अगर आपने गोल्ड या सिल्वर ईटीएफ में पैसा लगाया है तो शुक्रवार यानी 13 फरवरी का दिन आपके लिए काफी झटका देने वाला रहा होगा. क्योंकि एक ही दिन में सोना और चांदी के कई ईटीएफ बुरी तरह गिर गए हैं. कुछ सिल्वर ईटीएफ तो करीब 10% तक टूट गए और गोल्ड ईटीएफ में भी 4-6% तक गिरावट देखी गई. इस गिरावट से निवेशकों में हड़कंप मचा हुआ है क्योंकि उन्हें एक बड़ा झटका लगा है. अब सवाल उठता है आखिर अचानक ऐसा क्यों हुआ? इसके पीछे क्या कारण है और जानकारों का क्या कहना है. आइए विस्तार से जानते है इस सारे सवालों के जवाब.
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क्यों आई ये गिरावट?
जानकारों की मानें तो इस गिरावट की जड़ अमेरिका से जुड़ी है. जनवरी महीने के जॉब्स के आंकड़े उम्मीद से ज्यादा मजबूत आए यानी अमेरिकी अर्थव्यवस्था अभी भी मजबूत दिख रही है. इसका सीधा मतलब यह निकला कि अमेरिका में ब्याज दरों में जल्दी कटौती होने की उम्मीद कम हो गई. और जैसे ही यह खबर आई अमेरिकी डॉलर मजबूत हो गया. जब डॉलर मजबूत होता है तो सोना और चांदी जैसे धातु महंगे हो जाते हैं खासतौर पर उन निवेशकों के लिए जो डॉलर में निवेश नहीं करते इससे इन धातुओं की मांग कम हो सकती है और कीमतों पर दबाव आता है. यही वजह रही कि ETF की कीमतों में तेज गिरावट देखी गई.
भारत के बाजार का हाल
आइए अब भारत के बाजार को समझते है. कोटक सिल्वर ईटीएफ करीब 10 प्रतिशत टूटकर दिन के निचले स्तर पर पहुंच गया. एडेलवाइस सिल्वर ईटीएफ, एसबीआई सिल्वर ईटीएफ और जेरोधा सिल्वर ईटीएफ इनमें भी करीब 9 फीसदी तक गिरावट आई. वहीं गोल्ड फंड्स भी पीछे नहीं रहे, टाटा गोल्ड ईटीएफ में सबसे ज्यादा करीब 6 प्रतिशत की गिरावट रही जबकि एसबीआई और निप्पॉन इंडिया गोल्ड ईटीएफ करीब 4 प्रतिशत गिरे.
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में बाद में थोड़ी रिकवरी भी दिखी. गिरावट के बाद कुछ निवेशकों ने सस्ते दाम पर खरीदारी शुरू की जिससे सोना और चांदी की कीमतों में हल्की वापसी आई. सोना करीब एक प्रतिशत चढ़ा और चांदी दो प्रतिशत से ज्यादा ऊपर गई लेकिन बाजार अभी भी काफी अस्थिर है.
निवेशक क्या करें?
अब बड़ा सवाल निवेशकों को क्या करना चाहिए? तो विशेषज्ञों का कहना है इस समय घबराने की जरूरत नहीं है. अगर आप लंबी अवधि के निवेशक हैं तो नियमित निवेश यानी एसआईपी सबसे अच्छा तरीका हो सकता है, खासतौर पर चांदी में क्योंकि इसमें उतार चढ़ाव ज्यादा होता है.
अगर आप हर महीने थोड़ी तय रकम निवेश करते हैं तो एक ही समय पर बड़ी रकम लगाने का जोखिम कम हो जाता है. धीरे-धीरे आप सोना और चांदी को अपने पोर्टफोलियो का एक सुरक्षा कवच बना सकते हैं. विशेषज्ञों का मानना है कुल निवेश का करीब 10 से 15 प्रतिशत हिस्सा गोल्ड और सिल्वर जैसे सुरक्षित एसेट में रखना समझदारी हो सकती है. लेकिन कुछ एक्सपर्ट्स यह भी कह रहे हैं कि फिलहाल नए निवेश से थोड़ा सावधान रहें. क्योंकि बाजार में कई वैश्विक कारणों से उतार चढ़ाव बढ़ा हुआ है.
कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि सोना और चांदी अभी भी अपने महत्वपूर्ण सपोर्ट स्तर के आसपास टिके हुए हैं, अगर ये स्तर टूटते हैं तो गिरावट और बढ़ सकती है. इसलिए जल्दबाजी में नया निवेश करने से बचने की सलाह दी जा रही है. कुल मिलाकर डॉलर मजबूत हुआ है और इससे सोना चांदी दबाव में आए है, ईटीएफ गिर गए, लेकिन लंबी अवधि की तस्वीर अभी भी पूरी तरह खराब नहीं मानी जा रही है. बस बाजार में उतार चढ़ाव ज्यादा है इसलिए घबराहट में फैसला नहीं सोच समझकर रणनीति बनाना जरूरी है. अब देखना ये है कि क्या ये गिरावट सिर्फ एक झटका है या आगे और बड़े उतार चढ़ाव आने वाले हैं.
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