सोने की कीमतों में फिर तेजी दिख रही है और बाजार में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या 2026 में आई बड़ी गिरावट अब खत्म हो गई है. अमेरिका के अर्थशास्त्री पीटर शिफ का कहना है कि गोल्ड का गिरावट वाला दौर अब पूरा हो चुका है और आगे कीमत 5,000 डॉलर प्रति औंस के ऊपर जा सकती है.
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हालांकि यह पक्का लक्ष्य नहीं माना जा सकता. फिलहाल 4,500 डॉलर प्रति औंस के आसपास गोल्ड के सामने बड़ी रुकावट दिख रही है. अगर भाव इस स्तर के ऊपर टिकते हैं तो तेजी आगे बढ़ सकती है, लेकिन यहां बिकवाली बढ़ी तो फिर से कमजोरी लौट सकती है.
मुख्य बातें
• पिछले 2 हफ्तों में गोल्ड की कीमत में करीब 8.74% तेजी दर्ज की गई है.
• पीटर शिफ का कहना है कि यह सिर्फ थोड़ी देर की वापसी नहीं, बल्कि बड़े उछाल की शुरुआत हो सकती है.
• 4,500 डॉलर प्रति औंस का स्तर फिलहाल सबसे अहम रुकावट माना जा रहा है.
• खबर लिखे जाने के समय 5 अक्टूबर 2026 एक्सपायरी वाला गोल्ड 0.34% गिरकर ₹1.54 लाख प्रति 10 ग्राम के आसपास कारोबार कर रहा था.
• हालिया अमेरिकी सीपीआई आंकड़ों के बाद गोल्ड करीब 1.5% चढ़ा, जबकि बिटकॉइन करीब 0.4% नीचे रहा.
• गोल्ड और बिटकॉइन के बीच 90 दिन का आपसी रिश्ता फिर बढ़कर 0.7 के करीब पहुंच गया है.
पीटर शिफ को क्यों दिख रही है तेजी.
पीटर शिफ के मुताबिक, सोने में हाल की तेजी सिर्फ एक छोटी वापसी नहीं है. उनका कहना है कि गोल्ड फिर उसी तरह की चाल दिखा रहा है जो पिछली बड़ी गिरावट से पहले दिखी थी.
शिफ ने खास तौर पर एशियाई कारोबार का जिक्र किया है. उनके अनुसार एशियाई बाजारों में गोल्ड की खरीदारी फिर मजबूत होती दिख रही है. अगर यह रुझान जारी रहता है और पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना अपनी खरीद बढ़ाता है, तो कीमतों को और सहारा मिल सकता है.
शिफ का यह भी मानना है कि अगर गोल्ड मजबूत बना रहा, तो न्यूयॉर्क कारोबार में भी तेजी दिख सकती है. इसके बाद 5,000 डॉलर प्रति औंस का स्तर पार करने की संभावना बन सकती है.
4,500 डॉलर का स्तर क्यों अहम है
भारतीय निवेशकों के लिए यह समझना जरूरी है कि 5,000 डॉलर का अनुमान अभी सिर्फ एक आकलन है. मौजूदा समय में 4,500 डॉलर प्रति औंस के आसपास बड़ा दबाव दिख सकता है. अगर गोल्ड इस स्तर के ऊपर मजबूती से टिकता है, तो आगे बढ़त का रास्ता खुल सकता है.
वहीं अगर 4,500 डॉलर के पास बिकवाली का दबाव बढ़ता है और कीमत नीचे फिसलती है, तो बाजार में फिर से गिरावट का दौर लौट सकता है. इसलिए अभी सबसे ज्यादा नजर इसी स्तर पर रहेगी.
दुनिया के बाजार में गोल्ड की तेजी का असर भारत पर भी पड़ रहा है, लेकिन घरेलू कीमत सिर्फ विदेश के भाव से तय नहीं होती. भारत में गोल्ड के दाम पर डॉलर-रुपया दर, आयात लागत, टैक्स, स्थानीय प्रीमियम और बाजार की हालत भी असर डालती है.
