सोना और चांदी दोनों ही इस समय निवेशकों के रडार पर हैं. हालिया तेजी के बाद दोनों Precious Metals पर Analysts का Medium to Long Term Outlook सकारात्मक बना हुआ है. हालांकि, तेजी के बावजूद निवेशकों को सावधानी बरतने की जरूरत है, क्योंकि आगे कीमतों में Volatility और Consolidation देखने को मिल सकता है.
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पिछले हफ्ते MCX पर Gold Futures करीब 2% चढ़ा, जबकि Silver में लगभग 1.6% की तेजी रही. International Market में भी Gold करीब 1% और Silver करीब 2.5% मजबूत हुआ. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल है कि क्या अब भी Gold और Silver में निवेश का मौका है? और अगर दोनों में निवेश करना हो तो कितना पैसा किसमें लगाया जाए?
Tata MF का Gold-Silver फॉर्मूला क्या है?
Tata Mutual Fund की अगस्त 2026 की रिपोर्ट दोनों Metals को लेकर लंबी अवधि में सकारात्मक है. लेकिन Fund House का मानना है कि Portfolio में Gold और Silver की भूमिका एक जैसी नहीं होनी चाहिए.
इसीलिए Tata MF ने Precious Metals Allocation के लिए 70:30 का Framework सुझाया है.
- Gold: 70% Allocation
- Silver: 30% Allocation
यानी अगर Precious Metals में ₹1 लाख निवेश करने हैं, तो करीब ₹70,000 Gold और ₹30,000 Silver में लगाए जा सकते हैं.
लेकिन सवाल है कि Gold को ज्यादा Weightage क्यों दिया गया है?
Gold को क्यों मिली ज्यादा हिस्सेदारी?
Gold को आमतौर पर एक Defensive Asset माना जाता है. जब Economy को लेकर uncertainty बढ़ती है, Geopolitical Tensions बढ़ती हैं या Financial Markets में Risk बढ़ता है, तब Gold Portfolio में Stability और Diversification देने में मदद कर सकता है. इसके अलावा Central Banks की खरीदारी भी Gold के लिए बड़ा Support बनी हुई है.
Tata MF के मुताबिक, 2026 की दूसरी तिमाही में Central Banks ने 289 टन Gold खरीदा, जो किसी भी दूसरी तिमाही के लिए रिकॉर्ड खरीदारी है. यानी Gold की Demand सिर्फ Retail Investors पर निर्भर नहीं है. दुनियाभर के Central Banks भी अपने Reserves में Gold की हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं.
Silver में ज्यादा Risk, लेकिन Opportunity भी
Silver को सिर्फ Gold का सस्ता विकल्प समझना सही नहीं होगा. Investment के लिहाज से दोनों काफी अलग हैं.
Silver का इस्तेमाल Electronics, Solar Panels, Renewable Energy, AI Hardware और दूसरी Industrial Applications में होता है. इसलिए Global Economy और Industrial Activity मजबूत रहती है, तो Silver की Demand को फायदा मिल सकता है.
लेकिन यही Silver का सबसे बड़ा Risk भी है.
- Global Growth कमजोर हुई तो दबाव बढ़ सकता है.
- Industrial Demand घटी तो Silver प्रभावित हो सकता है.
- Solar और Electronics जैसी Industries में कमजोरी का असर भी पड़ सकता है.
यही वजह है कि Silver में Return Potential के साथ Volatility भी Gold के मुकाबले ज्यादा हो सकती है.
Gold-Silver Ratio क्या संकेत दे रहा है?
Tata MF की रिपोर्ट में Gold-Silver Ratio का भी जिक्र है. यह बताता है कि एक Ounce Gold खरीदने के लिए कितनी Ounce Silver की जरूरत है. रिपोर्ट के मुताबिक यह Ratio मई में करीब 51 से बढ़कर 70 हो गया. इसका मतलब है कि इस अवधि में Gold ने Silver से बेहतर प्रदर्शन किया और Investors ने Gold को ज्यादा Defensive Asset के तौर पर प्राथमिकता दी.
इसलिए सिर्फ यह सोचकर Silver खरीदना कि वह Gold के मुकाबले सस्ती है, सही रणनीति नहीं हो सकती.
Gold के लिए Geopolitics और Interest Rates क्यों अहम?
हालिया तेजी में Gold को Geopolitical Tensions से भी Support मिला है. US-Iran Conflict और Middle East की स्थिति ने Safe-Haven Demand को बढ़ाया. वहीं, US-Iran बातचीत से तनाव कम होने की उम्मीद थी. लेकिन 60 दिन की तय अवधि खत्म होने के बाद भी कोई ठोस Peace Deal सामने नहीं आई. इसके बजाय Donald Trump का Iran को लेकर सख्त रुख और Strait of Hormuz को लेकर तनाव ने Uncertainty बनाए रखी.
मंगलवार को Gold करीब $4,400 प्रति Ounce के आसपास मजबूत बना रहा, हालांकि बाद में Profit Booking भी देखने को मिली.
इसके अलावा Gold के लिए तीन बड़े Short-Term Risks हैं:
- US Dollar मजबूत होना.
- US Bond Yields बढ़ना.
- Federal Reserve का ज्यादा Hawkish रुख.
निवेशकों के लिए Tata MF का संदेश
Tata MF का Long Term Outlook Gold और Silver दोनों पर Positive है. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हालिया Rally देखकर पूरी रकम एक साथ निवेश कर दी जाए. Fund House का जोर Staggered Investment पर है. यानी अलग-अलग समय पर धीरे-धीरे निवेश करना.
इस रणनीति का फायदा यह है कि अगर आगे कीमतों में Correction आता है, तो निवेशकों के पास निचले स्तरों पर अपनी खरीद बढ़ाने का मौका रहेगा.
निष्कर्ष यही है कि Gold Portfolio में Stability और Defence दे सकता है, जबकि Silver ज्यादा Industrial Exposure और संभावित Return के साथ ज्यादा Volatility भी लेकर आता है. इसलिए Tata MF का 70:30 Framework निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत जरूर देता है, लेकिन अंतिम Allocation हर निवेशक के Risk Profile, Investment Horizon और मौजूदा Portfolio पर निर्भर करेगा.
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