Gold Price Prediction: क्या सोने की चमक अब फीकी पड़ने लगी है? क्या ईरान और इजरायल के बीच तनाव कम होते ही गोल्ड का सुनहरा दौर भी समाप्त हो गया? निवेशकों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या आने वाले समय में सोने के भाव में बड़ी गिरावट आ सकती है. अगर आप सोने या चांदी में निवेश करते हैं, या खरीदारी की योजना बना रहे हैं, तो आपके लिए यह रिपोर्ट बेहद जरूरी है.
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दरअसल, दुनिया की दिग्गज इन्वेस्टमेंट बैंकिंग कंपनियों में से एक Barclays ने सोने की कीमतों को लेकर एक ऐसा अनुमान जारी किया है, जिसने पूरी कमोडिटी मार्केट का ध्यान खींच लिया है. इस रिपोर्ट पर विस्तार से बात करने से पहले, बाजार के मौजूदा भाव पर एक नजर डाल लेते हैं.
MCX पर सोना-चांदी के मौजूदा भाव
कमोडिटी मार्केट (MCX) पर सोने का भाव मामूली गिरावट के साथ फिलहाल 1 लाख 52 हजार रुपये के पार कारोबार कर रहा है. वहीं, चांदी में भी एक चौथाई फीसदी की कमजोरी देखी गई है, जिसके बाद यह ढाई लाख रुपये प्रति किलो के स्तर से नीचे आ गई है.
अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसले पर टिकीं बाजार की निगाहें
आज ग्लोबल कमोडिटी मार्केट की नजर अमेरिकी केंद्रीय बैंक यानी Federal Reserve System पर टिकी है. निवेशक यह जानने के लिए उत्सुक हैं कि ब्याज दरों को लेकर फेड का रुख क्या रहने वाला है.
अगर फेड सख्त रुख अपनाता है: और ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रखने का संकेत देता है, तो डॉलर मजबूत होगा जिससे सोने की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है.
अगर फेड कटौती के संकेत देता है: तो सोने की कीमतों को एक नई ताकत मिल सकती है. यही वजह है कि आज सराफा बाजार में उतार-चढ़ाव का माहौल बना हुआ है.
सोने की कीमतों पर बार्कलेज का अनुमान
अब बात करते हैं Barclays की चौंकाने वाली रिपोर्ट की. बार्कलेज का मानना है कि सोने का उचित मूल्य (Fair Value) अभी लगभग 4,150 डॉलर प्रति औंस के आसपास होना चाहिए, लेकिन आने वाले सालों में यह और ऊपर जाएगा.
ग्लोबल बैंक के मुताबिक, साल 2026 में सोना 4,791 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकता है. वहीं, साल 2027 में इसके बढ़कर लगभग 4,900 डॉलर प्रति औंस तक जाने की संभावना है. यानी बार्कलेज अभी भी सोने को लेकर पूरी तरह बुलिश (सकारात्मक) है.
इन वजहों से सोने को मिलेगा लॉन्ग टर्म सपोर्ट
बार्कलेज का विश्लेषण कहता है कि जिन कारणों से सोने को लंबी अवधि में मजबूती मिलती है, वे सारे फैक्टर्स बाजार में आज भी मौजूद हैं:
1. लगातार बनी हुई ऊंची महंगाई (Inflation)
2. वैश्विक केंद्रीय बैंकों द्वारा सोने की लगातार खरीदारी
3. डॉलर पर निर्भरता कम करने की वैश्विक कोशिशें (De-dollarization)
4. भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions)
बैंक का मानना है कि ये ऐसे फैक्टर्स हैं जिनका असर बाजार पर धीरे-धीरे दिखता है, लेकिन जब इनका असर शुरू होता है तो वह काफी लंबे समय तक बना रहता है.
महंगाई और सोने का कनेक्शन
सोने और महंगाई का रिश्ता बेहद पुराना और गहरा है. जब भी महंगाई बढ़ती है, निवेशक अपनी पूंजी को सुरक्षित रखने के लिए सुरक्षित निवेश (Safe Haven) के रूप में सोने का रुख करते हैं.
बार्कलेज के मुताबिक, महंगाई में होने वाली हर 1% की वृद्धि सोने की कीमतों को लगभग 5% तक का सपोर्ट दे सकती है. इसके अलावा, ईरान संकट के कारण कच्चे तेल और ऊर्जा की कीमतों पर जो दबाव बना है, उसका असर आने वाले समय में ग्लोबल इंफ्लेशन पर दिखेगा. अगर महंगाई बढ़ी, तो सोने की कीमतों को इससे मजबूत समर्थन मिलेगा.
एक्सपर्ट्स की सलाह: क्या इस समय सोना खरीदना चाहिए?
इस माहौल के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या मौजूदा स्तरों पर सोने में एंट्री करनी चाहिए?
शॉर्ट टर्म निवेशक: एक्सपर्ट्स का मानना है कि छोटी अवधि में फेड की बैठक, डॉलर इंडेक्स की चाल और वैश्विक घटनाक्रमों के कारण बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहेगा.
लॉन्ग टर्म निवेशक: लंबी अवधि के निवेशकों के लिए सोना अभी भी उनके पोर्टफोलियो का एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा बना रहना चाहिए.
मौजूदा निवेशक: जो लोग पहले से निवेश कर चुके हैं, उन्हें किसी जल्दबाजी या पैनिक में आकर फैसला लेने की जरूरत नहीं है.
नए निवेशक: नए निवेशकों के लिए इस समय सिस्टेमेटिक तरीके (जैसे- SIP या गिरावट पर धीरे-धीरे खरीदना) से निवेश करने की रणनीति सबसे बेहतर साबित हो सकती है.
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