सोने-चांदी के आयात पर 3% IGST की छूट खत्म, 1 अप्रैल 2026 से लागू हुआ नया नियम, जानिए पूरा मामला

सौरभ दीक्षित

• 05:41 PM • 09 Oct 2026

सरकार ने सोने, चांदी और प्लैटिनम के आयात पर बैंकों और नामित एजेंसियों को मिलने वाली 3 फीसदी IGST छूट आगे नहीं बढ़ाई है. 1 अप्रैल 2026 से संबंधित आयातकों को IGST देना होगा. जानिए सरकार ने यह फैसला क्यों लिया, सोने के आयात पर टैक्स व्यवस्था में क्या बदलाव हुआ और इसका घरेलू बाजार तथा ग्राहकों पर क्या असर पड़ सकता है.

NewsTak
Google CTA
▌

न्यूज़ हाइलाइट्स

सरकार ने 3 फीसदी इंटिग्रेटेड GST (IGST) की छूट आगे नहीं बढ़ाई है

ये छूट साल 2017 में सोने के आयात के लिए शुरू की गई थी

IGST छूट खत्म होने से सोने, चांदी और प्लैटिनम का आयात महंगा हो सकता है

फेस्टिव सीजन के बीच सोने और चांदी के बाजार से जुड़ी एक अहम खबर सामने आई है. सरकार ने सोने, चांदी और प्लैटिनम के आयात पर बैंकों और नामित एजेंसियों को मिलने वाली 3 फीसदी इंटिग्रेटेड GST (IGST) की छूट आगे नहीं बढ़ाई है. इसका मतलब है कि 1 अप्रैल 2026 से इन कीमती धातुओं का आयात करने वाले संबंधित बैंकों और नामित एजेंसियों को 3 फीसदी IGST देना होगा. रेवेन्यू सेक्रेटरी के मुताबिक, यह जानकारी दी. उन्होंने बताया कि सोने और अन्य कीमती धातुओं के आयात पर IGST से छूट पाने वाले नामित बैंकों और एजेंसियों की सूची को 31 मार्च 2026 के बाद आगे नहीं बढ़ाया गया है. सरकार का यह कदम बुलियन और अन्य माध्यमों से होने वाले आयात पर टैक्स व्यवस्था में समानता सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है.

Read more!

2017 में शुरू हुई थी टैक्स छूट की व्यवस्था

सोने, चांदी और प्लैटिनम के आयात पर सामान्य रूप से 3 फीसदी IGST लगता है. हालांकि, 1 अप्रैल 2026 से पहले सरकार की ओर से अधिसूचित कुछ बैंक और नामित एजेंसियां इस टैक्स से छूट के साथ इन कीमती धातुओं का आयात कर सकती थीं. यह छूट साल 2017 में सोने के आयात के लिए शुरू की गई थी. बाद में इसे चांदी और प्लैटिनम तक भी बढ़ा दिया गया. इसका उद्देश्य मंजूर कारोबारियों के माध्यम से बुलियन की सप्लाई को आसान बनाना था. लेकिन सरकार ने इस साल 1 अप्रैल को नामित बैंकों और एजेंसियों की सूची को आगे बढ़ाने के लिए अधिसूचित नहीं किया. इसके बाद संबंधित आयातकों के लिए IGST छूट जारी नहीं रही.

सोने के आयात पर क्यों बढ़ी सरकार की चिंता?

भारत, चीन के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोना उपभोक्ता है. देश में सोने की मांग का बड़ा हिस्सा आभूषण उद्योग से आता है. सोने और दूसरी कीमती धातुओं का आयात बढ़ने से देश का आयात बिल बढ़ता है और विदेशी मुद्रा की निकासी भी होती है. सरकार ने मई में सोने और चांदी पर आयात शुल्क 6 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी कर दिया था. वहीं, प्लैटिनम पर आयात शुल्क 6.4 फीसदी से बढ़ाकर 15.4 फीसदी किया गया था. इस कदम का उद्देश्य कीमती धातुओं के गैर-जरूरी आयात पर अंकुश लगाना था. ईरान पर अमेरिका और इजराइल के हमलों के बाद शुरू हुए संघर्ष के बीच आयात बिल बढ़ने से रुपये पर दबाव की चिंता भी सामने आई थी. इसी पृष्ठभूमि में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से सोना खरीदने से बचने की अपील की थी.

सोने और चांदी के आयात के आंकड़े

वित्त वर्ष 2026-27 के अप्रैल से अगस्त के दौरान भारत का सोने का आयात 3.38 फीसदी बढ़कर 17.47 अरब डॉलर हो गया. वहीं, इसी अवधि में चांदी का आयात 8.81 फीसदी घटकर 1.74 अरब डॉलर रहा.

क्या ग्राहकों के लिए महंगा होगा सोना?

IGST छूट खत्म होने से संबंधित बैंकों और नामित एजेंसियों के लिए सोने, चांदी और प्लैटिनम का आयात महंगा हो सकता है. आयात की लागत बढ़ने का असर घरेलू बाजार पर भी पड़ने की आशंका है. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि ग्राहकों के लिए सोने की कीमत सीधे 3 फीसदी बढ़ जाएगी. सोने और चांदी की घरेलू कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार के भाव, रुपये की विनिमय दर, आयात शुल्क, मांग और अन्य लागतों पर भी निर्भर करती हैं. इसलिए ग्राहकों पर इस फैसले का वास्तविक असर बाजार की परिस्थितियों के अनुसार तय होगा.