Gold Price : सोने में आएगी सूनामी, आ गई सबसे बड़ी भविष्यवाणी!

सौरभ दीक्षित

• 07:45 PM • 02 Jul 2026

डब्ल्यूजीसी रिपोर्ट कहती है कि 2026 में सोना 4,100 डॉलर के आसपास रह सकता है, लेकिन डॉलर, ब्याज दरें, भारत की मांग और केंद्रीय बैंक खरीद इसकी अगली चाल तय करेंगे.

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न्यूज़ हाइलाइट्स

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एमसीएक्स पर 2 जुलाई को सोना हल्का गिरा, जबकि चांदी बढ़ी

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रिपोर्ट के मुताबिक महंगाई नरम है, पर दरों पर सतर्कता कायम

सोने की कीमत को लेकर बाजार में फिर से बड़ा सवाल खड़ा है. कुछ महीने पहले सोना 5,500 डॉलर प्रति औंस तक पहुंचा था, लेकिन बाद में यह 4,000 डॉलर प्रति औंस से भी नीचे आ गया. अब वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की नई आधे साल की आउटलुक रिपोर्ट में बताया गया है कि 2026 के बाकी महीनों में सोना किन वजहों से ऊपर जा सकता है और किन कारणों से नीचे आ सकता है. रिपोर्ट का कुल संकेत यह है कि सोने में अभी भी मजबूती बनी हुई है, लेकिन आगे की चाल पूरी तरह दुनिया की अर्थव्यवस्था, ब्याज दरों, डॉलर और बड़े बाजारों की मांग पर निर्भर करेगी. इसी बीच 2 जुलाई को एमसीएक्स पर सोने में हल्की गिरावट और चांदी में हल्की तेजी देखी गई.

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अभी क्या है हाल

• एमसीएक्स पर 5 अगस्त 2026 डिलीवरी वाला सोना दोपहर करीब डेढ़ बजे 155 रुपये गिरकर 1,44,275 रुपये प्रति 10 ग्राम पर था.

• 4 सितंबर 2026 डिलीवरी वाली चांदी 219 रुपये बढ़कर 2,30,603 रुपये प्रति किलो पर थी.

रिपोर्ट क्या कहती है

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के मुताबिक, रिकॉर्ड ऊंचाई से नीचे आने के बाद भी पिछले एक साल में सोना दुनिया की बेहतर प्रदर्शन करने वाली संपत्तियों में शामिल रहा है. रिपोर्ट के अनुसार, मौजूदा वैश्विक माहौल को देखते हुए सोने की कीमत अभी लगभग सही स्तर पर है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया में आर्थिक बढ़त सामान्य है, महंगाई पहले से कम हुई है लेकिन पूरी तरह खत्म नहीं हुई है, और कई केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को लेकर अभी भी सतर्क हैं. ऐसे में अगर हालात बहुत नहीं बदलते, तो इस साल के बाकी महीनों में सोना करीब 4,100 डॉलर प्रति औंस के आसपास, लगभग 5 प्रतिशत ऊपर या नीचे, चल सकता है.

सोना किन वजहों से चढ़ सकता है

रिपोर्ट के मुताबिक, सोने में फिर से तेजी आने के तीन बड़े कारण हो सकते हैं.

• अगर दुनिया की अर्थव्यवस्था कमजोर पड़ती है या देशों के बीच बड़ा तनाव बनता है, तो लोग सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने की तरफ जा सकते हैं.

• अगर बड़े केंद्रीय बैंक, खासकर अमेरिकी फेडरल रिजर्व, ब्याज दरें घटाने की तरफ बढ़ते हैं, तो सोने को सहारा मिल सकता है.

• अगर लंबी अवधि के निवेशक गिरावट में फिर से खरीद शुरू करते हैं, तो कीमतों को मजबूती मिल सकती है.

