Gold Price : सोने में 37 फीसदी गिरावट का खतरा, WGC की बड़ी चेतावनी, जानिए पूरा मामला

सौरभ दीक्षित

• 04:52 PM • 06 Aug 2026

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल ने सोने पर बड़ी चेतावनी दी है. 3857 डॉलर के नीचे फिसलने पर भाव 3500 डॉलर तक जा सकता है. जानिए बाजार पर दबाव, फेड के असर और सहारे के संकेत.

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न्यूज़ हाइलाइट्स

6 अगस्त को एमसीएक्स पर सोना 1,49,334 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा

रिपोर्ट के समय वैश्विक बाजार में सोना 4,063.80 डॉलर प्रति औंस था

पिछले सप्ताह कीमत 1 फीसदी गिरी, इस साल 7.8 फीसदी टूटा

अगर आपके घर में सोना रखा है या आप सोने में निवेश करते हैं, तो यह खबर आपके लिए अहम है. वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की एक नई रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर सोना एक अहम स्तर के नीचे जाता है, तो इसमें 37 फीसदी तक की गिरावट आ सकती है.

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फिलहाल तस्वीर पूरी तरह एकतरफा नहीं है. रिपोर्ट में गिरावट का जोखिम भी बताया गया है और ऐसे कारण भी गिनाए गए हैं जो सोने को सहारा दे सकते हैं. इसी वजह से आने वाले कुछ हफ्ते सोने के लिए बहुत अहम माने जा रहे हैं.

आज सोने का भाव क्या रहा

- 6 अगस्त को एमसीएक्स पर 5 अक्टूबर 2026 डिलीवरी वाला सोना दोपहर करीब 1.30 बजे 841 रुपये की तेजी के साथ 1,49,334 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था.

रिपोर्ट में क्या कहा गया है

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के अनुसार, अगर सोने की कीमत 3,857 डॉलर प्रति औंस के नीचे जाती है, तो अगला बड़ा सहारा 3,500 डॉलर प्रति औंस के आसपास दिखता है. रिपोर्ट के मुताबिक, अगर भाव इस स्तर तक पहुंचता है, तो जनवरी में बने ऊंचे स्तर से सोना करीब 37 फीसदी नीचे आ चुका होगा.

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पहले भी जब सोने में बड़ी गिरावट आई, तो गिरावट का दायरा करीब ऐसा ही रहा. यानी 3,500 डॉलर के आसपास का स्तर कमजोर पड़ते बाजार में दबाव का संकेत भी हो सकता है और आगे चलकर सहारे का स्तर भी बन सकता है.

अभी बाजार की स्थिति कैसी है

रिपोर्ट लिखे जाने के समय सोना करीब 4,063.80 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था. लंदन बुलियन मार्केट एसोसिएशन के आंकड़ों के अनुसार, पिछले सप्ताह सोने की कीमत करीब 1 फीसदी गिरी थी. इस साल की शुरुआत से अब तक सोना करीब 7.8 फीसदी कमजोर हो चुका है.

सोने पर दबाव क्यों है

रिपोर्ट के अनुसार, सोने पर दबाव की सबसे बड़ी वजह अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति है. फेड ने हाल में ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया, लेकिन बाजार को ऐसे संकेत मिले कि जरूरत पड़ने पर वह आगे सख्त रुख अपना सकता है.

आम तौर पर जब ब्याज दरें ऊंची रहती हैं, तो निवेशकों का रुझान बॉन्ड और डॉलर जैसी जगहों की तरफ बढ़ता है. ऐसे में सोने की मांग कमजोर पड़ सकती है.

अमेरिका और ईरान के हालात का असर

सोने पर दबाव की दूसरी वजह अमेरिका और ईरान के बीच बदलते हालात को माना जा रहा है. पहले दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव से निवेशक सुरक्षित ठिकाने के तौर पर सोना खरीद रहे थे. अब बातचीत की संभावना बढ़ने से सुरक्षित निवेश की मांग कुछ कम हो सकती है.

मुख्य कहानी के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नए दौर की बातचीत का ऐलान किया है. अगर तनाव और कम होता है, तो इसका असर सोने की कीमतों पर पड़ सकता है.

कौन से कारण सोने को सहारा दे सकते हैं

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के मुताबिक, जापानी येन सोने के लिए सहारा बन सकता है. हाल में अमेरिका और जापान ने करेंसी बाजार में दखल दिया, जिसके बाद जापानी येन मजबूत हुआ.

रिपोर्ट कहती है कि अगर येन मजबूत रहता है और अमेरिकी डॉलर कमजोर होता है, तो सोने को सहारा मिल सकता है. यानी गिरावट की रफ्तार कुछ हद तक थम सकती है.

बड़े निवेशकों का रुख क्या है

रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले कुछ समय से गोल्ड ईटीएफ में निवेश की रफ्तार धीमी हुई है. कोमेक्स में लंबी खरीदारी वाली पोजिशन भी कम हुई है. इससे यह संकेत मिलता है कि बड़े निवेशक फिलहाल सावधानी बरत रहे हैं.

साथ ही, ऑप्शन बाजार में कुछ निवेशकों ने अपनी मंदी वाली पोजिशन भी कम की है. रिपोर्ट के मुताबिक, इसकी एक वजह कॉन्ट्रैक्ट एक्सपायरी भी रही.

अब किन आंकड़ों पर रहेगी नजर

आने वाले दिनों में अमेरिका के कई बड़े आर्थिक आंकड़े बाजार की दिशा तय कर सकते हैं. इनमें मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई, सर्विसेज पीएमआई और नॉन फार्म पेरोल रिपोर्ट शामिल हैं.

- अगर अमेरिकी अर्थव्यवस्था मजबूत दिखती है, तो फेड आगे और सख्त रुख अपना सकता है, जिससे सोने पर दबाव बढ़ सकता है.

- अगर रोजगार के आंकड़े कमजोर आते हैं, तो सोने को राहत मिल सकती है.

निष्कर्ष

कुल मिलाकर, वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की रिपोर्ट निवेशकों के लिए साफ संकेत देती है कि 3,857 डॉलर प्रति औंस का स्तर बहुत अहम है. इसके नीचे जाने पर 3,500 डॉलर तक गिरावट की आशंका बताई गई है, जो जनवरी के ऊंचे स्तर से करीब 37 फीसदी नीचे होगा. दूसरी तरफ कमजोर डॉलर, मजबूत जापानी येन और वैश्विक अनिश्चितता जैसे कारण सोने को सहारा भी दे सकते हैं. इसलिए अभी सोने का बाजार एक निर्णायक मोड़ पर है.