शादियों के सीजन से पहले सोने की कीमत में तेज उछाल देखने को मिल रहा है. अगस्त 2026 में घरेलू बाजार में सोने का हाजिर भाव 11,008 रुपये बढ़ चुका है, जबकि वैश्विक बाजार में स्पॉट गोल्ड 4,500 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर बना हुआ है.
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यह बढ़त जेवर खरीदने वालों के लिए चिंता की बात है, लेकिन निवेश करने वालों के लिए राहत मानी जा रही है. 31 जुलाई 2026 को भारत के सर्राफा बाजार में सोना 1,42,860 रुपये प्रति 10 ग्राम था, जो 19 अगस्त 2026 को बढ़कर 1,53,868 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ.
सोने की कीमत में कितनी तेजी आई
अगस्त में अब तक सोना 11,008 रुपये महंगा हुआ है.31 जुलाई 2026 को भाव 142860 रुपये प्रति 10 ग्राम था.19 अगस्त 2026 को भाव 153868 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ.वैश्विक बाजार में स्पॉट गोल्ड 4,500 डॉलर प्रति औंस के ऊपर टिका रहा.इस महीने अब तक कीमत में करीब 11 प्रतिशत की बढ़त दर्ज हुई है.जनवरी के बाद अगस्त साल का दूसरा सबसे मजबूत महीना बनता दिख रहा है. जनवरी में कीमतें 13 प्रतिशत बढ़ी थीं.
19 अगस्त को क्या हुआ
बुधवार, 19 अगस्त 2026 को वैश्विक बाजार में सोने में हल्की बिकवाली दिखी, लेकिन भाव ऊंचे स्तर पर बना रहा. आंकड़े बताते हैं कि मुनाफा वसूली के बाद भी सोना 4,500 डॉलर प्रति औंस के आसपास मजबूती से टिका हुआ है.
अगस्त में सोना क्यों चमका
महीने की शुरुआत में अमेरिकी फेडरल रिजर्व की सितंबर बैठक को लेकर ब्याज दर बढ़ने की आशंका 70 प्रतिशत से ज्यादा थी. आम तौर पर ब्याज दर बढ़ने पर सोने पर दबाव आता है, क्योंकि सोना ब्याज नहीं देता.
इसके बाद अमेरिका की रोजगार रिपोर्ट ने श्रम बाजार की धीमी तस्वीर दिखाई. रिपोर्ट के बाद ब्याज दर बढ़ने की संभावना 50 प्रतिशत से नीचे आ गई. फिर उपभोक्ता मूल्य सूचकांक और थोक मूल्य सूचकांक के आंकड़े आए. इनमें ऊर्जा कीमतों को छोड़कर महंगाई का दबाव कुछ कम दिखा. ये आंकड़े बाजार की उम्मीद से बेहतर रहे. इसके बाद सितंबर में ब्याज दर बढ़ने की संभावना घटकर 32 प्रतिशत पर आ गई.
आंकड़ों के मुताबिक, अब बाजार का बड़ा हिस्सा यही मान रहा है कि फेड सितंबर में ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं कर सकता है. इसी बीच अमेरिकी ट्रेजरी की दखल से बॉन्ड यील्ड नीचे आई और डॉलर भी कमजोर हुआ. कमजोर डॉलर से दूसरे देशों के खरीदारों के लिए सोना तुलनात्मक रूप से सस्ता पड़ता है, जिससे मांग बढ़ती है. यही वजह रही कि सोना 4,500 डॉलर प्रति औंस के पार पहुंचा.
आगे क्या देखना होगा
इस तेज बढ़त के बाद भी सोने के रास्ते में जोखिम बने हुए हैं. कच्चे तेल की कीमतें अभी ऊंचे स्तर पर हैं और अंतरराष्ट्रीय तनाव भी कम नहीं हुआ है. अगर तेल और महंगा होता है, तो महंगाई फिर बढ़ सकती है. ऐसी स्थिति में फेड के ब्याज दरें न बढ़ाने के रुख पर दबाव आ सकता है.
मध्य पूर्व में किसी समझौते की उम्मीद फिलहाल कमजोर दिख रही है. ऐसे में बाजार की नजर आगे भी महंगाई, डॉलर, बॉन्ड यील्ड और फेड के रुख पर बनी रहेगी. फिलहाल साफ है कि सोने की तेजी ने खरीदारों की चिंता बढ़ाई है, जबकि निवेशकों को मजबूत रिटर्न का सहारा दिया है.
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