पिछले कई महीनों से सोने की कीमतों पर दबाव बना हुआ है. इसकी बड़ी वजह अमेरिका में ब्याज दरों को लेकर चिंता, डॉलर की मजबूती और मुनाफावसूली रही है. अब बाजार में यह चर्चा तेज है कि क्या सोने की गिरावट का सबसे खराब दौर पीछे छूट चुका है.
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सेक्सो बैंक का कहना है कि गोल्ड मार्केट में अब हालात धीरे धीरे बदल रहे हैं. बैंक के मुताबिक घबराहट में बिकवाली कम हो रही है और बाजार नया आधार बनाने की कोशिश कर रहा है. हालांकि बैंक ने यह भी साफ कहा है कि इसे अभी सीधी और पक्की तेजी नहीं माना जा सकता.
सेक्सो बैंक ने क्या कहा
डेनमार्क का निवेश बैंक और ऑनलाइन ट्रेडिंग मंच सेक्सो बैंक मानता है कि सोने में पिछले महीनों की भारी बिकवाली का सबसे कठिन दौर शायद खत्म हो चुका है. बैंक के कमोडिटी रणनीति प्रमुख ओले हैनसेन के मुताबिक अब लगातार घबराहट में बेचने की जगह ठहराव और आधार बनने की प्रक्रिया दिख रही है.
ओले हैनसेन के अनुसार पहले निवेशक तेजी से सोना बेच रहे थे, लेकिन अब जल्दबाजी कम दिख रही है. उनका कहना है कि बाजार में सोच समझकर दोबारा खरीदारी शुरू होने के संकेत मिल रहे हैं. फिर भी बैंक का मानना है कि मजबूत और लंबी तेजी के लिए अभी और साफ संकेत चाहिए.
7 जुलाई को सोना चांदी की कीमत
एमसीएक्स पर ७ जुलाई को दोपहर करीब २ बजे, ५ अगस्त २०२६ डिलीवरी वाला सोना करीब १४०० रुपये गिरकर १,४५,५५० रुपये प्रति १० ग्राम पर कारोबार कर रहा था.४ सितंबर २०२६ डिलीवरी वाली चांदी ४००० रुपये से ज्यादा टूटकर २,३१,९३२ रुपये प्रति किलो पर कारोबार कर रही थी.
सोने पर सबसे बड़ा असर किसका
सोने की कीमत पर इस समय सबसे बड़ा असर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों की सोच का माना जा रहा है. जब अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ती हैं, तब निवेशकों को बैंक और बॉन्ड में ज्यादा रिटर्न मिलता है. ऐसे में सोने जैसी ऐसी संपत्ति की मांग घट सकती है, जो ब्याज नहीं देती.
यही वजह रही कि पिछले कुछ समय से सोने पर दबाव बना रहा. अब हालात इसलिए बदलते दिख रहे हैं क्योंकि पिछले सप्ताह अमेरिका के रोजगार के आंकड़े उम्मीद से कमजोर रहे. जून में सिर्फ ५७ हजार नई नौकरियां जुड़ीं, जिससे बाजार को संकेत मिला कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था पहले जितनी मजबूत नहीं दिख रही है.
कमजोर आंकड़ों से क्या बदला
बाजार की राय यह बन रही है कि अगर अमेरिकी अर्थव्यवस्था धीमी पड़ती है, तो फेडरल रिजर्व के लिए ब्याज दरें बढ़ाना आसान नहीं होगा. कई निवेशक अब मान रहे हैं कि इस साल अमेरिका में दरें शायद नहीं बढ़ेंगी.
ओले हैनसेन के मुताबिक महंगाई का दबाव भी कम हो रहा है और तेल गैस की कीमतों में नरमी आई है. उनका कहना है कि अगर बाजार को भरोसा हो जाता है कि दरें नहीं बढ़ेंगी, तो डॉलर कमजोर पड़ सकता है. आम तौर पर डॉलर में नरमी आने पर सोने को सहारा मिलता है.
चार्ट में कौन से स्तर अहम हैं
ओले हैनसेन के मुताबिक फिलहाल ४,००० डॉलर के आसपास का स्तर मजबूत सहारा साबित हुआ है. उनके अनुसार सोना इस स्तर से नीचे नहीं गया और वहां से बढ़कर करीब ४,२०० डॉलर तक पहुंचा. लेकिन इस बढ़त पर फिर बिकवाली दिखी, जिससे साफ है कि ऊंचे स्तर पर अब भी मुनाफावसूली जारी है.
४,००० डॉलर के आसपास का स्तर अभी मजबूत सहारा माना जा रहा है.करीब ४,२०० डॉलर तक बढ़ने के बाद फिर बिकवाली शुरू हुई.४,४८५ डॉलर के ऊपर निकलना पहली बड़ी तकनीकी मजबूती माना जा रहा है.४,५७४ डॉलर का स्तर इसके बाद और अहम माना गया है.
बैंक का कहना है कि अगर सोना ४,४८५ डॉलर और फिर ४,५७४ डॉलर के ऊपर टिकता है, तो तेजी की संभावना मजबूत हो सकती है. तब तक मौजूदा बढ़त को सिर्फ सुधार माना जाएगा, नई बड़ी तेजी नहीं.
कुल मिलाकर सेक्सो बैंक का आकलन है कि सोने में घबराहट वाली बिकवाली अब कम होती दिख रही है और बाजार नया आधार बनाने की कोशिश में है. हालांकि रिकॉर्ड ऊंचाई की बात करना अभी जल्दबाजी होगी. आने वाले महीनों में अमेरिकी ब्याज दरें, डॉलर की चाल और महंगाई के आंकड़े ही सोने की दिशा तय करेंगे.
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