Gold Price Outlook: क्या सोने में अभी और गिरावट आएगी? World Gold Council की रिपोर्ट ने दिए बड़े संकेत, जानिए खरीदारी का सही समय

तनीषा त्यागी

• 05:39 PM • 29 Jul 2026

सोने की कीमतों पर डॉलर, बॉन्ड यील्ड और फेड के संकेत का दबाव है. वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल रिपोर्ट बताती है कि अभी खरीदारी में जल्दबाजी के बजाय नजर रखना बेहतर है.

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न्यूज़ हाइलाइट्स

पिछले तीन महीनों में सोना करीब 7.61 प्रतिशत तक कमजोर हुआ

मजबूत डॉलर से विदेशी खरीदारों के लिए सोना महंगा पड़ रहा है

ऊंची बॉन्ड यील्ड से बड़े निवेशक सोने से पैसा निकाल रहे

सोने की कीमतों में पिछले कुछ दिनों से लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है. कभी कीमतों में तेजी आती है तो अगले ही कारोबारी सत्र में गिरावट दर्ज हो जाती है. ऐसे में निवेशकों के साथ-साथ शादी या बचत के लिए सोना खरीदने की योजना बना रहे लोगों के मन में यह सवाल लगातार बना हुआ है कि क्या अभी खरीदारी करनी चाहिए या कुछ समय इंतजार करना बेहतर रहेगा. इसी बीच World Gold Council की ताजा रिपोर्ट ने गोल्ड मार्केट की दिशा को लेकर कई अहम संकेत दिए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक फिलहाल सोने का बाजार एक ऐसे दौर में है, जहां आने वाले दिनों में अमेरिकी आर्थिक संकेत और फेडरल रिजर्व के फैसले इसकी अगली चाल तय कर सकते हैं.

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भारतीय बाजार में सोने की कीमतों पर बना दबाव

खबर लिखे जाने तक 5 अगस्त 2026 एक्सपायरी वाला 10 ग्राम सोना करीब 1.41 लाख रुपये के आसपास कारोबार कर रहा था. दिनभर के कारोबार में इसमें लगभग 0.07 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई. अगर हालिया प्रदर्शन पर नजर डालें तो पिछले एक सप्ताह में सोना करीब 2.34 प्रतिशत टूटा है. एक महीने में इसमें लगभग 1.82 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई है, जबकि पिछले तीन महीनों में कीमतें करीब 7.61 प्रतिशत तक कमजोर हुई हैं. ये आंकड़े बताते हैं कि फिलहाल सोने की कीमतों पर लगातार दबाव बना हुआ है और बाजार अभी स्थिर स्थिति में नहीं पहुंच पाया है.

मजबूत अमेरिकी डॉलर बना सबसे बड़ी वजह

World Gold Council का मानना है कि सोने पर दबाव की सबसे बड़ी वजह अमेरिकी डॉलर की मजबूती है. जब डॉलर मजबूत होता है, तब अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर में बिकने वाला सोना दूसरे देशों के खरीदारों के लिए महंगा हो जाता है. इसका असर मांग पर पड़ता है और कीमतों में कमजोरी देखने को मिलती है. यही कारण है कि हाल के दिनों में डॉलर इंडेक्स में मजबूती आने के साथ गोल्ड मार्केट में भी दबाव बना हुआ है.

ऊंची बॉन्ड यील्ड भी सोने की चमक कर रही है फीकी

डॉलर के अलावा अमेरिका में लगातार ऊंचे स्तर पर बनी बॉन्ड यील्ड भी सोने की कीमतों पर असर डाल रही है. जब सरकारी बॉन्ड बेहतर रिटर्न देने लगते हैं, तब बड़े निवेशक अपने निवेश का एक हिस्सा सोने से निकालकर बॉन्ड में लगाना शुरू कर देते हैं. इससे गोल्ड की मांग कमजोर होती है और कीमतों में गिरावट का दबाव बढ़ जाता है. रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी 10 वर्षीय रियल यील्ड फिलहाल मजबूत बनी हुई है. अगर इसमें और बढ़ोतरी होती है तो सोने की कीमतों पर अतिरिक्त दबाव देखने को मिल सकता है.

