धनतेरस से पहले सोने-चांदी में बड़ी गिरावट! एक घंटे में ₹4,400 से ज्यादा टूटे दाम, क्या खरीदारी का मौका है?

सौरभ दीक्षित

• 12:34 PM • 03 Nov 2026

धनतेरस और दिवाली से पहले सोने और चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिली है. मंगलवार को बाजार खुलने के महज एक घंटे के अंदर MCX पर सोना 1,386 रुपये और चांदी 4,429 रुपये तक टूट गई. आखिर सोने-चांदी की कीमतों में अचानक गिरावट क्यों आई?

NewsTak
Google CTA

सोचिए... आप धनतेरस और दिवाली पर सोना या चांदी खरीदने का प्लान बना रहे हैं. लेकिन पिछले कुछ समय से कीमतें इतनी ज्यादा हैं कि खरीदारी करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे. अब अचानक बाजार खुलते ही सोने और चांदी के दाम धड़ाम से नीचे आ जाते हैं. चांदी एक ही घंटे में 4,400 रुपये से ज्यादा सस्ती हो जाती है और सोने की कीमत भी 1,400 रुपये के करीब गिर जाती है. तो क्या त्योहारों से पहले आई यह गिरावट सोना-चांदी खरीदने का मौका है? या फिर आने वाले दिनों में इनकी कीमतें और नीचे जा सकती हैं? आखिर ऐसा क्या हुआ कि सोने और चांदी दोनों पर बिकवाली का दबाव बढ़ गया है?

Read more!

कीमतों में कितनी गिरावट आई

मंगलवार को बाजार खुलने के बाद महज एक घंटे के अंदर दोनों कीमती धातुओं के दाम में बड़ी गिरावट देखने को मिली. सुबह 10 बजे मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX पर दिसंबर डिलीवरी वाला सोना 1 लाख 38 हजार 875 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था. इस दौरान सोने की कीमत में 1,386 रुपये की गिरावट आ चुकी थी. वहीं, दिसंबर डिलीवरी वाली चांदी की कीमत 2 फीसदी से ज्यादा टूटकर 1 लाख 79 हजार 200 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई. यानी एक किलो चांदी के दाम में 4,429 रुपये की गिरावट आ चुकी थी. अब जाहिर है कि धनतेरस और दिवाली से पहले कीमतों में आई इस गिरावट पर उन लोगों की नजर होगी, जो लंबे समय से सस्ता सोना और चांदी खरीदने का इंतजार कर रहे थे. लेकिन सवाल यह है कि क्या अभी खरीदारी कर लेना सही रहेगा?

बाजार के जानकारों का क्या कहना है?

जानकारों के मुताबिक, घरेलू बाजार में अगले कुछ दिनों तक सोने की कीमत 1 लाख 36 हजार 500 रुपये से लेकर 1 लाख 41 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम के दायरे में रह सकती है. यानी फिलहाल सोने की कीमतों में बहुत तेज उछाल की उम्मीद कम है. आने वाले दिनों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है.

इसकी सबसे बड़ी वजह है अमेरिका में ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता. बाजार को डर है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनाए रख सकता है. अगर ऐसा होता है, तो सोने और चांदी जैसी कीमती धातुओं पर दबाव बना रह सकता है.

एलकेपी सिक्योरिटीज के वाइस प्रेसिडेंट और कमोडिटी एंड करेंसी रिसर्च एनालिस्ट जतिन त्रिवेदी के मुताबिक, फिलहाल सोने की कीमतों में अस्थिरता बनी रह सकती है. घरेलू बाजार में सोना करीब 1 लाख 38 हजार 300 रुपये के आसपास और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कॉमेक्स गोल्ड करीब 3,900 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर कारोबार कर रहा है.

निवेशकों की नजर अब अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अगले कदम पर है. जब तक ब्याज दरों को लेकर तस्वीर साफ नहीं होती, तब तक सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है. अब समझते हैं कि आखिर सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट की पांच बड़ी वजहें क्या हैं. पहली वजह- अमेरिकी बॉन्ड से मिल रहा बेहतर रिटर्न.

