Sona Chandi: सोने पर UBS की बड़ी भविष्यवाणी, आएगा 'महा-क्रैश'? निवेशकों के लिए क्या है संकेत?

चिराग ठाकुर

• 06:03 PM • 03 Aug 2026

यूबीएस रिपोर्ट कहती है कि सोना लंबी अवधि में मजबूत रह सकता है, लेकिन ऊंची ब्याज दरों, कमजोर निवेश मांग और फेड की अनिश्चितता के बीच पहले गिरावट आ सकती है.

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न्यूज़ हाइलाइट्स

एमसीएक्स में आज सोना और चांदी दोनों बढ़त के साथ रहे

ऊंची अमेरिकी ब्याज दरें सोने की मांग को कमजोर कर सकती हैं

रिकॉर्ड स्तर के बाद इस साल सोना करीब पांच फीसदी फिसला

सोना लंबे समय से दुनिया के सबसे सुरक्षित निवेश विकल्पों में गिना जाता है. लेकिन अब एक बड़ी ग्लोबल बैंक की रिपोर्ट ने निवेशकों के सामने नई दुविधा खड़ी कर दी है. रिपोर्ट में एक तरफ सोने के लिए लंबी अवधि का बेहद मजबूत आउटलुक दिया गया है, तो दूसरी तरफ यह भी कहा गया है कि बड़ी तेजी आने से पहले सोने में उल्लेखनीय गिरावट देखने को मिल सकती है.

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यानी सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि सोना आगे बढ़ेगा या नहीं. असली सवाल यह है कि क्या निवेशकों को अभी खरीदारी करनी चाहिए, गिरावट का इंतजार करना चाहिए या फिर पहले से मौजूद निवेश को होल्ड रखना चाहिए.

घरेलू बाजार में कैसी है सोने और चांदी की चाल?

घरेलू वायदा बाजार MCX पर सोने का अक्टूबर फ्यूचर करीब 1,43,652 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार कर रहा है. इसमें करीब 276 रुपये यानी 0.19 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई. वहीं चांदी का सितंबर फ्यूचर करीब 2,18,453 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गया, जिसमें लगभग 1,255 रुपये यानी 0.58 फीसदी की तेजी देखने को मिली.

UBS ने सोने को लेकर क्या कहा?

ग्लोबल बैंक UBS ने अपनी रिपोर्ट में सोने के लिए लंबी अवधि का बुलिश आउटलुक दिया है. बैंक का अनुमान है कि अगर मौजूदा वैश्विक परिस्थितियां बनी रहती हैं, तो जून 2027 तक सोना 5,200 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकता है.

हालांकि, बैंक ने यह भी आगाह किया है कि इस संभावित तेजी से पहले सोने में गिरावट का दौर भी देखने को मिल सकता है. रिपोर्ट के मुताबिक कीमतें 3,850 डॉलर प्रति औंस तक फिसल सकती हैं.

UBS का अनुमान.

  • सितंबर 2026 : 4,400 डॉलर प्रति औंस.
  • दिसंबर 2026 : 4,600 डॉलर प्रति औंस.
  • मार्च 2027 : 5,000 डॉलर प्रति औंस.
  • जून 2027 : 5,200 डॉलर प्रति औंस.

पहले गिरावट की आशंका क्यों?

UBS के मुताबिक इसकी सबसे बड़ी वजह अमेरिका का फेडरल रिजर्व और ब्याज दरों को लेकर बनी अनिश्चितता है.

सोना ऐसा निवेश है जिस पर कोई ब्याज नहीं मिलता. ऐसे में जब अमेरिका में ब्याज दरें ऊंची रहती हैं, तो निवेशकों का रुझान बॉन्ड और दूसरे फिक्स्ड इनकम विकल्पों की तरफ बढ़ जाता है. इससे सोने की मांग पर दबाव आता है और कीमतों में कमजोरी देखने को मिल सकती है.

यही कारण है कि UBS का मानना है कि यदि फेड लंबे समय तक ब्याज दरें ऊंची रखता है, तो सोने में निकट अवधि में दबाव बना रह सकता है.

2026 में अब तक कैसा रहा सोने का प्रदर्शन?

रिपोर्ट के अनुसार, साल 2026 की शुरुआत से अब तक सोने की कीमतों में करीब 5 फीसदी की गिरावट आ चुकी है.

