अगर आपने भी सोना खरीदकर उससे मुनाफा कमाने के लिए अपने पास रखा है तो यह खबर हैरान कर सकती है. क्योंकि जिस सोने को लोग सबसे सुरक्षित निवेश मानते हैं उसी के बारे में अब चेतावनी दी जा रही है. संकेत मिल रहे हैं कि सोने की कीमत में बड़ी गिरावट आ सकती है और अगर हालात ऐसे ही रहे तो भारत में सोना 1 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम से नीचे भी जा सकता है.
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कुछ ही समय पहले सोना रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया था जिसके बाद मार्केट में अलग ही तेजी देखने को मिली. MCX पर सोना करीब 1,80,000 रुपए प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया था, लेकिन अब वही सोना तेजी से नीचे आया है. कीमत गिरकर करीब 1,56,000 के आसपास पहुंच गई. यानी कुछ ही वक्त में करीब 24 हजार रुपये की गिरावट. अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी यही हाल है वैश्विक कीमतें भी अपने रिकॉर्ड स्तर से काफी नीचे आ चुकी हैं.
लेकिन अब बड़ा सवाल ये है कि अचानक ऐसा क्या बदल गया? क्यों सोने में लगातार गिरावट देखी जा रही है? क्यों सोना एक लाख रुपये के नीचे लुढ़क सकता है और ये चेतावनी क्यों दी जा रही है? आइए विस्तार से जानते हैं इन सभी सवालों के जवाब.
अचानक ऐसा क्या बदला कि सोना हो सकता है धड़ाम?
अगर सवाल यह है कि सोने में अचानक ऐसा क्या बदल गया? तो इसका जवाब दुनिया की राजनीति से जुड़ा है. एक बड़ी खबर सामने आई है कि रूस फिर से अमेरिकी डॉलर में व्यापार करने की दिशा में कदम बढ़ा सकता है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, रूस और अमेरिका के बीच आर्थिक साझेदारी की चर्चा चल रही है. अगर ऐसा होता है तो दुनिया की सबसे बड़ी आर्थिक रणनीतियों में से एक को झटका लग सकता है.
पिछले कुछ सालों से ब्रिक्स देश डॉलर पर निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहे थे. इसी वजह से उन्होंने बड़ी मात्रा में सोना खरीदा. सोना उनके लिए डॉलर का विकल्प बन रहा था. यही वजह थी कि पिछले दो सालों में सोने की कीमत तेजी से बढ़ी. लेकिन अगर रूस फिर डॉलर की तरफ लौटता है तो ये पूरी रणनीति कमजोर पड़ सकती है. साथ ही अगर सेंट्रल बैंक सोना खरीदना कम कर देते हैं तो सोने की सबसे बड़ी ताकत ही खत्म हो जाएगी.
सोना क्यों अचानक होने लगा था महंगा?
पिछले कुछ सालों में सोने की तेजी का सबसे बड़ा कारण सेंट्रल बैंकों की खरीदारी थी. ब्रिक्स देशों ने दुनिया में सबसे ज्यादा सोना खरीदा गया. चीन और रूस ने उत्पादन बढ़ाया, निर्यात कम किया और भंडार बढ़ाते रहे यानी मांग ज्यादा सप्लाई कम और कीमतें आसमान पर. लेकिन अब हालात बदलते दिख रहे हैं.
1 लाख से नीचे जाएगा सोना?
कहा जा रहा है कि अमेरिका की महंगाई बढ़ने से ब्याज दरें जल्दी कम होने की उम्मीद घट गई है. जब ब्याज दरें ऊंची रहती हैं तो निवेशक सोने की जगह सरकारी बॉन्ड खरीदना पसंद करते हैं. इतिहास गवाह है 2008 के आर्थिक संकट के दौरान भी लंबी अवधि के सरकारी बॉन्ड सुरक्षित निवेश माने गए थे और अब वही ट्रेंड वापस आ सकता है यानी सोने की जगह बॉन्ड. अगर ऐसा हुआ तो सोने की मांग और कमजोर हो सकती है.
कुछ विशेषज्ञ तो यह भी कह रहे हैं कि सोना अपने शिखर पर पहुंच चुका है अब आगे जो भी उछाल आएगा वह सिर्फ थोड़े समय का हो सकता है. फिर कीमत धीरे धीरे नीचे फिसल सकती है. अनुमान यह भी लगाया जा रहा है कि आने वाले कुछ सालों में भारत में सोना 90 हजार रुपये से 1 लाख रुपये के बीच स्थिर हो सकता है. लेकिन यह गिरावट एकदम से नहीं होगी. धीरे धीरे उतार चढ़ाव के साथ, यानी कभी हल्की तेजी फिर गिरावट बार बार.
क्या खत्म हो जाएगी सोने की रैली?
अब निवेशकों के लिए सबसे अहम सवाल यही है कि क्या सोने की सुनहरी दौड़ खत्म हो रही है या यह सिर्फ एक ठहराव है. तो फिलहाल बाजार दो चीजों पर नजर रखे हुए है.पहला क्या रूस सच में डॉलर की तरफ लौटेगा और दूसरा क्या सेंट्रल बैंक सोना खरीदना कम करेंगे. अगर इन दोनों का जवाब हां में आया तो सोने की चमक फीकी पड़ सकती है और अगर ऐसा हुआ
तो यह सिर्फ कीमत की गिरावट नहीं होगी. यह निवेश की पूरी सोच बदल सकती है.
क्योंकि जब दुनिया का सबसे भरोसेमंद सुरक्षित निवेश खुद अस्थिर दिखने लगे तो डर स्वाभाविक है और यही डर इस समय बाजार में दिखाई दे रहा है. अब देखना ये है कि सोना फिर चमकेगा या सच में एक नए दौर की शुरुआत होने वाली है फिलहाल संकेत साफ हैं. सोने की कहानी में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा और यही बात निवेशकों को सबसे ज्यादा डराने वाली है.
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