अमेरिका में 10 साल के सरकारी बॉन्ड की यील्ड 5 फीसदी से ऊपर पहुंच गई है. इसका मतलब है कि निवेशकों को अमेरिकी सरकारी बॉन्ड में पैसा लगाने पर अच्छा रिटर्न मिल सकता है.

दूसरी तरफ, सोने और चांदी में निवेश करने पर नियमित ब्याज नहीं मिलता. ऐसे में कुछ निवेशक सोना-चांदी बेचकर अपना पैसा बॉन्ड में लगा रहे हैं. इससे कीमती धातुओं की कीमतों पर दबाव बढ़ रहा है.

दूसरी वजह- अमेरिका में महंगाई और ब्याज दरों का डर.

अमेरिका में महंगाई अभी भी चिंता का विषय बनी हुई है. ऊर्जा की बढ़ती कीमतों और ईरान से जुड़े तनाव के कारण महंगाई का दबाव बना हुआ है.

अगर महंगाई ज्यादा समय तक बनी रहती है, तो अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरें बढ़ा सकता है या उन्हें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर रख सकता है.

ब्याज दरें ऊंची रहने से सोने और चांदी जैसे निवेश पर दबाव आता है. यही वजह है कि निवेशक फिलहाल फेडरल रिजर्व के फैसलों का इंतजार कर रहे हैं.

डॉलर की मजबूती

दुनिया भर में सोने और चांदी की कीमतें अमेरिकी डॉलर में तय होती हैं. ऐसे में जब डॉलर मजबूत होता है, तो दूसरे देशों के खरीदारों के लिए सोना और चांदी खरीदना महंगा हो जाता है. इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में इनकी मांग प्रभावित हो सकती है. मांग घटने की आशंका कीमतों पर दबाव बढ़ाती है.

चौथी वजह- शेयर बाजार में बिकवाली और नकदी जुटाने की जरूरत. शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव के साथ टेक्नोलॉजी और AI कंपनियों के शेयरों में बिकवाली का असर भी कीमती धातुओं पर पड़ा है. कुछ निवेशक शेयर बाजार में हुए नुकसान की भरपाई करने या दूसरे निवेश के लिए नकदी जुटाने के मकसद से सोना और चांदी बेच रहे हैं.

यानी जिन्हें लगता है कि मुश्किल समय में सोना-चांदी हमेशा सहारा देंगे, वे भी कभी-कभी जरूरत पड़ने पर इनकी बिकवाली कर सकते हैं.

पांचवीं वजह- रिकॉर्ड तेजी के बाद मुनाफावसूली.

इस साल जनवरी में अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत 5,595 डॉलर प्रति औंस का रिकॉर्ड स्तर पार कर गई थी. इतनी बड़ी तेजी के बाद कई निवेशकों और बड़े फंडों ने मुनाफा निकालना शुरू कर दिया. जब बड़ी संख्या में निवेशक एक साथ सोना और चांदी बेचते हैं, तो कीमतों पर गिरावट का दबाव बढ़ जाता है.

तो क्या धनतेरस और दिवाली से पहले सोना-चांदी खरीदना सही रहेगा?

देखिए, कीमतों में गिरावट आने का मतलब यह नहीं है कि अब सोना-चांदी खरीदना हर किसी के लिए फायदेमंद ही होगा. बाजार में अभी अमेरिकी ब्याज दरों, डॉलर की चाल और वैश्विक तनाव को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है.

जो लोग त्योहारों के लिए गहने खरीदना चाहते हैं, वे अपनी जरूरत और बजट के हिसाब से खरीदारी का फैसला कर सकते हैं. वहीं, निवेश के मकसद से खरीदने वालों को जल्दबाजी में पूरा पैसा लगाने से बचना चाहिए. कीमतों में आगे भी उतार-चढ़ाव हो सकता है.

कुल मिलाकर, धनतेरस और दिवाली से पहले सोने-चांदी की कीमतों में आई गिरावट ने खरीदारों को राहत जरूर दी है. लेकिन बाजार की अगली चाल काफी हद तक अमेरिकी फेडरल रिजर्व, डॉलर और वैश्विक आर्थिक हालात पर निर्भर करेगी.

इसलिए खरीदारी से पहले कीमतों के साथ-साथ अपनी जरूरत और निवेश की अवधि को भी जरूर ध्यान में रखिए.