Gold Prices: Gold पर लगा ₹500 करोड़ का उल्टा दांव, क्या सितंबर में टूटेगी तेजी?

चिराग ठाकुर

• 07:31 PM • 25 Aug 2026

सोना रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा है, लेकिन अमेरिका में जीएलडी पर हुआ बड़ा ऑप्शन सौदा सितंबर तक कीमतों में ठंडक या गिरावट का इशारा दे रहा है. जानिए पूरा मामला.

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न्यूज़ हाइलाइट्स

अमेरिका के बढ़ते कर्ज ने डॉलर को लेकर बाजार की चिंता बढ़ाई

डॉलर कमजोरी की आशंका में निवेशक सोने को सुरक्षित ठिकाना मान रहे

स्पॉट गोल्ड 4668 डॉलर और वायदा 4700 डॉलर के ऊपर पहुंचा

Gold की कीमतों में जबरदस्त तेजी देखने को मिल रही है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में Spot Gold $4,668 प्रति औंस के पार निकल चुका है, जबकि US Gold Futures $4,700 का स्तर पार कर चुके हैं. ऐसे माहौल में निवेशकों के बीच सवाल है कि क्या Gold की तेजी अभी और जारी रहेगी.

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लेकिन इसी तेजी के बीच अमेरिका के Options Market में एक बड़े ट्रेड ने सबका ध्यान खींचा है. एक ट्रेडर ने Gold से जुड़े ETF के Options में करीब $58 million यानी लगभग ₹500 करोड़ का Net Credit वाला बड़ा trade किया है. खास बात यह है कि यह trade Gold की तेज रफ्तार पर सीधे भरोसा जताने के बजाय short term में इसके ठंडा पड़ने की संभावना पर दांव लगाता दिख रहा है.

अमेरिका का कर्ज और Gold की तेजी का कनेक्शन क्या है?

Gold की हालिया तेजी के पीछे अमेरिका की fiscal स्थिति और Dollar को लेकर बढ़ती चिंता को भी एक बड़ी वजह माना जा रहा है.

अमेरिका पर कर्ज का बोझ बढ़ रहा है. इसी बीच US Treasury ने पुराने Treasury Securities की Buyback गतिविधि बढ़ाई है. बाजार में इससे यह चर्चा तेज हुई कि अमेरिकी सरकार लंबे समय तक borrowing costs और bond yields को नियंत्रित रखने के लिए कदम उठा सकती है.

इससे Dollar की purchasing power को लेकर चिंता बढ़ती है. बाजार में इसी तरह की सोच को Dollar-Debasement Trade कहा जाता है.

आसान भाषा में समझें तो जब निवेशकों को लगता है कि किसी currency की value पर दबाव आ सकता है, तो वे ऐसे assets की तरफ रुख करते हैं जिन्हें currency risk से बचाव के तौर पर देखा जाता है.

Gold उनमें सबसे प्रमुख है.

इसी वजह से.

  • Spot Gold $4,668 के पार पहुंचा.
  • US Gold Futures $4,700 के पार निकल गए.
  • Gold करीब तीन महीने के ऊंचे स्तर पर पहुंच गया.

फिर आया Options Market का बड़ा दांव

जब Gold को लेकर बाजार का sentiment bullish है, तभी अमेरिकी बाजार में एक बड़ा Options trade हुआ.

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी बाजार खुलने के करीब 20 मिनट बाद एक ट्रेडर ने Gold ETF SPDR Gold Shares यानी GLD के करीब 1.16 लाख Options Contracts में trade किया.

अब इस trade को समझना जरूरी है.

ट्रेडर ने 18 सितंबर की expiry वाले $420 Call Options बेचे. इसके बदले उसे करीब $202 million यानी लगभग ₹1,700 करोड़ का premium मिला. लेकिन यह उसकी कमाई नहीं थी. इसके तुरंत बाद उसने करीब $144 million यानी लगभग ₹1,200 करोड़ खर्च करके उसी संख्या में $430 Call Options खरीद लिए.

यानी गणित कुछ ऐसा रहा.

$202 million - $144 million = $58 million

यानी trade शुरू करते वक्त करीब $58 million यानी लगभग ₹500 करोड़ का Net Credit मिला. इसी strategy को बाजार की भाषा में Bearish Call Spread कहा जाता है.

क्या ट्रेडर Gold के Crash की उम्मीद कर रहा है?

जरूरी नहीं. यहां सबसे अहम बात यही है. इस trade को सीधे तौर पर 'Gold Crash का दांव' समझना सही नहीं होगा. इसका संकेत ज्यादा करीब इस बात से है कि ट्रेडर को लगता है कि सितंबर की expiry तक GLD में इतनी तेज तेजी शायद जारी नहीं रहेगी.

यानी Gold अगर थोड़ा नीचे आता है या एक दायरे में रहता है, तो यह strategy उसके पक्ष में जा सकती है.

इसे एक उदाहरण से समझिए. अगर कोई शेयर ₹100 से ₹150 तक बहुत तेजी से पहुंच जाए, तो एक ट्रेडर यह नहीं मानता कि शेयर ₹50 पर आ जाएगा. वह सिर्फ इतना मान सकता है कि ₹150 के बाद कुछ समय के लिए ₹140-145 तक correction आ सकता है. Gold को लेकर इस Options trade का संकेत भी कुछ ऐसा ही है.

भारत में Gold Rally पर क्या असर?

भारत में भी Gold करीब ₹1.63 लाख प्रति 10 ग्राम के आसपास कारोबार करता नजर आ रहा है. 17 जुलाई से देखें तो इसमें करीब 15 फीसदी से ज्यादा की तेजी आ चुकी है.

ऐसे में भारतीय निवेशकों के सामने सबसे बड़ा सवाल है कि क्या Gold की rally को अब भी chase किया जाए या correction का इंतजार किया जाए.

त्योहारी सीजन में Gold की मांग और sentiment को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. लेकिन इतनी तेज rally के बाद profit booking का जोखिम भी बढ़ जाता है.

इसलिए अमेरिकी Options Market का यह बड़ा trade एक चेतावनी की तरह जरूर देखा जा सकता है, लेकिन इसे Gold के crash की भविष्यवाणी मानना सही नहीं होगा.

Gold की long-term कहानी और short-term price movement दो अलग चीजें हैं.

फिलहाल सवाल यही है. क्या सितंबर में Gold की चमक और बढ़ेगी, या फिर ₹500 करोड़ का यह contrarian bet सही साबित होकर Gold की तेज रफ्तार पर ब्रेक लगाएगा?