जनवरी में सोना 5,500 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर के ऊपर पहुंच गया था, लेकिन उसके बाद इसमें करेक्शन देखने को मिला. यही वजह है कि बाजार अब आगे की दिशा को लेकर फेड के फैसलों पर नजर बनाए हुए है.

फिर भी UBS को लंबी अवधि में तेजी की उम्मीद क्यों?

निकट अवधि की सावधानी के बावजूद UBS लंबे समय के लिए सोने को लेकर सकारात्मक बना हुआ है. इसकी सबसे बड़ी वजह दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों की लगातार खरीदारी है.

कई देश अपने विदेशी मुद्रा भंडार में डॉलर पर निर्भरता कम करने के लिए सोने का हिस्सा बढ़ा रहे हैं. दूसरी तिमाही में केंद्रीय बैंकों ने करीब 289 टन सोना खरीदा.

UBS का मानना है कि यदि हर तिमाही केंद्रीय बैंकों की खरीदारी करीब 300 टन के आसपास बनी रहती है, तो सोना 4,000 डॉलर प्रति औंस के ऊपर टिके रहने में सफल हो सकता है.

सोने को सपोर्ट देने वाले बड़े फैक्टर

UBS के मुताबिक कुछ ऐसे वैश्विक कारक हैं जो लंबी अवधि में सोने के पक्ष में काम कर सकते हैं.

  • दुनिया में बढ़ती भू-राजनीतिक अनिश्चितता.
  • महंगाई को लेकर बनी चिंता.
  • डॉलर में संभावित कमजोरी.
  • केंद्रीय बैंकों की लगातार खरीदारी.

इन सभी वजहों से सोने की लंबी अवधि की कहानी अभी भी मजबूत दिखाई देती है.

लेकिन एक चिंता भी बनी हुई है

रिपोर्ट के मुताबिक आम निवेशकों की तरफ से सोने की मांग पहले जैसी मजबूत नहीं रही है.

दूसरी तिमाही में गोल्ड बार और गोल्ड कॉइन की मांग घटकर 307 टन रह गई. वहीं गोल्ड ETF में निवेश भी पहले के मुकाबले कमजोर पड़ा है.

यानी संस्थागत खरीदारी मजबूत है, लेकिन रिटेल निवेशकों की भागीदारी में नरमी देखने को मिल रही है.

आगे किस पर रहेगी बाजार की नजर?

आने वाले समय में सोने की दिशा काफी हद तक अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसलों पर निर्भर करेगी.

अगर फेड ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रखता है, तो सोने पर दबाव बना रह सकता है. वहीं यदि 2027 की शुरुआत में ब्याज दरों में कटौती का दौर शुरू होता है, तो डॉलर कमजोर पड़ सकता है और निवेशकों का रुझान दोबारा सोने की ओर बढ़ सकता है.

ऐसी स्थिति में सोने में नई तेजी देखने को मिल सकती है.

भारतीय निवेशकों के लिए क्या है संकेत?

UBS की रिपोर्ट यह संकेत देती है कि लंबी अवधि के निवेशकों के लिए सोने की कहानी अभी खत्म नहीं हुई है. हालांकि, निकट अवधि में उतार-चढ़ाव की संभावना बनी हुई है.

यानी जो निवेशक लंबी अवधि का नजरिया रखते हैं, उनके लिए सोने का आउटलुक सकारात्मक बना हुआ है. वहीं शॉर्ट टर्म ट्रेडिंग करने वालों को संभावित गिरावट और तेज उतार-चढ़ाव के लिए तैयार रहना होगा.

UBS की रिपोर्ट दो अलग-अलग संकेत देती है. एक तरफ निकट अवधि में गिरावट का जोखिम है, तो दूसरी तरफ लंबी अवधि में रिकॉर्ड ऊंचाई की संभावना भी जताई गई है.

ऐसे में आने वाले महीनों में सोने की चाल इस बात पर काफी हद तक निर्भर करेगी कि अमेरिकी फेड ब्याज दरों को लेकर क्या रुख अपनाता है. फिलहाल निवेशकों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि रिकॉर्ड तेजी से पहले सोना कितना नीचे जा सकता है और क्या जून 2027 तक 5,200 डॉलर प्रति औंस का स्तर हासिल कर पाएगा.