सोना इस वक्त दबाव में है. ऊंचे स्तरों से Gold में अच्छी-खासी गिरावट आ चुकी है और जिन निवेशकों ने ऊपरी स्तरों पर खरीदारी की थी, उनके सामने अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सोने की तेजी की कहानी खत्म हो गई है? लेकिन इसी गिरावट के बीच ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म Morgan Stanley का नजरिया कुछ अलग है.
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ब्रोकरेज का मानना है कि Gold में अभी लंबी अवधि की कहानी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है. इतना ही नहीं, Morgan Stanley की Amy Gower ने Gold के लिए करीब $4,000 का स्तर एक मजबूत Floor बताया है. हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि Gold इस स्तर के नीचे जा ही नहीं सकता.
$4,180 के Gold से $5,000 तक का अनुमान
सबसे पहले मौजूदा भाव पर नजर डालें. MCX पर Gold October Futures करीब ₹1,47,840 के आसपास ट्रेड कर रहा था. एक दिन में करीब 1.18 फीसदी की तेजी के बावजूद ऊंचे स्तरों से Gold में बड़ी Correction देखने को मिली है. International market में भी Gold करीब $4,180 प्रति ounce के आसपास है.
लेकिन यहीं कहानी दिलचस्प हो जाती है.
Morgan Stanley का अनुमान है कि Gold 2027 की दूसरी छमाही यानी H2 2027 में फिर से $5,000 प्रति ounce के ऊपर जा सकता है. मौजूदा घरेलू कीमतों और विनिमय दर को आधार मानकर मोटे तौर पर देखें तो यह स्तर भारत में करीब ₹1.8 लाख प्रति 10 ग्राम के आसपास बैठ सकता है. हालांकि वास्तविक घरेलू कीमत डॉलर-रुपये की दर, टैक्स और दूसरे स्थानीय कारकों पर निर्भर करेगी.
अब सवाल है कि करीब $4,180 का Gold $5,000 तक पहुंचेगा कैसे?
Morgan Stanley की इस कहानी में तीन बड़े Factors अहम हैं.
1. China और Central Banks की Gold Buying
Gold की कीमत नीचे आई है, लेकिन क्या बड़े खरीदारों की दिलचस्पी भी उसी अनुपात में कम हुई है?
World Gold Council के आंकड़ों के मुताबिक जुलाई में Central Banks ने कुल 23 टन Gold की Net खरीदारी की. इसमें China की खरीद करीब 20 टन रही.
वहीं Morgan Stanley का मानना है कि China की Gold Imports इस साल 2017 के बाद के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच सकती हैं.
यानी कीमत में Correction के बावजूद बड़े खरीदारों की मांग पूरी तरह खत्म नहीं हुई है.
यहां ध्यान देने वाली बातें:
- Central Banks की Gold Buying जारी.
- China की तरफ से मजबूत खरीदारी.
- गिरती कीमतों के बावजूद बड़े खरीदार बाजार में मौजूद.
2. Bond Yields का अगला रुख
दूसरा बड़ा Factor है Bond Yields.
Gold से नियमित ब्याज नहीं मिलता. ऐसे में जब Bond Yields बढ़ती हैं, तो निवेशकों के लिए ब्याज देने वाली संपत्तियां ज्यादा आकर्षक हो सकती हैं और Gold पर दबाव बढ़ सकता है.
लेकिन अगर Long-term Bond Yields आने वाले समय में नीचे आती हैं, तो Gold पर यह दबाव कम हो सकता है.
यानी जो Factor फिलहाल Gold के खिलाफ काम कर रहा है, वही आगे चलकर उसके पक्ष में भी जा सकता है.
3. Crude Oil और Inflation
तीसरा Factor है Crude Oil.
अगर Middle East में तनाव कम होता है और Crude Oil की कीमतों में नरमी आती है, तो Inflationary Pressure भी घट सकता है.
यहां पूरी Chain समझिए:
Crude Oil नीचे → Inflation का दबाव कम → Bond Yields पर राहत → Gold पर Interest Rate का दबाव कम.
यानी Oil की चाल सीधे Gold की कीमत तय नहीं करती, लेकिन Inflation और Bond Yields के जरिए इसका असर Gold पर पड़ सकता है.
Silver की कहानी क्यों अलग है?
अब बात Silver की. Silver को अक्सर Gold का High-Beta Play माना जाता है. यानी Gold में तेजी आने पर Silver में कई बार ज्यादा तेज चाल देखने को मिल सकती है.
लेकिन Silver सिर्फ Precious Metal नहीं है. इसकी Industrial Demand भी काफी अहम है. Electronics, Solar और Data Centers जैसे सेक्टर्स में Silver का इस्तेमाल होता है.
इसलिए Silver के लिए Gold की दिशा के साथ Industrial Demand भी महत्वपूर्ण रहेगी.
Gold की अगली चाल के लिए इन 3 चीजों पर नजर
Morgan Stanley के इस Outlook को एक साथ देखें तो तस्वीर कुछ ऐसी बनती है. China और Central Banks की खरीदारी Gold को Demand का सहारा दे सकती है. Bond Yields में नरमी आती है तो Gold पर Interest Rate का दबाव कम हो सकता है. वहीं Crude Oil में गिरावट Inflation और Yields दोनों के लिए राहत ला सकती है.
इसी broader setup के आधार पर Amy Gower ने Gold के लिए करीब $4,000 को मजबूत Floor बताया है और H2 2027 में $5,000 के ऊपर जाने की संभावना जताई है.
हालांकि $5,000 कोई Guaranteed Target नहीं है. Dollar, Fed Policy, Bond Yields और Geopolitical Tensions में बदलाव Gold की चाल को प्रभावित कर सकते हैं.
इसलिए Gold की अगली चाल समझने के लिए सिर्फ Gold का भाव नहीं, बल्कि China और Central Bank Buying, Bond Yields और Crude Oil पर भी नजर रखना जरूरी होगा.
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