Gold Silver Price Today: दुनिया में कुछ चीजें कभी अपनी अहमियत नहीं खोतीं और सोना उनमें सबसे ऊपर आता है. सदियों से जब भी दुनिया में कोई बड़ा संकट आया है तो निवेशकों ने हमेशा सोने की तरफ देखा. चाहे युद्ध हो, आर्थिक मंदी हो, महंगाई का डर हो या फिर शेयर बाजार में भारी गिरावट- सोना हमेशा से सबसे सुरक्षित निवेश की पहचान रहा है. संकट के समय यह संपत्ति निवेशकों के पोर्टफोलियो को डूबने से बचाती है. हालांकि, पिछले कुछ महीनों में सोने की चाल ने बड़े-बड़े अनुभवी निवेशकों को भी हैरत में डाल दिया.
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इस साल की शुरुआत में रिकॉर्ड ऊंचाइयों को छूने के बाद सोना लगातार दबाव में देखा गया. अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव, होर्मुज संकट और कच्चे तेल की कीमतों में आए उछाल ने अचानक बाजार की पूरी तस्वीर बदल दी. निवेशकों को लगने लगा कि महंगाई फिर से बेकाबू हो सकती है, जिसके चलते दुनिया के केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में कटौती करने की बजाय उन्हें लंबे समय तक ऊंचा रख सकते हैं.
गिरावट का दौर शून्य रिटर्न की स्थिति
ब्याज दरों में कटौती न होने के डर की वजह से फरवरी के बाद सोने की कीमतों में करीब 20 प्रतिशत तक की बड़ी गिरावट देखने को मिली. हालात इस कदर बदल गए कि साल 2026 में सोने ने अपने निवेशकों को कोई रिटर्न नहीं दिया. साल की शुरुआत में कीमतें जिस स्तर पर थीं, बाजार में भारी उतार-चढ़ाव के बाद वे घूम-फिरकर वापस उसी के आसपास लौट आईं. इससे लंबी अवधि के निवेशकों में थोड़ी मायूसी छाने लगी थी.
बाजार में पलटी बाजी, सोने-चांदी में आई जोरदार तेजी
अब कमोडिटी बाजार की कहानी एक बार फिर से बदलती हुई दिखाई दे रही है. कारोबारी हफ्ते के पहले ही दिन सोने और चांदी की कीमतों में एक शानदार और जोरदार तेजी देखने को मिली है. मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर गोल्ड का भाव करीब 2 फीसदी के बड़े उछाल के साथ 1 लाख 53 हजार रुपये प्रति तोले के स्तर पर पहुंच गया. वहीं दूसरी ओर, चांदी का भाव भी पौने तीन फीसदी की बढ़त दर्ज करते हुए ढाई लाख रुपये प्रति किलो के पार निकल गया.
अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते ने बदली हवा
सोने-चांदी में आई इस नई और अचानक खरीदारी के पीछे अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म करने को लेकर हुआ शुरुआती समझौता सबसे बड़ी वजह माना जा रहा है. इस शांति समझौते की खबर ने पूरी दुनिया के कमोडिटी बाजारों में एक नई हलचल पैदा कर दी है. इसके साथ ही बुलियन मार्केट के लिए कई सकारात्मक फैक्टर्स एक साथ सामने आ गए हैं, जिससे बाजार का सेंटिमेंट पूरी तरह बदल गया है.
कच्चे तेल में गिरावट और डॉलर की कमजोरी से मिली राहत
अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में आई तेज गिरावट और डॉलर में आई कमजोरी से अब बाजार को यह लगने लगा है कि शायद केंद्रीय बैंकों पर से ब्याज दरों को लेकर दबाव कम हो सकता है. यही वजह है कि सोना लगातार तीसरे कारोबारी दिन मजबूत बढ़त के साथ काम करता हुआ दिखा. आमतौर पर देखा गया है कि जब भी कोई युद्ध खत्म होता है तो सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग कम हो जाती है और उसकी कीमतों पर दबाव आता है. लेकिन इस बार बाजार ने बिल्कुल अलग और अनोखी प्रतिक्रिया दी है.
