अगर आपके घर में रखा सोना महंगा हो जाए, तो क्या उससे भारत की GDP भी बढ़ सकती है? सुनने में थोड़ा अजीब लगता है. लेकिन Brokerage Firm Jefferies का मानना है कि Gold की बढ़ती कीमतें आने वाले समय में भारत की Economy के लिए एक तरह का Hidden Boost बन सकती हैं. खास बात ये है कि इसका असर सिर्फ सोने की कीमत तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि Gold Loans, Consumption और Stock Market तक पहुंच सकता है.
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Jefferies के मुताबिक, अगले दो साल में Gold की बढ़ती कीमत और इसके बदले लिए जाने वाले Loans में तेजी से भारत की GDP को 80 से 100 बेसिस पॉइंट यानी करीब 0.8 से 1 फीसदी तक का अतिरिक्त फायदा मिल सकता है.
लेकिन सवाल ये है कि आखिर तिजोरी में रखा सोना GDP बढ़ाने का काम कैसे करेगा?
भारत के घरों में रखा है ₹330 लाख करोड़ का Gold
Jefferies के मुताबिक, भारतीय परिवारों के पास करीब 25,000 टन Gold है. मार्च 2026 तक इसकी अनुमानित Value करीब 3.9 ट्रिलियन डॉलर यानी लगभग ₹330 लाख करोड़ थी.
और सबसे दिलचस्प बात ये है कि पिछले दो साल में ही इस Gold Wealth की Value करीब 1.9 ट्रिलियन डॉलर बढ़ी है.
यानी परिवारों ने नया Gold खरीदा हो या नहीं, कीमत बढ़ने से उनकी कुल Wealth में बड़ा इजाफा हुआ.
Jefferies के आंकड़ों के मुताबिक.
- भारतीय परिवारों के पास Gold की Value करीब $3.9 ट्रिलियन.
- यह Household Equity Holdings की Value से करीब 4 गुना है.
- मार्च 2026 तक Household Assets में Gold की हिस्सेदारी करीब 24.2 फीसदी हो गई.
- मार्च 2023 में यह हिस्सेदारी करीब 15.4 फीसदी थी.
असली खेल Gold Loan का है
अब यहां से कहानी और दिलचस्प हो जाती है.
मान लीजिए आपके घर में ₹10 लाख का Gold रखा है. Gold की कीमत बढ़ने के बाद उसकी Value ₹12 लाख हो गई. आपने कुछ नहीं किया, लेकिन आपकी Wealth ₹2 लाख बढ़ गई.
अब इसी Gold को गिरवी रखकर अगर आप Loan लेते हैं, तो घर में पड़ी Wealth Economy में घूमने लगती है.
इस पैसे से कोई कारोबार शुरू कर सकता है, खेती में खर्च कर सकता है, घर की जरूरत पूरी कर सकता है या कोई सामान खरीद सकता है.
यानी पूरी Chain कुछ ऐसी है.
Gold की कीमत बढ़ी → Household Wealth बढ़ी → Gold Loan मिला → पैसा Economy में आया → Consumption बढ़ा → GDP को फायदा.
लेकिन अभी ज्यादातर Gold तिजोरी में ही है
Jefferies का अनुमान है कि भारतीय परिवारों के पास मौजूद कुल Gold का सिर्फ करीब 15 फीसदी हिस्सा ही Formal या Informal Lending के जरिए Monetise हो रहा है.
यानी बड़ा हिस्सा अभी भी इस्तेमाल में नहीं आया है.
ब्रोकरेज का अनुमान है कि अगर अगले दो साल में Gold Monetisation Ratio में 8 से 10 percentage points की बढ़ोतरी होती है, तो हर साल करीब $15-20 अरब के अतिरिक्त Gold Loans आ सकते हैं.
और यहीं से Stock Market का कनेक्शन बनता है.
Jefferies ने इन 4 Stocks पर लगाया दांव
Gold Loan और बढ़ती Household Wealth की इस कहानी पर Jefferies ने अपनी India Model Portfolio में चार Stocks जोड़े हैं.