इसका मतलब यह है कि अगर दुनिया के बाजार में गोल्ड 5,000 डॉलर तक पहुंचता है, तो भारत में भी कीमतें मौजूदा स्तर से ऊपर जा सकती हैं. लेकिन यहां का भाव सीधे उसी संख्या के आधार पर तय नहीं होगा.
सोने की मौजूदा तेजी में अमेरिकी डॉलर की चाल भी अहम है. आमतौर पर जब डॉलर कमजोर होता है, तो गोल्ड दूसरी मुद्राएं रखने वाले निवेशकों के लिए अपेक्षाकृत सस्ता हो जाता है. इससे मांग को सहारा मिल सकता है.
इसके अलावा जब दुनिया की अर्थव्यवस्था, महंगाई या देशों के बीच तनाव को लेकर अनिश्चितता बढ़ती है, तब निवेशक गोल्ड को सुरक्षित ठिकाने के रूप में देखते हैं. यही वजह है कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव, ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता और दुनिया के आर्थिक जोखिमों के बीच गोल्ड पर नजर बनी हुई है.
गोल्ड और बिटकॉइन की चाल
हालिया अमेरिकी सीपीआई आंकड़ों के बाद गोल्ड करीब 1.5% चढ़ा, जबकि बिटकॉइन करीब 0.4% नीचे रहा. पीटर शिफ लंबे समय से गोल्ड और बिटकॉइन को अलग तरह की संपत्ति मानते रहे हैं. उनका कहना है कि दोनों एक जैसी आर्थिक हालत में हमेशा एक जैसा प्रदर्शन नहीं करते.
हालांकि दूसरी तरफ, गोल्ड और बिटकॉइन के बीच 90 दिन का आपसी रिश्ता फिर बढ़कर 0.7 के करीब पहुंच गया है. इसका मतलब है कि हाल के दौर में दोनों की चाल में फिर मेल बढ़ा है.
गोल्ड के लिए चीन की भूमिका भी बहुत अहम मानी जा रही है. अगर पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना लगातार अपने गोल्ड भंडार बढ़ाता है, तो इससे दुनिया भर की मांग को सहारा मिल सकता है.
इसके साथ एशियाई खरीदारों की वास्तविक खरीदारी भी कीमतों के लिए अहम रहती है. यही वजह है कि पीटर शिफ एशियाई कारोबार में गोल्ड की मजबूती को तेजी का संकेत मान रहे हैं. हालांकि केंद्रीय बैंकों की खरीद हमेशा एक जैसी नहीं रहती. अगर यह खरीद कमजोर पड़ती है, तो गोल्ड की तेजी पर दबाव आ सकता है.
आगे किन बातों पर नजर रहेगी
• अमेरिकी महंगाई के आंकड़े आगे की दिशा तय करने में अहम रहेंगे.
• फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति गोल्ड के लिए बड़ा असर डाल सकती है.
• डॉलर की चाल में कमजोरी या मजबूती से गोल्ड की मांग बदल सकती है.
• देशों के बीच तनाव और दुनिया के आर्थिक जोखिम गोल्ड को सहारा दे सकते हैं.
• केंद्रीय बैंकों की खरीद और गोल्ड ईटीएफ में निवेश भी कीमतों की दिशा तय करेंगे.
कुल मिलाकर पीटर शिफ का कहना है कि गोल्ड की गिरावट अब खत्म हो चुकी है और कीमत आगे 5,000 डॉलर प्रति औंस के ऊपर जा सकती है. दूसरी तरफ बाजार में 4,500 डॉलर का स्तर अभी भी बड़ी परीक्षा बना हुआ है. भारतीय निवेशकों के लिए सबसे अहम बात यह है कि इस अनुमान को पक्का लक्ष्य नहीं माना जा सकता, क्योंकि घरेलू गोल्ड के दाम पर कई दूसरे कारक भी असर डालते हैं.
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