Gold की कीमतों में शुक्रवार को तेज गिरावट देखने को मिली. MCX Gold करीब 1.63% टूटकर ₹1,56,250 प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ. खास बात यह रही कि कारोबार के दौरान सोना ₹1.60 लाख प्रति 10 ग्राम के पार पहुंच गया था, लेकिन ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली बढ़ने के बाद कीमतों में तेज गिरावट आ गई. International market में भी Gold करीब 3.5% फिसलकर $4,512 प्रति औंस तक आ गया. पूरे हफ्ते की बात करें तो सोने की कीमत करीब 2-3% कमजोर हुई है.
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ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल है कि सोमवार को Gold की शुरुआत कैसी होगी और क्या शुक्रवार की गिरावट आगे भी जारी रह सकती है? Commodity Analysts फिलहाल सोने को लेकर सावधानी बरत रहे हैं. लेकिन Long Term में तस्वीर पूरी तरह अलग नजर आती है. Goldman Sachs को उम्मीद है कि Gold 2026 के अंत तक $4,900 प्रति औंस तक पहुंच सकता है.
शुक्रवार को Gold में क्यों आई गिरावट?
Gold की शुक्रवार की गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण अमेरिकी Federal Reserve का सख्त रुख माना जा रहा है. महंगाई को लेकर Fed के संकेतों से बाजार में जल्द और आक्रामक Rate Cut की उम्मीद कमजोर हुई है.
इसका असर Gold पर इसलिए पड़ता है क्योंकि सोना कोई ब्याज नहीं देता. ऐसे में जब Interest Rates और Bond Yields ऊंचे रहने की उम्मीद बढ़ती है, तो निवेशकों के लिए Gold की तुलना में ब्याज देने वाले Assets ज्यादा आकर्षक हो सकते हैं.
यही वजह है कि हाल की तेजी के बाद शुक्रवार को Gold में Profit Booking तेज हो गई.
सोमवार को Gold में Gap-down की आशंका
शुक्रवार की बड़ी गिरावट के बाद Analysts सोमवार की शुरुआत में किसी बड़े Gap-up की उम्मीद नहीं कर रहे हैं. मौजूदा Global Setup को देखते हुए Gold में Flat या Gap-down Opening देखने को मिल सकती है.
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि सोना लगातार गिरता रहेगा. शुक्रवार को International market में पहले ही करीब 3.5% की बड़ी गिरावट आ चुकी है. इसलिए सोमवार को भी इसी तरह की गिरावट दोहराई जाएगी, यह मानना जल्दबाजी होगी.
MCX Gold के लिए फिलहाल कुछ अहम Technical Levels पर नजर रहेगी.
- Support: ₹1,53,500 प्रति 10 ग्राम
- Resistance: ₹1,61,000 प्रति 10 ग्राम
- ₹1,61,000 के नीचे रहने तक Short Term Outlook सावधानी से Bearish बना हुआ है.
सितंबर में US Jobs Data तय करेगा अगली चाल
नए महीने में Gold के लिए सबसे बड़े Triggers में अमेरिकी Labour Market Data शामिल होंगे. खासकर बाजार की नजर इन आंकड़ों पर रहेगी:
- Non-Farm Payrolls
- Unemployment Rate
- ADP Employment Data
अगर अमेरिकी Jobs Market कमजोर पड़ता है, तो Fed पर ब्याज दरों में कटौती का दबाव बढ़ सकता है. इससे Gold को सपोर्ट मिल सकता है. वहीं मजबूत Jobs Data Rate Cut की उम्मीद को कमजोर कर सकता है, जिससे Gold पर दबाव बढ़ने की आशंका रहेगी.
गिरावट के बीच Goldman Sachs का बड़ा Bullish Target
अब आते हैं इस Gold Outlook के सबसे अहम हिस्से पर.
Short Term में Gold पर दबाव दिखाई दे रहा है, लेकिन Goldman Sachs का Long Term अनुमान काफी Bullish है. Goldman Sachs का अनुमान है कि 2026 के अंत तक Gold $4,900 प्रति औंस तक पहुंच सकता है.
यानी मौजूदा स्तरों पर उतार-चढ़ाव के बावजूद Goldman को Gold में आगे भी अच्छी तेजी की संभावना दिखाई दे रही है.
लेकिन इस अनुमान के पीछे सिर्फ Interest Rates की कहानी नहीं है. सबसे बड़ा Factor है Central Banks की बढ़ती Gold Buying.
Central Banks की बढ़ती खरीदारी बना रही है Gold का मजबूत आधार
Goldman Sachs के मुताबिक 2026 में दुनिया के Central Banks औसतन हर महीने करीब 50 टन Gold खरीद सकते हैं. इसकी तुलना में 2022 से पहले Central Banks की औसत खरीद करीब 17 टन प्रति महीना थी.
यानी पिछले कुछ वर्षों में Central Banks के Gold खरीदने के रुझान में बड़ा बदलाव आया है.
कई देश अपने Foreign Exchange Reserves को Diversify करना चाहते हैं. इसके पीछे Geopolitical Tensions और दूसरे देशों के पास रखे विदेशी मुद्रा भंडार पर संभावित प्रतिबंधों को लेकर बढ़ी चिंता भी एक वजह है.
ऐसे में Gold की भूमिका सिर्फ Inflation Hedge या Safe Haven तक सीमित नहीं रह गई है. कई देशों के लिए यह एक Strategic Reserve Asset बनता जा रहा है.
Rate Cut और Geopolitical Risk से भी Gold को फायदा
Gold के लिए आने वाले समय में अमेरिकी Interest Rates भी अहम रहेंगे. अगर US Rates में कटौती होती है, तो Gold की Relative Attractiveness बढ़ सकती है. इसकी वजह यह है कि कम ब्याज दरों के माहौल में बिना Yield वाले Gold को रखने की Opportunity Cost घट जाती है.
इसके अलावा Geopolitical Uncertainty भी Gold की मांग बढ़ा सकती है. युद्ध, Trade Tensions या Global Financial System को लेकर बढ़ती चिंता के बीच निवेशक अक्सर Gold को सुरक्षित Assets में शामिल करते हैं.
यानी Gold के सामने फिलहाल दो अलग-अलग तस्वीरें हैं.
Short Term: Fed का सख्त रुख, Profit Booking और कमजोर Technical Setup दबाव बना रहे हैं.
Long Term: Central Bank Buying, संभावित Rate Cuts और Geopolitical Uncertainty Gold के पक्ष में हैं.
Gold की Rally में Volatility भी रहेगी
हालांकि Goldman Sachs का $4,900 का अनुमान Gold के लिए बड़ी तेजी का संकेत देता है, लेकिन इसका रास्ता आसान नहीं होगा. Gold Options Market में बढ़ती गतिविधि कीमतों में उतार-चढ़ाव को और तेज कर सकती है.
इसलिए आगे Gold में बड़ी तेजी देखने को मिल सकती है, लेकिन बीच-बीच में तेज Correction का जोखिम भी बना रहेगा.
कुल मिलाकर, शुक्रवार की गिरावट ने Gold के Short Term Outlook को कमजोर जरूर किया है, लेकिन Long Term की कहानी अभी भी मजबूत बनी हुई है. अब नजर सितंबर के US Jobs Data और Fed के अगले संकेतों पर होगी. अगर Rate Cut की उम्मीद मजबूत होती है और Central Banks की खरीदारी जारी रहती है, तो Goldman Sachs का $4,900 Target Gold की अगली बड़ी कहानी बन सकता है.
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