- Manappuram Finance - Gold Monetisation का Preferred Play.
- Hindustan Zinc - Gold के साथ Silver में तेजी का फायदा लेने के लिए.
- Meesho - Mass Consumption और Discretionary Spending के लिए.
- Navin Fluorine - Gold से सीधा संबंध नहीं, लेकिन CDMO, Cooling Products और Specialty Chemicals में Growth के चलते.
Jefferies को Navin Fluorine के FY26 से FY29 के बीच करीब 23 फीसदी सालाना EPS Growth की उम्मीद है.
वहीं Portfolio में जगह बनाने के लिए Ambuja Cements को बाहर किया गया, जबकि Jindal Stainless और Bajaj Finance में Exposure घटाया गया.
हालांकि इसका मतलब ये नहीं है कि Jefferies इन Stocks पर Bearish हो गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, ये Portfolio Construction का फैसला है.
इन Gold Stocks को Portfolio में जगह नहीं मिली, फिर भी Jefferies की नजर में हैं
Jefferies ने कुछ और कंपनियों को भी Gold Rally के संभावित Beneficiaries के तौर पर Highlight किया है, हालांकि इन्हें Model Portfolio में शामिल नहीं किया गया.
इनमें शामिल हैं.
- Titan
- Kalyan Jewellers
- MCX
- IIFL Finance
- Muthoot Finance
यानी Gold की कहानी सिर्फ Gold Loan Companies तक सीमित नहीं है. अगर बढ़ी हुई Wealth Loan और फिर Consumption में बदलती है, तो इसका असर अलग-अलग सेक्टर्स की कंपनियों पर पड़ सकता है.
Gold 10 फीसदी और चढ़ा तो क्या होगा?
Jefferies के मुताबिक, अगर Gold की कीमत यहां से 10 फीसदी और बढ़ती है, तो भारतीय परिवारों की Wealth में करीब $400 अरब का इजाफा हो सकता है.
इसके साथ करीब $20-25 अरब के अतिरिक्त Gold Loans भी बन सकते हैं.
यही वजह है कि Jefferies को GDP और Consumer Spending में 80-100 BPS का अतिरिक्त Tailwind दिखाई दे रहा है.
लेकिन Gold Rally का दूसरा पहलू भी है
Gold महंगा होने का फायदा सिर्फ Household Wealth को नहीं मिलता. भारत के लिए इसका एक नुकसान भी है.
Gold की कीमत बढ़ने से Import Bill पर दबाव बढ़ सकता है.
- Gold Imports FY23 में करीब $36 अरब थे.
- FY26 में ये बढ़कर करीब $79 अरब हो गए.
- यानी तीन साल में Import Bill दोगुने से भी ज्यादा हो गया.
- Gold Imports भारत के कुल Imports का करीब 10 फीसदी हैं.
- इसका Value भारत की GDP के करीब 2 फीसदी के बराबर है.
यानी Gold एक तरफ Wealth, Loans और Consumption को Boost कर सकता है, तो दूसरी तरफ ज्यादा Import की वजह से Current Account पर दबाव भी बढ़ा सकता है.
Bottom Line
Jefferies की पूरी कहानी को आसान भाषा में समझें तो मामला सिर्फ सोने की कीमत बढ़ने का नहीं है. असली दांव इस बात पर है कि घरों में बढ़ी Gold Wealth का कितना हिस्सा Loan के जरिए Economy में आएगा.
Gold महंगा हुआ → Wealth बढ़ी → Gold Loan बढ़ा → पैसा बाजार में आया → Consumption बढ़ी → GDP को फायदा.
और इसी Chain की वजह से Manappuram Finance से लेकर Meesho और Hindustan Zinc तक कुछ Stocks Jefferies की नजर में आ गए हैं.
हालांकि एक बड़ा सवाल अभी भी बना हुआ है. अगर Gold की Rally आगे जारी रहती है, तो इस पूरी कहानी का सबसे बड़ा फायदा आखिर किसे मिलेगा - Gold Loan Companies, Consumers या Stock Market?
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