सोने की कीमतों ने अगस्त में एक बार फिर इतिहास रच दिया. World Gold Council यानी WGC की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, अगस्त 2026 में अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत 13.3% बढ़कर 4,563 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई. यह पिछले करीब 25 वर्षों में सोने का तीसरा सबसे मजबूत मासिक रिटर्न है.इससे पहले दिसंबर 2025 में सोने की कीमत में करीब 14% की तेजी आई थी. यानी अगस्त की तेजी उससे बस थोड़ी ही कम रही. WGC के मुताबिक, इस दौरान दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में गोल्ड ETF में जोरदार निवेश, कमजोर अमेरिकी डॉलर और फ्यूचर्स-ऑप्शंस बाजार में बढ़ी खरीदारी ने सोने की कीमत को ऊपर पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई.
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सोने में इतनी तेज रफ्तार क्यों आई?
WGC के Gold Return Attribution Model यानी GRAM के मुताबिक, अगस्त की तेजी के पीछे मुख्य रूप से तीन बड़े कारण रहे
1. Gold ETF में जमकर पैसा आया
अगस्त में दुनिया भर के निवेशकों ने Gold ETF में बड़े पैमाने पर पैसा लगाया. WGC के मुताबिक, वैश्विक Gold ETF में करीब 18 अरब डॉलर का निवेश आया. क्षेत्र के हिसाब से देखें तो यूरोप में करीब 7.9 अरब डॉलर, उत्तर अमेरिका में करीब 7.8 अरब डॉलर और एशिया में करीब 2 अरब डॉलर का निवेश आया. इसके चलते ग्लोबल गोल्ड ETF की कुल होल्डिंग भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई.WGC के आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त के अंत तक Gold ETF की कुल होल्डिंग बढ़कर करीब 4,189 टन हो गई, जबकि इनकी कुल एसेट अंडर मैनेजमेंट यानी AUM करीब 615 अरब डॉलर पहुंच गई.
2. अमेरिकी डॉलर कमजोर पड़ा
सोने की तेजी की दूसरी बड़ी वजह अमेरिकी डॉलर की कमजोरी रही.आमतौर पर डॉलर कमजोर होने पर दूसरी करेंसी में सोना खरीदना अपेक्षाकृत सस्ता हो जाता है. इससे सोने की मांग को सहारा मिल सकता है. WGC के GRAM मॉडल में भी अगस्त की तेजी में कमजोर अमेरिकी डॉलर को अहम फैक्टर बताया गया है.यानी एक तरफ डॉलर पर दबाव और दूसरी तरफ सोने में बढ़ती निवेश मांग ने कीमतों को और मजबूती दी.
3. Futures और Options में बढ़ी तेजी
अगस्त में वायदा बाजार में भी निवेशकों की सक्रियता बढ़ी. COMEX पर नेट मैनेज्ड मनी पॉजिशन में करीब 97 टन यानी लगभग 13 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई. इसके अलावा सोने की संभावित उतार-चढ़ाव में भी तेजी आई. WGC के मुताबिक, यह मजबूत call buying activity से जुड़ी थी. यानी ट्रेडर्स का एक हिस्सा सोने में आगे और तेजी की संभावना पर दांव लगा रहा था.
इन सबका असर यह हुआ कि सोने में तेजी सिर्फ निवेश मांग से नहीं, बल्कि फ्यूचर्स और ऑप्शन मार्केट का मोमेंटम भी मजबूत हुआ.
भारत में भी सोने की कीमत 9% बढ़ी
अंतरराष्ट्रीय बाजार की तेजी का असर भारतीय बाजार में भी देखने को मिला.WGC के आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त में भारत में सोने की कीमत 9% बढ़कर ₹1,55,114 प्रति 10 ग्राम पहुंच गई. हालांकि यह भारत का ऑल-टाइम हाई नहीं है.भारत में सोने का रिकॉर्ड हाई ₹1,75,231 प्रति 10 ग्राम है, जो 29 जनवरी 2026 को दर्ज किया गया था.यानी अगस्त की तेजी के बावजूद भारतीय सोना अभी अपने रिकॉर्ड हाई से नीचे है.
क्या आगे भी सोने की चमक बरकरार रहेगी?
WGC के मुताबिक, आगे सोने की दिशा तय करने में अमेरिकी डॉलर, ब्याज दरें, निवेशकों की पॉजिशनिंग, सरकारी कर्ज और ट्रेजरी मार्केट जैसे फैक्टर अहम रहेंगे. अमेरिका का कुल ग्रोस नेशनल कर्ज अगस्त में पहली बार 40 ट्रिलियन डॉलर के पार चला गया था. 3 सितंबर 2026 तक यह करीब 40.10 ट्रिलियन डॉलर था. बढ़ता कर्ज और बड़ा फिस्कल डेफिसिट निवेशकों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है. WGC ने यह भी कहा है कि अमेरिकी ट्रेजरी की हाल में घोषित बॉन्ड बायबैक योजना और बढ़ते कर्ज को लेकर चिंताएं सोने जैसे रियल एसेट को सपोर्ट कर सकती हैं, खासकर तब जब निवेशकों को अमेरिकी फिस्कल स्थिति को लेकर भरोसेमंद समाधान नजर न आए. ट्रेजरी बायबैक कार्यक्रम का बढ़ा हुआ हिस्सा 9 सितंबर से शुरू हुआ है.
Fed की ब्याज दरों पर भी रहेगी नजर
अब बाजार की नजर अमेरिकी फेडरल रिज़र्व की अगली मॉनेटरी पॉलिसी मीटिंग पर भी है. ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर की चाल इन तीनों का असर सोने पर पड़ सकता है.हालांकि यह याद रखना जरूरी है कि सोने में लगातार तेजी की गारंटी नहीं है. अगर डॉलर मजबूत होता है, बॉन्ड यील्ड बढ़ती है या निवेशक मुनाफावसूली शुरू करते हैं, तो सोने की कीमत में correction भी देखने को मिल सकता है.
निवेशकों के लिए क्या मतलब?
सोने ने अगस्त में शानदार रिटर्न दिया है, लेकिन इतनी तेज तेजी के बाद निवेशकों को यह नहीं मानना चाहिए कि कीमतें हर महीने इसी रफ्तार से बढ़ेंगी. सोने में आगे भी तेजी के लिए ETF फ्लो , डॉलर, अमेरिकी ब्याज दरों और ग्लोबल रिस्क सेंटिमेंट पर नजर रखना जरूरी होगा.फिलहाल इतना जरूर है कि अगस्त 2026 सोने के इतिहास के सबसे शानदार महीनों में शामिल हो गया है.
(डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सूचनात्मक और शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए तैयार किया गया है. इसे किसी भी प्रकार की वित्तीय या निवेश सलाह न माना जाए. बाजार में निवेश करने से पहले अपने पंजीकृत वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य लें.)
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