गिरावट के बीच डिप बाइंग ने दी कीमतों को थोड़ी राहत

हालांकि बाजार की तस्वीर पूरी तरह नकारात्मक भी नहीं है. पिछले सप्ताह कीमतों में गिरावट आने के बाद कई निवेशकों ने निचले स्तर पर खरीदारी की. बाजार में इसे डिप बाइंग कहा जाता है. इसी खरीदारी की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना एक बार फिर 4,000 डॉलर प्रति औंस के ऊपर पहुंचने में सफल रहा. London Bullion Market Association के आंकड़ों के मुताबिक पिछले सप्ताह सोने में करीब 1.8 प्रतिशत की रिकवरी दर्ज की गई और कीमत 4,067 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई. हालांकि बाजार विशेषज्ञ इसे फिलहाल नई तेजी की शुरुआत नहीं मान रहे हैं, बल्कि इसे तकनीकी रिकवरी का हिस्सा बता रहे हैं.

फेडरल रिजर्व का फैसला तय करेगा अगली दिशा

इस समय पूरी दुनिया की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक पर टिकी हुई है. बाजार को उम्मीद है कि आने वाले फैसले से ब्याज दरों की दिशा को लेकर महत्वपूर्ण संकेत मिलेंगे. अगर फेड लंबे समय तक ऊंची ब्याज दरें बनाए रखने का संकेत देता है, तो डॉलर और मजबूत हो सकता है. ऐसी स्थिति में सोने की कीमतों पर दबाव बढ़ने की आशंका रहेगी. वहीं अगर फेड भविष्य में ब्याज दरों में नरमी के संकेत देता है, तो गोल्ड में दोबारा तेजी देखने को मिल सकती है. यानी आने वाले कुछ दिन सोने के बाजार के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं.

तकनीकी स्तरों पर क्या कह रहे हैं जानकार

तकनीकी विश्लेषण के मुताबिक अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना दोबारा कमजोर होता है, तो 3,857 डॉलर से 3,887 डॉलर प्रति औंस का दायरा मजबूत सपोर्ट जोन माना जा रहा है. वहीं भारतीय बाजार को लेकर कुछ जानकारों का मानना है कि यदि मौजूदा कमजोरी जारी रहती है, तो सोने की कीमतें करीब 1,18,800 रुपये से 1,19,750 रुपये प्रति 10 ग्राम तक भी फिसल सकती हैं. हालांकि बाजार की अगली चाल पूरी तरह वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम और अमेरिकी नीतिगत फैसलों पर निर्भर करेगी.

क्या अभी सोना खरीदना चाहिए?

अगर आप शादी या अन्य जरूरी जरूरतों के लिए सोना खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो बाजार पर लगातार नजर रखना और चरणबद्ध तरीके से खरीदारी करना बेहतर विकल्प हो सकता है. वहीं निवेश के उद्देश्य से सोना खरीदने वालों के लिए आने वाले कुछ कारोबारी सत्र काफी अहम रहने वाले हैं. अमेरिकी फेडरल रिजर्व का फैसला, महंगाई के आंकड़े और डॉलर की चाल मिलकर सोने की अगली दिशा तय कर सकते हैं.

फिलहाल सतर्क रहने की जरूरत

मौजूदा समय में गोल्ड मार्केट ऐसे दौर में है जहां छोटी-सी वैश्विक खबर भी कीमतों में बड़ा उतार-चढ़ाव ला सकती है. इसलिए जल्दबाजी में फैसला लेने के बजाय बाजार की दिशा, वैश्विक संकेतों और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर रखना अधिक समझदारी होगी. आने वाले दिनों में अमेरिकी नीतिगत फैसले यह तय करेंगे कि सोना फिर से नई तेजी की ओर बढ़ेगा या गिरावट का दौर कुछ और समय तक जारी रहेगा.