स्टेट ऑफ होर्मुज का खतरा टलने से राहत में बाजार
दरअसल, इस बार बाजार की सबसे बड़ी चिंता सीधे तौर पर युद्ध नहीं थी, बल्कि युद्ध से होने वाले आर्थिक असर को लेकर थी. ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के दौरान स्टेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) के बंद होने का एक बड़ा खतरा पैदा हो गया था. पूरी दुनिया के तेल व्यापार का एक बहुत बड़ा हिस्सा इसी समुद्री रास्ते से होकर गुजरता है. अगर यह रास्ता लंबे समय के लिए बंद हो जाता तो कच्चे तेल की कीमतें आसमान छूने लगतीं.
महंगाई का गणित और सोने पर पड़ने वाला विपरीत असर
अर्थशास्त्र का सीधा नियम है कि अगर तेल महंगा होगा तो हर तरफ महंगाई तेजी से बढ़ेगी. महंगाई बढ़ने का सीधा मतलब यह होता है कि केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा बनाए रखेंगे. चूंकि ऊंची ब्याज दरें सोने की कीमतों के लिए हमेशा से निगेटिव यानी नकारात्मक मानी जाती हैं, इसलिए बाजार इस बात को लेकर डरा हुआ था. अब शांति समझौते की उम्मीद से यह पूरा खतरा टल गया है, जिससे सोने को पंख लग गए हैं.
जेपी मॉर्गन की रिपोर्ट ने सोने के लिए जताया बड़ा अनुमान
सोने की इस तेजी के बीच बाजार में सबसे ज्यादा चर्चा इस समय दिग्गज वैश्विक निवेश बैंक 'जेपी मॉर्गन' की रिपोर्ट की हो रही है. जेपी मॉर्गन का मानना है कि अगर वैश्विक हालात इसी तरह पॉजिटिव बने रहे तो सोना इस साल के आखिर तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में 6,000 डॉलर प्रति औंस के ऐतिहासिक स्तर तक पहुंच सकता है. इतना ही नहीं, रिपोर्ट में साल 2027 तक इसके 6,300 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर पहुंचने की संभावना भी जताई गई है. हालांकि, बैंक ने साफ किया है कि यह अनुमान पूरी तरह से जियो पॉलिटिकल स्थितियों और फेड की नीतियों पर ही निर्भर करेगा.
अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसले पर टिकी दुनिया की नजर
सोने के भविष्य के लिहाज से यह हफ्ता बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि अमेरिकी फेडरल रिजर्व का ब्याज दरों पर बड़ा फैसला आने वाला है. पूरी दुनिया के बाजारों की नजर बुधवार को आने वाले FOMC के फैसले पर टिकी हुई है. बाजार को इस बात का लगभग पूरा भरोसा है कि फेड फिलहाल ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा और उन्हें स्थिर रखेगा, लेकिन असली खेल ब्याज दरों के फैसले से ज्यादा फेडरल रिजर्व के आने वाले बयान और उनके रुख में छिपा होगा.
फेडरल रिजर्व के बयान से तय होगी सोने की अगली चाल
अगर अमेरिकी फेडरल रिजर्व अपने बयान में यह संकेत देता है कि आने वाले महीनों में ब्याज दरों में कटौती मुमकिन है तो सोने की कीमतों में एक नई और ऐतिहासिक तेजी देखने को मिल सकती है. ऐसी स्थिति में निवेशक यह मानकर चलेंगे कि डॉलर आगे और कमजोर होगा जिससे सोने की मांग तेजी से बढ़ेगी. इसके विपरीत, अगर फेड यह कहता है कि महंगाई अभी भी उनके लिए बड़ी चिंता का विषय है और दरें लंबे समय तक ऊंची ही रहेंगी, तो सोने में भारी मुनाफावसूली (प्रॉफिट बुकिंग) हावी हो सकती है.
आने वाले 48 घंटे और 19 जून की तारीख बेहद अहम
यही वजह है कि आने वाले 48 घंटे गोल्ड मार्केट के लिए बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं. फिलहाल पूरा बाजार केवल उम्मीदों के सहारे आगे बढ़ रहा है. आगामी 19 जून को स्विट्जरलैंड में प्रस्तावित अमेरिका-ईरान समझौते पर अंतिम मुहर लगनी अभी बाकी है और इसके साथ ही फेड का फैसला भी आना है. ऐसे में बाजार विश्लेषकों का मानना है कि निवेशकों को अभी जल्दबाजी में कोई भी बड़ा दांव लगाने से पूरी तरह बचना चाहिए, हालांकि लंबी अवधि के लिहाज से सोना हमेशा पोर्टफोलियो का एक मजबूत हिस्सा बना रहेगा.
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