Gold Price Forecast: साल 2026 की शुरुआत में रिकॉर्ड तेजी दिखाने के बाद सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट आई है. MCX पर सोना जनवरी में करीब ₹1.90 लाख प्रति 10 ग्राम के स्तर तक पहुंचा था, जबकि अब इसकी कीमत करीब ₹1.48 लाख बताई जा रही है. इस गिरावट के बीच विशेषज्ञों को उम्मीद है कि अगले 12 से 24 महीनों में सोना फिर नया रिकॉर्ड बना सकता है. जानिए, सोने की कीमतों में दोबारा तेजी आने की उम्मीद क्यों जताई जा रही है और निवेशकों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए.
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Gold Price Prediction: रिकॉर्ड तेजी के बाद सोने में बड़ी गिरावट
साल 2026 की शुरुआत में सोने की कीमतों में जोरदार तेजी देखने को मिली थी. अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना करीब 5,500 से 5,600 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया था. हालांकि, इसके बाद कीमतों में तेज गिरावट आई और सोना करीब 4,000 से 4,185 डॉलर प्रति औंस के दायरे में आ गया. भारतीय बाजार में भी सोने की कीमतों पर इसका असर देखने को मिला. मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX पर सोना जनवरी 2026 में करीब ₹1.90 लाख प्रति 10 ग्राम के स्तर तक पहुंचा था. अब इसकी कीमत करीब ₹1.48 लाख प्रति 10 ग्राम बताई जा रही है.
इस गिरावट से उन निवेशकों की चिंता बढ़ गई है, जिन्होंने ऊंची कीमतों पर सोना खरीदा था. वहीं, त्योहारों और शादियों के सीजन से पहले कई लोगों की नजर इस बात पर है कि सोने की कीमतें फिर से तेजी पकड़ेंगी या नहीं. हालांकि, कीमतों में गिरावट का मतलब यह नहीं है कि सोने में आगे तेजी की संभावना खत्म हो गई है. कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि कई ऐसे कारक हैं, जो लंबी अवधि में सोने की कीमतों को सहारा दे सकते हैं.
क्या ₹1.90 लाख के पार जाएगा सोना?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कई फंड मैनेजर और उद्योग विशेषज्ञों को उम्मीद है कि अगले 12 से 24 महीनों में सोना एक बार फिर नया रिकॉर्ड बना सकता है.अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में तेजी आती है और रुपये की विनिमय दर समेत घरेलू बाजार के अन्य कारक भी अनुकूल रहते हैं, तो भारतीय बाजार में सोने का भाव ₹1.90 लाख प्रति 10 ग्राम के पार जा सकता है. इस संभावित तेजी के पीछे केंद्रीय बैंकों की खरीदारी, अमेरिका पर बढ़ते सरकारी कर्ज की चिंताएं, डॉलर पर निर्भरता कम करने की कोशिश और दुनिया में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव जैसे कारण बताए जा रहे हैं. हालांकि, यह समझना जरूरी है कि ₹1.90 लाख का स्तर एक अनुमान है, कोई निश्चित लक्ष्य नहीं. वास्तविक कीमतें बाजार की परिस्थितियों के हिसाब से अलग हो सकती हैं.
सोने की कीमतों में तेजी की 4 बड़ी वजहें
1. केंद्रीय बैंकों की बढ़ती खरीदारी
सोने की कीमतों को सहारा देने वाले प्रमुख कारकों में केंद्रीय बैंकों की खरीदारी शामिल है. चीन और भारत समेत कई देशों के केंद्रीय बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी बढ़ाने पर ध्यान दे रहे हैं. इसके पीछे एक बड़ी वजह विदेशी मुद्रा भंडार में विविधता लाना है. यानी किसी एक करेंसी या संपत्ति पर बहुत ज्यादा निर्भर रहने के बजाय अलग-अलग विकल्पों में निवेश करना.
जब केंद्रीय बैंक बड़ी मात्रा में सोना खरीदते हैं, तो इससे बाजार में मांग को समर्थन मिल सकता है. वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल यानी WGC के आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर में केंद्रीय बैंकों की सोने की खरीदारी पिछले कई महीनों के ऊंचे स्तरों में रही. हालांकि, सोने की कीमतों पर सिर्फ केंद्रीय बैंकों की खरीदारी का असर नहीं पड़ता. निवेशकों की मांग, ब्याज दरें और डॉलर की चाल भी अहम भूमिका निभाते हैं.
