सोना... जिसे महंगाई, अनिश्चितता और आर्थिक संकट के समय निवेशकों का सुरक्षित ठिकाना माना जाता है, इस समय खुद दबाव में है. 28 सितंबर को International Gold करीब 4% तक गिरकर $4,111 प्रति ounce के आसपास आ गया था. इस गिरावट के पीछे अमेरिकी Treasury Yields में तेज उछाल और Federal Reserve की तरफ से आगे Rate Hike की बढ़ती उम्मीद को बड़ी वजह माना गया.
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लेकिन Gold की कहानी सिर्फ इतनी नहीं है. क्योंकि जहां Short Term में $4,000 तक गिरने का अनुमान सामने आया है, वहीं इसी के साथ अगले कुछ महीनों में $5,000 तक पहुंचने का Long Term Outlook भी दिया गया है. यानी Gold investors के सामने एक साथ दो बिल्कुल अलग तस्वीरें हैं.
Gold पर अचानक क्यों बढ़ा दबाव?
Gold पर इस समय सबसे बड़ा दबाव अमेरिकी Interest Rates और Bond Yields से आ रहा है. जब US Bonds की Yield बढ़ती है, तो निवेशकों के लिए ब्याज देने वाले विकल्प ज्यादा आकर्षक हो सकते हैं. दूसरी तरफ Gold से नियमित ब्याज या Income नहीं मिलती. ऐसे में Gold को रखने की Opportunity Cost बढ़ जाती है.
इसके साथ Dollar में मजबूती भी International Gold पर दबाव डाल सकती है. हालिया गिरावट के दौरान US 10-year Treasury Yield 2007 के बाद के सबसे ऊंचे स्तरों में पहुंच गई थी, जबकि बाजार में अक्टूबर में Fed की एक और Rate Hike की उम्मीद भी बढ़ी थी.
यही वजह है कि अब Gold के लिए $4,000 का level चर्चा में है.
$4,000 तक गिर सकता है Gold, लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं
State Street Investment Management के Head of Gold Strategy Aakash Doshi के मुताबिक, बढ़ती Rate Expectations और Bond Yields की वजह से Gold Short Term में करीब $4,000 प्रति ounce तक जा सकता है. उनके मुताबिक मौजूदा हालात में High Yields, मजबूत Dollar और ज्यादा सख्त Fed Policy Gold के लिए Tactical Headwinds हैं.
अगर मौजूदा भारतीय भाव के आधार पर एक मोटा-मोटी अनुमान लगाया जाए, तो $4,000 का level करीब ₹1.42–1.43 लाख प्रति 10 ग्राम के आसपास बैठ सकता है. यानी मौजूदा करीब ₹1.48 लाख के स्तर से लगभग ₹5–6 हजार की और गिरावट का संकेत बनता है. हालांकि यह सिर्फ एक अनुमानित भारतीय equivalent है, वास्तविक घरेलू कीमत पर Dollar-Rupee rate, Import Duty, Taxes और स्थानीय Premium का असर पड़ता है.
लेकिन असली दिलचस्पी इसके बाद के Outlook में है.
$4,000 के बाद $5,000 का Target?
Doshi का Long Term नजरिया Short Term दबाव से बिल्कुल अलग है. उनका मानना है कि अगले करीब छह महीनों में Gold $5,000 प्रति ounce तक पहुंच सकता है. यानी एक तरफ $4,000 का संभावित Downside... और दूसरी तरफ $5,000 का Long Term Outlook.
सवाल है कि अगर Interest Rates ऊंची रहती हैं, तो Gold को वापस ऊपर ले जाने वाला factor क्या होगा?
इसके पीछे कुछ बड़े Structural Factors बताए जा रहे हैं:
- अमेरिका और दूसरी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं पर बढ़ता Debt और Fiscal Pressure.
- ऊंची Interest Rates के कारण बढ़ती Debt Servicing Cost.
- Geopolitical Uncertainty और Inflation Risk.
- Central Bank की Gold खरीदारी.
- China और दूसरे Asian markets से Physical तथा Investment Demand.
- Portfolio Diversification की जरूरत.
State Street के मुताबिक, ऊंची Yields Gold के लिए Short Term में मुश्किल पैदा कर सकती हैं, लेकिन Central Bank और Asian Demand जैसे Structural Factors लंबे समय में Gold को support दे सकते हैं.
यानी आसान भाषा में कहें तो Gold के सामने अभी दो ताकतें आमने-सामने हैं. एक तरफ Dollar, Bond Yields और Fed Policy का दबाव है... दूसरी तरफ Debt Concerns, Central Bank Buying और Investment Demand जैसी ताकतें हैं.
अब Silver की बारी
Silver की कहानी Gold से थोड़ी अलग है. Silver Precious Metal होने के साथ-साथ एक महत्वपूर्ण Industrial Metal भी है. इसलिए इसकी कीमत पर Dollar और Interest Rates के अलावा Solar, Electronics, Manufacturing और Global Industrial Demand का भी असर पड़ता है.
30 सितंबर को Silver में हल्की तेजी रही, लेकिन मजबूत Dollar और ऊंची Treasury Yields ने तेजी को सीमित रखा. MCX Silver करीब ₹2.26 लाख प्रति किलो के आसपास कारोबार कर रही थी और ₹2.24 लाख का level एक अहम Support Zone के तौर पर देखा जा रहा था, जबकि ₹2.33 लाख के आसपास Resistance बताया जा रहा था.
इसलिए Silver में Investors को इन factors पर नजर रखनी होगी:
- Industrial Demand
- Solar और Electronics की मांग
- Dollar और Bond Yields
- Global Manufacturing
- ₹2.24 लाख का Support
- ₹2.33 लाख का Resistance
अगर Industrial Demand मजबूत रहती है, तो Silver को एक अतिरिक्त Support मिल सकता है. लेकिन Global Economy में तेज Slowdown आता है, तो Industrial Demand प्रभावित हो सकती है और Silver में Volatility बढ़ सकती है.
Gold Investors के लिए सबसे बड़ा सवाल
अब वापस Gold पर आते हैं. $4,000 और फिर $5,000... ये दोनों numbers विरोधाभासी लग सकते हैं, लेकिन इनके पीछे अलग-अलग Timeframes हैं.
Short Term में Dollar, Bond Yields और Fed Policy Gold पर दबाव डाल सकते हैं. वहीं Long Term में Debt Concerns, Geopolitical Uncertainty, Central Bank Buying और Investment Demand इसकी तस्वीर बदल सकते हैं. इसलिए अगर Gold ₹1.42–1.43 लाख के आसपास आता भी है, तो सवाल सिर्फ ये नहीं होगा कि सोना कितना गिर गया? असली सवाल होगा... क्या इस गिरावट में बड़े Buyers भी पीछे हट रहे हैं, या इसी गिरावट में उनकी खरीदारी बढ़ रही है? क्योंकि यही संकेत देगा कि Gold की मौजूदा गिरावट सिर्फ एक Correction है... या इसके बड़े Trend में वाकई बदलाव शुरू हो रहा है.
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