Gold Price : सोने, चांदी से सरकारी खजाने में हुई दौलत की बरसात, हिल गया पूरी दुनिया का सिस्टम!

सौरभ दीक्षित

• 01:11 PM • 11 Aug 2026

13 मई से 2 अगस्त के बीच सोना, चांदी और प्लैटिनम आयात ड्यूटी से सरकार को 10463 करोड़ रुपये मिले. जानें शुल्क बढ़ाने की वजह, विदेशी मुद्रा बचत और इसका सीधा असर.

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न्यूज़ हाइलाइट्स

लोकसभा में राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लिखित जवाब में आंकड़े दिए

चांदी से 328 करोड़ और प्लैटिनम से 95 करोड़ रुपये जुटे

सोने पर मिली ड्यूटी का हिस्सा बाकी दोनों धातुओं से बड़ा रहा

सोना और चांदी खरीदने वालों से जुड़ी एक अहम खबर सामने आई है. लोकसभा में दी गई जानकारी के मुताबिक, 13 मई से 2 अगस्त के बीच सरकार ने सोना, चांदी और प्लैटिनम के आयात पर कस्टम ड्यूटी से 10,463 करोड़ रुपये जुटाए.

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इस रकम का सबसे बड़ा हिस्सा सोने से आया. सरकार ने पहले इन धातुओं पर आयात शुल्क बढ़ाया था. इसके बाद कम समय में सरकारी खजाने में बड़ी रकम आई. सरकार का कहना है कि इस फैसले का मकसद सिर्फ कमाई नहीं, बल्कि विदेशी मुद्रा को जरूरी आयात के लिए बचाना भी था.

कहां से कितना पैसा आया

वित्त मंत्रालय में राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में लिखित जवाब में बताया कि 13 मई से 2 अगस्त के बीच सोने पर 10,040 करोड़ रुपये की कस्टम ड्यूटी मिली.

- सोने से 10,040 करोड़ रुपये मिले.

- चांदी से 328 करोड़ रुपये मिले.

- प्लैटिनम से 95 करोड़ रुपये मिले.

- तीनों को मिलाकर कुल 10,463 करोड़ रुपये जुटाए गए.

यानी ढाई महीने से भी कम समय में इन तीन कीमती धातुओं के आयात से सरकार को 10 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का राजस्व मिला.

शुल्क में कितना बदलाव हुआ

सरकार ने 13 मई 2026 से सोने और चांदी पर इंपोर्ट ड्यूटी 6 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी कर दी थी. प्लैटिनम पर इंपोर्ट ड्यूटी 6.4 फीसदी से बढ़ाकर 15.4 फीसदी कर दी गई थी.

सरकार के मुताबिक, इस बदलाव के बाद सोना और चांदी आयात करने पर पहले के मुकाबले ज्यादा ड्यूटी मिलने लगी. सोने और चांदी से जुड़े कुछ दूसरे उत्पादों पर भी इसी हिसाब से बदलाव किए गए. इनमें गोल्ड डोर, सिल्वर डोर, कॉइन्स और फाइंडिंग्स जैसी चीजें शामिल हैं.

सरकार ने यह फैसला क्यों लिया

सरकार के मुताबिक, इस फैसले की सबसे बड़ी वजह विदेशी मुद्रा को बचाना था. भारत, चीन के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोना उपभोक्ता है. देश में सोने की बड़ी मांग ज्वैलरी कारोबार से आती है, जबकि इस्तेमाल होने वाले सोने का बड़ा हिस्सा आयात से आता है.

इसका सीधा मतलब है कि जितना ज्यादा सोना विदेश से आएगा, उतनी ज्यादा विदेशी मुद्रा खर्च होगी. सरकार चाहती थी कि दबाव के समय विदेशी मुद्रा का इस्तेमाल ज्यादा जरूरी आयात के लिए किया जाए.

किन चीजों को प्राथमिकता देना चाहती थी सरकार

सरकार ने साफ कहा था कि वह विदेशी मुद्रा को जरूरी आयात के लिए बचाना चाहती है. इनमें सबसे महत्वपूर्ण कच्चा तेल है. भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा विदेशों से पूरा करता है.

सरकार की सोच यह थी कि अगर विदेशी मुद्रा सीमित हो, तो उसे ऐसी चीजों पर खर्च किया जाए जो अर्थव्यवस्था के लिए ज्यादा जरूरी हैं. सोना, खासकर जब उसकी मांग गहनों और निवेश से जुड़ी हो, उस सूची में नीचे आता है.

पश्चिम एशिया के तनाव का असर

सरकार के फैसले के पीछे अंतरराष्ट्रीय हालात भी एक वजह बताए गए. पश्चिम एशिया में युद्ध और तनाव की वजह से कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ा. इसके साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य के असरदार तरीके से बंद होने की आशंका ने भी चिंता बढ़ाई.

यह रास्ता दुनिया के लिए बहुत अहम तेल मार्ग है. अगर यहां से तेल की सप्लाई प्रभावित होती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत बढ़ सकती है. भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए इसका मतलब ज्यादा डॉलर खर्च होना है.

तस्करी पर भी कार्रवाई

सरकार ने यह भी बताया कि 161 किलो तस्करी का सोना जब्त किया गया और 116 लोगों को गिरफ्तार किया गया.

आम लोगों के लिए इसका क्या मतलब है.

इस पूरे घटनाक्रम का सीधा मतलब यह है कि सरकार ने सोना, चांदी और प्लैटिनम पर आयात शुल्क बढ़ाया, जिससे राजस्व बढ़ा. साथ ही सरकार ने यह संकेत दिया कि वह विदेशी मुद्रा को कच्चे तेल, उर्वरक, औद्योगिक कच्चे माल और कैपिटल गुड्स जैसे जरूरी आयात के लिए बचाकर रखना चाहती है.

फिलहाल सबसे अहम बात यही है कि 13 मई से 2 अगस्त के बीच सरकार को इन तीन धातुओं से 10,463 करोड़ रुपये मिले. इसमें सबसे बड़ा हिस्सा सोने का रहा. आगे सोने की अंतरराष्ट्रीय कीमत, रुपये की चाल और भारत की आयात मांग के साथ सरकार की नीति कैसे बदलती है, इस पर नजर रहेगी.