Gold-Silver Outlook: सोने में पड़ेगा पंगा, आ गई सबसे बड़ी आफत ?

चिराग ठाकुर

• 03:05 PM • 12 Jul 2026

पिछले हफ्ते सोना और चांदी में तेज गिरावट आई, लेकिन अब नजर अमेरिका-ईरान तनाव, फेड की ब्याज दरों और महंगाई के आंकड़ों पर है, जो अगली चाल तय करेंगे.

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न्यूज़ हाइलाइट्स

पिछले हफ्ते एमसीएक्स पर अगस्त सोना 3655 रुपये प्रति 10 ग्राम टूटा

सितंबर चांदी में करीब 13800 रुपये प्रति किलो की तेज गिरावट आई

मजबूत डॉलर और बॉन्ड यील्ड ने सुरक्षित मांग का असर घटाया

पिछले हफ्ते सोने और चांदी के निवेशकों के लिए बाजार आसान नहीं रहा. दोनों की कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिली. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह गिरावट अब खत्म होने वाली है या अगले हफ्ते भी बुलियन मार्केट दबाव में रहेगा. दूसरी तरफ अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ता तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और ब्याज दरों को लेकर बढ़ती चिंताओं ने निवेशकों की उलझन और बढ़ा दी है. ऐसे में अगर आप सोना खरीदने की योजना बना रहे हैं या पहले से निवेश कर चुके हैं, तो आने वाला हफ्ता कई बड़े संकेत दे सकता है.

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पिछले हफ्ते गोल्ड और सिल्वर में कितनी गिरावट आई?

पिछले कारोबारी सप्ताह में MCX पर अगस्त डिलीवरी वाला सोना करीब 2.48% टूट गया. इसकी कीमत में लगभग 3,655 रुपये प्रति 10 ग्राम की गिरावट दर्ज की गई और यह करीब 1,43,480 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ. वहीं सितंबर डिलीवरी वाली चांदी में इससे भी बड़ी कमजोरी देखने को मिली. सिल्वर करीब 5.8% यानी लगभग 13,800 रुपये प्रति किलोग्राम टूटकर करीब 2,22,680 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई. यानी पूरे सप्ताह बुलियन मार्केट में बिकवाली का दबाव साफ दिखाई दिया.

पश्चिम एशिया में तनाव के बावजूद सोना क्यों गिरा?

आमतौर पर जब दुनिया में युद्ध या भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता है, तब निवेशक सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने का रुख करते हैं. लेकिन इस बार बाजार की तस्वीर थोड़ी अलग नजर आई. अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के साथ-साथ कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और अमेरिका में ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रहने की आशंका भी बढ़ी है.अगर महंगाई बढ़ती है, तो अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनाए रख सकता है. ऊंची ब्याज दरें आमतौर पर सोने जैसी बिना ब्याज वाली संपत्तियों पर दबाव बनाती हैं. यही वजह रही कि भू-राजनीतिक तनाव होने के बावजूद सोने को मजबूत समर्थन नहीं मिल सका.

गोल्ड की तेजी पर डॉलर और बॉन्ड यील्ड लगा सकते हैं ब्रेक

कमोडिटी एक्सपर्ट्स का मानना है कि फिलहाल सोना और चांदी मजबूत तेजी के ट्रेंड में नहीं हैं. अगर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ता है तो कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आ सकता है. लेकिन इसके साथ अमेरिकी डॉलर और ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड भी मजबूत हो सकती हैं. मजबूत डॉलर और ऊंची बॉन्ड यील्ड अक्सर सोने की कीमतों को सीमित करती हैं. यानी युद्ध से मिलने वाला सपोर्ट और डॉलर से बनने वाला दबाव, दोनों के बीच फिलहाल बाजार संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है.

अगले हफ्ते किन आर्थिक आंकड़ों पर रहेगी नजर?

आने वाले सप्ताह में सिर्फ भू-राजनीतिक घटनाक्रम ही नहीं, बल्कि कई महत्वपूर्ण आर्थिक आंकड़े भी बाजार की दिशा तय करेंगे. अमेरिका से रिटेल सेल्स, हाउसिंग डेटा, वीकली जॉबलेस क्लेम्स और महंगाई से जुड़े आंकड़े जारी होंगे. इनके आधार पर यह संकेत मिल सकता है कि अमेरिकी फेड आगे ब्याज दरों को लेकर क्या रुख अपनाता है. इसके अलावा भारत और यूरोप के महंगाई के आंकड़ों पर भी निवेशकों की नजर रहेगी. अगर इन आंकड़ों से महंगाई ऊंची रहने के संकेत मिलते हैं, तो ब्याज दरों को लेकर चिंता बढ़ सकती है और इसका असर बुलियन बाजार पर भी दिखाई दे सकता है.

चीन के आंकड़े भी तय करेंगे बाजार की चाल

अगले हफ्ते चीन से भी कई अहम आर्थिक आंकड़े जारी होने वाले हैं. इनमें GDP ग्रोथ, इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन, ट्रेड डेटा, बैंक लेंडिंग और फिक्स्ड एसेट इन्वेस्टमेंट जैसे आंकड़े शामिल हैं. इनसे यह अंदाजा लगेगा कि दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था कितनी मजबूत बनी हुई है. अगर चीन के आंकड़े उम्मीद से बेहतर आते हैं, तो इंडस्ट्रियल मेटल्स में तेजी देखने को मिल सकती है.

क्या अभी सोना खरीदना सही रहेगा?

विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल बुलियन मार्केट में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है. हर छोटी तेजी पर मुनाफावसूली देखने को मिल रही है. इसका मतलब यह है कि निवेशकों का भरोसा अभी पूरी तरह मजबूत नहीं हुआ है. जब तक अमेरिका-ईरान तनाव या ब्याज दरों के मोर्चे पर कोई बड़ा बदलाव नहीं आता, तब तक सोना और चांदी किसी एक दिशा में मजबूत ट्रेंड बनाते नहीं दिख रहे हैं. ऐसे में जल्दबाजी में बड़ा निवेश करने के बजाय बाजार के प्रमुख ट्रिगर्स पर नजर बनाए रखना ज्यादा समझदारी हो सकती है.

अगले हफ्ते गोल्ड-सिल्वर आउटलुक

आने वाले सप्ताह में बुलियन मार्केट की दिशा तीन बड़े फैक्टर्स तय करेंगे. पहला, अमेरिका-ईरान के बीच भू-राजनीतिक तनाव. दूसरा, अमेरिकी फेड की ब्याज दरों को लेकर उम्मीदें. और तीसरा, भारत, अमेरिका और यूरोप से आने वाले महंगाई के आंकड़े.अगर तनाव बढ़ता है तो सोने को सपोर्ट मिल सकता है, लेकिन मजबूत डॉलर और ऊंची बॉन्ड यील्ड उसकी तेजी को सीमित कर सकती हैं. ऐसे में अगले हफ्ते भी सोना और चांदी दोनों में उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना है.फिलहाल बुलियन मार्केट की कहानी सिर्फ सोने और चांदी की नहीं, बल्कि युद्ध, ब्याज दरों और महंगाई के बीच बन रहे संतुलन की है. निवेशकों के लिए यही तीन फैक्टर्स आने वाले दिनों में सबसे अहम साबित हो सकते हैं.