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल का कहना है कि अगर ऐसे संकेत मजबूत होते हैं, तो सोना फिर से 4,500 डॉलर प्रति औंस तक जा सकता है. हालात और ज्यादा बिगड़ने पर यह 5,000 डॉलर प्रति औंस की तरफ भी बढ़ सकता है.

सोना किन वजहों से टूट सकता है

रिपोर्ट का दूसरा पक्ष यह है कि सोने पर दबाव भी बन सकता है. वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के अनुसार, अगर अमेरिकी डॉलर मजबूत होता है, बॉन्ड यील्ड बढ़ती है और दुनिया की अर्थव्यवस्था उम्मीद से बेहतर रहती है, तो निवेशक शेयर बाजार और दूसरे जोखिम वाले विकल्पों की तरफ लौट सकते हैं. ऐसी स्थिति में सोने की कीमत नीचे आ सकती है.

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पिछले साल की तेज बढ़त के बाद कई निवेशकों ने मुनाफा वसूली की है. इससे भी कीमतों पर दबाव पड़ सकता है. हालांकि काउंसिल का मानना है कि यहां से 10 से 15 प्रतिशत की गिरावट आने पर भी बहुत बड़ी कमजोरी की आशंका कम है, क्योंकि नीचे भाव आते ही खरीद बढ़ने लगती है.

दो बड़े कारक जिन पर नजर है

रिपोर्ट के मुताबिक, सोने की दिशा तय करने में दो पक्ष बहुत अहम हैं, केंद्रीय बैंकों की खरीद और भारत की मांग.

• केंद्रीय बैंक साल 2022 से हर साल औसतन 1,000 टन सोना खरीद रहे हैं.

• इस साल की पहली तिमाही में कुछ केंद्रीय बैंकों ने थोड़ी बिक्री या स्वैप किया, फिर भी कुल मिलाकर वे शुद्ध खरीदार बने हुए हैं.

• रिपोर्ट के अनुसार, अगर औसत से 20 से 30 टन ज्यादा खरीद होती है, तो सोने की कीमत में करीब 1 प्रतिशत की अतिरिक्त बढ़त आ सकती है.

भारत की मांग क्यों अहम है

भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोना बाजार है और यहां हर साल करीब 800 टन मांग रहती है. लेकिन भारत अपनी ज्यादातर जरूरत आयात से पूरी करता है. रिपोर्ट के मुताबिक, सोने का आयात कम करने के लिए सरकार ने आयात शुल्क 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत किया है और लोगों से कम खरीद की अपील भी की है.

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल का अनुमान है कि इन कदमों की वजह से भारत में गहने, सोने की छड़ और सोने के सिक्कों की मांग 50 से 60 टन तक घट सकती है, यानी करीब 10 प्रतिशत कमी. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अगर भारत की अर्थव्यवस्था धीमी पड़ती है, तो मांग पर और असर पड़ सकता है.

एशिया की बढ़ती भूमिका

रिपोर्ट में कहा गया है कि इस साल सोने की सबसे बड़ी तेजी और सबसे बड़ी गिरावट ज्यादातर एशियाई बाजारों और अमेरिकी कारोबार के घंटों में देखी गई. इसका मतलब है कि सोने की कीमत तय करने में एशिया, खासतौर पर भारत और चीन, अब पहले से ज्यादा अहम हो गए हैं.

कुल मिलाकर रिपोर्ट यह कहती है that अगर दुनिया में आर्थिक संकट गहराता है, तनाव बढ़ता है या ब्याज दरों में बदलाव आता है, तो सोना फिर से तेज चाल पकड़ सकता है. दूसरी तरफ अगर अर्थव्यवस्था मजबूत रहती है, डॉलर और बॉन्ड यील्ड बढ़ते हैं, तो सोने में और गिरावट भी दिख सकती है. फिर भी केंद्रीय बैंकों की खरीद, लंबी अवधि के निवेशकों का भरोसा और भारत जैसे बड़े बाजार सोने को सहारा दे सकते हैं.