2. अमेरिका पर बढ़ते कर्ज की चिंता
अमेरिका पर बढ़ते सरकारी कर्ज और वित्तीय घाटे को लेकर भी चिंताएं बनी हुई हैं. ऐसी स्थिति में कुछ निवेशक अपने निवेश को केवल डॉलर या अमेरिकी सरकारी बॉन्ड तक सीमित रखने के बजाय सोने जैसे दूसरे विकल्पों पर भी विचार करते हैं. सोना किसी सरकार की जारी की गई करेंसी नहीं है. इसी वजह से आर्थिक अनिश्चितता के दौर में इसे निवेश के एक वैकल्पिक साधन के तौर पर देखा जाता है. अगर अमेरिका के कर्ज और वित्तीय स्थिति को लेकर चिंताएं बढ़ती हैं, तो सोने की मांग को समर्थन मिल सकता है. लेकिन इसका असर इस बात पर भी निर्भर करेगा कि निवेशक दूसरे विकल्पों को कितना आकर्षक मानते हैं.
3. डॉलर पर निर्भरता घटाने की कोशिश और वैश्विक तनाव
दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में युद्ध, राजनीतिक तनाव और देशों के बीच बढ़ते टकराव का असर निवेशकों की रणनीति पर पड़ सकता है. ऐसे समय में निवेशक अक्सर उन संपत्तियों की तलाश करते हैं, जिन्हें वे अनिश्चितता के दौरान अपेक्षाकृत सुरक्षित मानते हैं. सोना भी इनमें शामिल है. इसके अलावा, कुछ देश अपने विदेशी मुद्रा भंडार में डॉलर पर निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहे हैं. ऐसे में सोने की मांग को लंबी अवधि में समर्थन मिल सकता है. हालांकि, यह जरूरी नहीं कि हर बार वैश्विक तनाव बढ़ने पर सोने की कीमतें चढ़ें. अगर डॉलर मजबूत होता है या अमेरिकी बॉन्ड पर मिलने वाला रिटर्न बढ़ता है, तो सोने की कीमतों पर दबाव भी बन सकता है.
4. अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरें
सोने की कीमतों का एक अहम संबंध अमेरिका के केंद्रीय बैंक, फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों से भी है. सोना अपने आप कोई ब्याज नहीं देता. दूसरी ओर, सरकारी बॉन्ड जैसे निवेश विकल्पों से ब्याज मिल सकता है. इसलिए जब ब्याज दरें बढ़ती हैं और बॉन्ड पर मिलने वाला रिटर्न आकर्षक होता है, तो सोने की मांग पर दबाव पड़ सकता है. इसके उलट, अगर भविष्य में ब्याज दरों में कटौती होती है और बॉन्ड पर मिलने वाला रिटर्न घटता है, तो सोना कुछ निवेशकों के लिए ज्यादा आकर्षक हो सकता है. हालांकि, फेड के फैसलों के अलावा महंगाई, डॉलर की चाल और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां भी सोने की कीमतों को प्रभावित करती हैं.
सोने में निवेश करने वालों को क्या करना चाहिए?
सोने की कीमतों में संभावित तेजी की उम्मीद के बावजूद निवेशकों को जल्दबाजी में फैसला नहीं करना चाहिए. सिर्फ इस आधार पर सोना खरीदना सही रणनीति नहीं होगी कि इसकी कीमत अगले एक-दो साल में ₹1.90 लाख प्रति 10 ग्राम पहुंच सकती है. सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है. अगर अमेरिकी ब्याज दरें ऊंची बनी रहती हैं, डॉलर मजबूत होता है या निवेशकों की मांग कमजोर पड़ती है, तो सोने की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है. इसके अलावा, भारतीय बाजार में सोने की कीमतें अंतरराष्ट्रीय भाव के साथ-साथ रुपये-डॉलर की विनिमय दर, आयात शुल्क और अन्य घरेलू कारकों से भी प्रभावित होती हैं. निवेशकों को अपने वित्तीय लक्ष्य, निवेश की अवधि और जोखिम उठाने की क्षमता को ध्यान में रखकर फैसला करना चाहिए. अगर सोने में निवेश करना चाहते हैं, तो अपने पूरे निवेश को एक ही संपत्ति में लगाने के बजाय पोर्टफोलियो में विविधता बनाए रखना अहम है.
निष्कर्ष: तेजी की उम्मीद, लेकिन गारंटी नहीं
सोने की कीमतों में रिकॉर्ड तेजी के बाद बड़ी गिरावट आई है, लेकिन विशेषज्ञों को अगले 12 से 24 महीनों में नए रिकॉर्ड बनने की संभावना दिख रही है. केंद्रीय बैंकों की खरीदारी, अमेरिका के बढ़ते कर्ज को लेकर चिंताएं, डॉलर पर निर्भरता कम करने की कोशिश और ब्याज दरों में संभावित बदलाव सोने की कीमतों के लिए अहम कारक हो सकते हैं. फिर भी, ₹1.90 लाख प्रति 10 ग्राम का स्तर केवल एक संभावित अनुमान है, कोई पक्का वादा नहीं. निवेश से पहले बाजार की परिस्थितियों और अपने वित्तीय लक्ष्यों को समझना जरूरी है.
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