सोने की कीमतों में हाल की तेजी के बीच अमेरिका से आया महंगाई का एक अहम आंकड़ा अब बाजार की दिशा पर असर डाल रहा है. अमेरिका का PCE महंगाई (PCE Inflation) अनुमान से थोड़ा ज्यादा रहा. इसके बाद अमेरिकी बॉन्ड पर रिटर्न (Bond Yield) बढ़ा और सोने की कीमतों पर दबाव दिखा.
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अब बाजार की नजर फेडरल रिजर्व की अगली सोच पर है. खास तौर पर शुक्रवार को होने वाले केविन वॉर्श के भाषण पर, क्योंकि इससे ब्याज दरों को लेकर आगे का संकेत मिल सकता है. यही वजह है कि निवेशकों के लिए यह समझना जरूरी है कि महंगाई, बॉन्ड यील्ड और फेड का रुख सोने की चाल को कैसे बदल सकता है.
महंगाई के आंकड़े में क्या आया
अमेरिका में जुलाई का PCE महंगाई (PCE Inflation) डेटा सामने आया. महीने के आधार पर इसमें 0.2 फीसदी बढ़ोतरी दर्ज हुई, जबकि बाजार को 0.1 फीसदी बढ़त की उम्मीद थी. सालाना आधार पर यह दर 3.7 फीसदी रही, जबकि अनुमान करीब 3.6 फीसदी का था. यानी महंगाई बाजार की उम्मीद से थोड़ी ज्यादा निकली.
इसका सोने से क्या संबंध है
आसान भाषा में कहें तो अगर अमेरिका में महंगाई ज्यादा रहती है, तो फेडरल रिजर्व के लिए जल्दी ब्याज दर घटाना मुश्किल हो सकता है. जब यह उम्मीद बनती है कि ब्याज दरें ज्यादा समय तक ऊंची रह सकती हैं, तब अमेरिकी बॉन्ड ज्यादा आकर्षक लगने लगते हैं. ऐसे माहौल में सोने पर दबाव बढ़ता है.
आंकड़ों के बाद बाजार में क्या हुआ
PCE डेटा आने के बाद अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड पर रिटर्न (Bond Yield) में तेजी आई. इसके साथ सोने ने अपनी शुरुआती बढ़त का कुछ हिस्सा गंवा दिया. इससे साफ है कि बाजार ने महंगाई के ज्यादा बने रहने की आशंका को गंभीरता से लिया.
अभी बाजार किन बातों पर नजर रख रहा है
अब फोकस पूरी तरह फेडरल रिजर्व के अगले संकेत पर है. शुक्रवार को होने वाला केविन वॉर्श का भाषण इस लिहाज से अहम माना जा रहा है. बाजार यह समझना चाहता है कि आने वाले महीनों में ब्याज दरों पर केंद्रीय बैंक का रुख नरम होगा या सख्त.
अभी निवेशक किन संकेतों को समझ रहे हैं.
- महीने के आधार पर PCE महंगाई 0.2 फीसदी रही, जबकि उम्मीद 0.1 फीसदी की थी.
- सालाना आधार पर PCE महंगाई 3.7 फीसदी रही, जबकि अनुमान 3.6 फीसदी का था.
- महंगाई उम्मीद से ज्यादा रहने पर ब्याज दरों में जल्दी कटौती की संभावना कमजोर पड़ सकती है.
- ब्याज दरें ऊंची रहने की आशंका से बॉन्ड पर रिटर्न बढ़ता है, जिससे सोने पर दबाव आता है.
सोने के लिए आगे के दो बड़े रास्ते
अगर फेड का रुख नरम रहता है और बाजार को लगता है कि आगे ब्याज दरों में कटौती संभव है, तो सोने की कीमतों को सहारा मिल सकता है. दूसरी तरफ, अगर फेड महंगाई को लेकर ज्यादा चिंता दिखाता है और दरें लंबे समय तक ऊंची रखने का संकेत देता है, तो सोने पर दबाव और बढ़ सकता है.
फिलहाल सोने की अगली बड़ी चाल सिर्फ मांग से तय होती नहीं दिख रही. इस पर महंगाई, अमेरिकी बॉन्ड पर रिटर्न, तेल और फेड की नीति, इन सभी का असर है. अभी बाजार के लिए सबसे अहम बात यही है कि शुक्रवार के संकेत ब्याज दरों को लेकर किस दिशा की तस्वीर दिखाते हैं.
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