हजार ४०० रुपये से १ लाख ४५ हजार १५० रुपये का दायरा ऊपरी रुकावट माना जा रहा है. जानकारों का कहना है कि अगर सोना इस दायरे के ऊपर निकलता है, तो आगे और तेजी देखने को मिल सकती है.
चांदी के लिए २ लाख २० हजार रुपये से २ लाख १६ हजार ६०० रुपये का दायरा सहारा स्तर माना जा रहा है. वहीं २ लाख २६ हजार ६०० रुपये से २ लाख ३० हजार रुपये का दायरा ऊपरी रुकावट के तौर पर देखा जा रहा है.
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